Lok sabha election 2024: मुस्लिम वोटर्स के लिए BJP ने बनाया मेगा प्लान, जयंत-अजित के साथ मिलकर बनाई ये रणनीति
Lok sabha election 2024, लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर पार्टियों ने प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। कांग्रेस समर्थिक इंडिया गठबंधन और बीजेपी समर्थित एनडीए वोटर्स को लुभाने के लिए रणनीतिया बना रहा है। बीजेपी जहां अपनी जीत का फिर से दावा करती दिख रही है। वही विपक्ष मोदी को हटाने के लिए पूरी कोशिश में जुटा हुआ है।
बीजेपी और पीएम मोदी इस बार एनडीए के 400 पार का नारा दे रहे हैं। इसके लिए बीजेपी नई रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी अपने खाते में मुस्लिम वोटर्स को जोड़ने के लिए सीधे प्लान के बजाय एक साइलेंट प्लान पर काम कर रही है।

देश में मुस्लिम आबादी करीब 20 फीसदी है। जो देश की 60 से 70 सीटों पर एक निर्णायक वोट बैंक है। ऐसे में मुस्लिम वोटरों की अहमियत को देखते हुए बीजेपी समेत अन्य राजनीतिक दल उन्हें अपने पाले में करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। लेकिन बीजेपी की छवि एंटी मुस्लिम पार्टी के तौर पर जानी जाती है। ऐसे में पार्टी सीधे तौर पर उनसे जुड़ने के बजाय अपने सहयोगी दलों की मदद से साधने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी समर्थित एनडीए के साथ हाल ही में सहयोगी बने एनसीपी के अजित पवार से लेकर आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार की मुस्लिमों के बीच अपनी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी इन दलों को आगे करके मुस्लिम वोटर्स को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।
बिहार में नीतीश का सहारा
बिहार में करीब 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। राज्य की 8 लोकसभा सीट ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर अहम भूमिका अदा करते हैं। सीमांचल की चारों लोकसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। बिहार में नीतीश को मुस्लिम वोट मिलते रहे हैं। बीजेपी ने बिहार में नीतीश को फिर अपने पाले में मिला लिया है। अब बीजेपी नीतीश के सहारे मुस्लिम वोटर्स को अपने पाले में लाने की कोशिश करेगी। बीजेपी बैकडोर से मुस्लिम वोटों मतों को अपने खाते में जोड़ने की योजना बना रही है।
महाराष्ट्र में अजित पवार के साथ मिलकर बनाया प्लान
महाराष्ट्र में हाल ही में एनडीए में शामिल हुए अजित पावर के जरिए बीजेपी राज्य को मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटी हुई है। राज्य में मुस्लिम वोटर करीब 16 फीसदी हैं। राज्य में एनसीपी को मुस्लिम मतदाता वोट देते आए हैं। अब चूंकि अजित पवार के हाथ में एनसीपी है तो ऐसे में कुछ फीसदी मुस्लिम मतदाता अजित पवार के साथ भी आ सकते हैं। जो एनडीए के वोट में अहम भूमिका निभा सकता है।
बीजेपी मुस्लिम वोटों को साधने के बजाय अजित पवार के जरिए बैकडोर से दांव चल रही है ताकि मुस्लिमों के एक तबके के कुछ वोट को जोड़ा जा सके। इसका ताजा उदाहरण बाबा सिद्दकी का कांग्रेस छोड़ एनसीपी का दामन थामना रहा है। वह इन नेताओं के जरिए मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि महाराष्ट्र में कांग्रेस , शरद पवार और उद्धव ठाकरे की मुस्लिम वोटरों में काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
यूपी में जयंत के साथ आने से होगा फायदा?
पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर मुस्लिम वोटर काफी निर्णायक हैं। वहीं आरएलडी चीफ जयंत चौधरी की इन मतदाताओं पर काफी अच्छी पकड़ भी मानी जाती है। जयंत काफी समय से इलाके में जाट-मुस्लिम की राजनीति कर रहे हैं। इसी समीकरण को देखते हुए बीजेपी जयंत को अपने साथ लेकर आई है। ताकि जाट वोट के साथ-साथ मुस्लिम वोट भी उनके खाते में बैकडोर से आ सके।












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