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लोकसभा चुनाव: केरल में 'कमल' खिलाने के बीजेपी के सपने पर 'ग्रहण', लैटिन चर्च ने दे दिया झटका?

Lok Sabha Election News: केरल में लैटिन चर्च ने अचानक एक सर्कुलर जारी किया है, इससे राज्य में चुनावी समीकरण बदलने की आशंका पैदा हुई है। लैटिन आर्चडायोसिस ने एक सर्कुलर जारी करके देश में अल्पसंख्यकों खासकर ईसाइयों के खिलाफ कथित हमले और कथित विभाजनकारी राजनीति की निंदा की है।

चर्च के सर्कुलर में आरोप लगाया गया है कि समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा किया जा रहा है, इसके लिए चर्च की ओर से 22 मार्च को उपवास का आह्वान किया गया है। सर्कुलर में आरोप लगाया गया है कि देश में विभाजनकारी राजनीति की वजह से सामाजिक सौहार्द को खतरा है।

kerala church and bjp

'लोकतंत्र खतरे में': केरल के चर्च से सर्कुलर जारी
यही नहीं, इसने विपक्षी दलों की यह लाइन भी ली है कि देश में 'लोकतंत्र खतरे में' है। दावे के मुताबिक इन दिनों देश में संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इसके अनुसार खासकर चर्च पर 2014 में 147 हमले होने की रिपोर्ट थी, जो कि 2023 में बढ़कर 687 हो गए हैं।

इसे भी पढ़ें- Lok Sabha Election: 37 करोड़ वोट जुटाने के लिए क्या कर रही है बीजेपी? पीएम मोदी ने सेट किया है टारगेट

लोकसभा चुनावों की घोषणा के अगले दिन ही आया सर्कुलर
दिलचस्प बात ये है कि यह सर्कुलर तिरुवनंतपुरम के आर्कबिशप थॉमस जे नेट्टो की ओर से जारी किया गया है, जिसमें 22 तारीख को उपवास और प्रार्थन दिवस के रूप में मनाने की बात कही गई है। गौर करने वाली बात ये है कि लोकसभा चुनाव तारीखों की घोषणा के अगले दिन ही यह सर्कुलर सामने आया है।

केरल में 'कमल' खिलाने के बीजेपी के सपने पर 'ग्रहण'?
केरल में बीजेपी पहली बार 'कमल' खिलाने की उम्मीद के भरोसे चुनाव अभियान चला रही है तो इसमें ईसाई वोट बैंक का भरोसा बहुत ज्यादा मायने रख रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की 20 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को डबल डिजिट में सीटें मिलने की भविष्यवाणी की हुई है। ऐसे में लैटिन चर्च की ओर से जारी यह सर्कुलर उसके चुनावी इरादे को झकझोर सकता है।

चर्च के नेताओं और मछुआरों से केस वापस होने के बाद आया सर्कुलर
एक गौर करने वाली बात और है कि सीपीएम की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार का अबतक लैटिन आर्चडायोसिस के साथ विझिंजम पोर्ट हड़ताल को लेकर छत्तीस का आंकड़ा था।

लेकिन, पिछले हफ्ते ही उसने आंदोलनकारी मछुआरों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए थे; और उसके बाद ही चर्च की ओर से ऐसा बयान सामने आया है।

तिरुवनंतपुरम सीट पर बीजेपी की बढ़ सकती है मुश्किल
माना जा रहा है कि चुनावों से पहले चर्च की ओर से जारी इस सर्कुलर से बीजेपी को खासकर तिरुवनंतपुरम सीट पर ज्यादा बड़ा झटका लग सकता है। यहां लैटिन कैथोलिक समुदाय का वोट चुनाव में प्रभावी भूमिका निभाता है। बीजेपी ने यहां से इस बार केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को उतारा है।

केरल की इन सीटों पर भी बीजेपी की उम्मीदों को लग सकता है झटका
इसके अलावा केरल की कोल्लम, एर्नाकुलम, अलपुझा और चलाकुडी लोकसभा सीटों पर भी चर्च के फैसले से चुनाव प्रभावित होने की आशंका है।

लेफ्ट सरकार ने अचानक क्यों दिखाई सहानुभूति?
बता दें कि दिसंबर 2022 में विझिंजम में अडाणी ग्रुप के इंटरनेशनल बंदरगाह के निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर आर्क-बिशप से लेकर चर्च के कई पादरियों और समुदाय के अनेकों मछुआरों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किए गए थे।

हालांकि, चर्च की ओर से जारी बयान से सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ को फायदा मिलेगा या कांग्रेस की यूडीएफ को यह देखने वाली बात है। लेकिन, फिलहाल तो यही लगता है कि इससे बीजेपी के मंसूबों को जरूर धक्का लग सकता है।

भाजपा केरल में ईसाइयों को अपने साथ जोड़ने के लिए पिछले करीब एक साल से लगातार कोशिशें कर रही है। ईस्टर में बीजेपी नेताओं के प्रमुख बिशपों के घर पहुंचने के साथ ही पार्टी ने क्रिसमस के दौरान उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए 'स्न्हे यात्रा' का भी आयोजन किया था।

बीजेपी को इसका फायदा मिलता भी दिख रहा था। पीसी जॉर्ज जैसे बड़े ईसाई नेता ने इसी साल जनवरी में अपनी पार्टी केरल जनपक्षम (सेक्युलर) की बीजेपी में विलय भी कर लिया है।

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