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Chunavi Kisse: जब रैली में अटल जी ने मंच से पकड़ा दूसरा माइक, करने लगे भाषण का ट्रांसलेट, फिर जो हुआ

Lok Sabha Election Chunavi Kissa: देश में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी माहौल गर्म है। ऐसे में हम आपको ऐसे चुनावी किस्सों से रूबरू कराते हैं, जिनकी चर्चा आज भी होती है। ऐसा ही एक किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा है, जिन्होंने एक चुनावी रैली के दौरान मंच पर दूसरा माइक पकड़कर भाषण का अनुवाद करते हुए जनता को संबोधित किया।

चुनावी रैली में भाषण ट्रांसलेट करने का यह अनोखी घटना लोकसभा चुनाव 1967 की है। उन दिनों अटल बिहार जनसंघ के नेता के तौर पर पार्टी के प्रचार-प्रचार में व्यस्त थे। इसी कड़ी में एक जनसभा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आयोजित की गई थी।

Atal Bihari vajpayee

दरअसल, 1962 के आम चुनावों के वक्त रैली को संबोधित करने के लिए अटल बिहारी बाजपेयी के साथ जम्मू कश्मीर से पंडित प्रेमनाथ डोगरा को बुलाया गया था। वो अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ स्टार प्रचारक भी थे।

प्रतापगढ़ के गोपाल मंदिर के पास रैली के लिए मंच तैयार था। शाम के करीब 4 बजे हुए थे। मंच को बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामसेवक त्रिपाठी संचालित कर रहे थे। भारी संख्या में पहुंचे लोग अपने नेता के भाषण को सुनने के लिए आतुर थे। ऐसे में जैसे ही मंच पर प्रेमनाथ डोगरा पहुंचे और उन्होंने बिना देर किए माइक पकड़ा और इंग्लिश में बोलना शुरू किया।

अपने पहले ही वाक्य में उन्होंने कहा, "डियर सिटीजन, आई एम वेरी ग्लैंड टू विजिट प्रतापगढ़, सॉरी फॉर दी डीले''। उनके इन शब्दों को सुनकर जनसभा में एक दम सन्नाटा छा गया। साफ लग रहा था कि किसी को अंग्रेजी का एक भी शब्दों समझ नहीं आया।

वाजपेयी ने पकड़ा दूसरा माइक और फिर...

इसके बाद क्या था? जनता के मन को पढ़ते हुए अटल बिहार वाजपेयी आगे आए और उन्होंने मंच से दूसरा माइक संभाल लिया, जिसके बाद अटल जी ने कहा, "प्यारे नागरिकों, मुझे प्रतापगढ़ आने की बेहद खुशी है। देरी के लिए क्षमा मांगता हूं।'' इसके बाद अटल जी ने कहा कि, "ऐसा मैं नहीं, हमारे अध्यक्ष पंडित प्रेमनाथ डोगरा कह रहे हैं। अब वो अंग्रेजी में जो कुछ कहेंगे, मैं उसका अनुवाद करके आप तक पहुंचाऊंगा।"

इसके बाद क्या था, सभा में लोगों ने जोरदार तालियां बजना शुरू कर दी। और फिर इंग्लिश में बोलते उसे प्रेमनाथ के शब्दों को वाजपेयी ने हिंदी में अनुवाद करते हुए जनता तक पहुंचाए। हालांकि दोनों नेताओं के जमकर प्रचार करने के बाद भी पार्टी को यहां फायदा नहीं पहुंचा और नतीजों में कांग्रेस प्रत्याशी राजा दिनेश सिंह ने जनसंघ के प्रत्याशी ओएन द्विवेदी को 92 हजार वोट से हरा दिया था।

प्रेमनाथ डोगरा को नहीं आती थी हिंदी

दरअसल, प्रेमनाथ डोगरा को हिंदी अच्छे से नहीं आती थी। वो टूटी-फूटी ही हिंदी बोल पाते थे। ऐसे में प्रतापगढ़ आने पर उन्होंने इंग्लिश में भाषण देना उचित समझा। बता दें कि पंडित डोगरा के पिता पं. अनंत राय जम्मू कश्मीर के महाराजा रणवीर सिंह के वक्त रणवीर गवर्नमेंट प्रेस के अधीक्षक थे। इसके बाद उन्होंने लाहौर में कश्मीर प्रॉपर्टी के अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाली।

ऐसे में प्रेमनाथ डोगरा का भी बचपन वहीं हवेली में ही बीता था। उन्होंने 1904 में मॉडल स्कूल, लाहौर से मैट्रिक पास की थी। उस जमाने में मॉडल स्कूल इंग्लिश शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था। वहीं एफसी कॉलेज से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन किया। इसी वजह से उनकी अंग्रेजी पर बड़ी अच्छी पकड़ थी।

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