Lok Sabha Chunav 2024: अल्पसंख्यकों के लिए मोदी सरकार ने 2014 के बाद क्या किया? हैरान कर देंगे ये आंकड़े
Modi Government Policies for Minorities: केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2014 से सत्ता में है। इन 10 वर्षों उसने विकास के क्या काम किए हैं, यह तो जनता के सामने है। लेकिन, मोदी सरकार पर अक्सर अल्पसंख्यक-विरोधी होने के आरोप लगते हैं।
लेकिन, अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए चल रहे भारत सरकार के तमाम कार्यक्रमों और नीतियों को देखें तो आंकड़े हैरान करने वाले हैं। हम यहां उन नीतियों या कार्यक्रमों का जिक्र नहीं कर रहे, जो राजनीतिक रूप से चर्चित हैं।

अल्पसंख्यकों के लिए मोदी सरकार ने 2014 के बाद क्या किया?
हम यहां अल्पसंख्यकों को शिक्षित, कुशल और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही नीतियों और योजनाओं की हकीकत पेश कर रहे हैं।
सरकारी नौकरी में हिस्सेदारी
पहले सिर्फ 4.5% अल्पसंख्यक सरकारी नौकरी में थे, 2014 में ये बढ़कर 10% हो गए। इसी तरह से प्रतिष्ठित सिविल सेवा में पहले मात्र 2.5% इनकी हिस्सेदारी थी, जो 2014 के बाद बढ़कर 5% हो गई।
कौशल विकास में मदद
पहले कौशल विकास का प्रशिक्षण लेने वाले लाभार्थी महज 20,000 थे, जिनकी संख्या 2014 के बाद बढ़कर 21,50,000 हो गई। गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट योजना के लाभार्थियों की संख्या 2014 के बाद 1,06,600 हो चुकी है।
शिक्षा के क्षेत्र में सहायता
पहले छात्रवृत्ति पाने वाले अल्पसंख्यकों की संख्या 3.03 करोड़ थी, जो कि 2014 के बाद बढ़कर 5.20 करोड़ हो गई। इसमें प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तौर पर दी गई राशि 855 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,425 करोड़ रुपए हो गई।
वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की रकम 493 करोड़ रुपए से बढ़कर 515 करोड़ रुपए पहुंच गई। छात्रवृत्ति पाने वाली अल्पसंख्यक छात्राओं की संख्या 2014 से पहले 90.5 लाख थी, जो कि 2014 के बाद 121 लाख हो गई।
विशेष, प्रतियोगी और उच्च शिक्षा में सहयोग
एम फिल या पीएचडी करने वाले मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप के अल्पसंख्यक लाभार्थियों की संख्या 2014 से पहले 11,336 थी, जो कि उसके बाद बढ़कर 15,120 हो गई।
नई उड़ान योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं (सिविल सर्विस आदि) के परीक्षार्थियों के लाभार्थियों की संख्या 2014 के पहले मात्र 483 थी, जो कि उसके बाद बढ़कर 4,142 हो गई।
वहीं विदेश में पढ़ने वालों के लिए 'पढ़ो परदेश योजना' के तहत 2-14 के बाद 3,251 अल्पसंख्यक छात्रों को फायदा मिल चुका है।
अल्पसंख्यक लड़कियों की सहायता
बेगम हजरत महल योजना (अल्पसंख्यक लड़कियों के लिए) के लाभार्थियों की संख्या 2014 से पहले के 1,49,382 से बढ़कर 2,57,908 हो चुकी है। इसी तरह से 'सीखो और कमाओ' की लाभार्थी 20,164 से बढ़कर 3,17,290 हो चुकी हैं।
'उस्ताद योजना' के लाभार्थियों की संख्या अंतिम आंकड़ा मिलने तक 19,704 हो चुका है। इसी तरह से नई मंजिल योजनाओं के लाभार्थी की तादाद भी 1,00,000 हो चुकी है। नई रोशनी योजना के लाभार्थी 2014 से पहले 97,825 थे, जो कि अब 2,95,000 हो चुके हैं।
'हुनर हाट' योजना की शुरुआत
मोदी सरकार ने अलग से अल्पसंख्यकों के लिए 'हुनर हाट' योजना शुरू की है, जिसके लाभार्थियों की संख्या 2 लाख (मिले अंतिम आंकड़े) हो चुके हैं।
रोजगार के लिए ऋण
स्वरोजगार के लिए 2014 से पहले अल्पसंख्यकों को 1786 करोड़ रुपए का लोन दिया गया, जबकि 2014 के बाद 1979 करोड़ रुपए दिया गया। अल्पसंख्यकों को कुल 325.46 करोड़ रुपए (2013-14) का लोन दिया गया। 2022-23 में 881.7 करोड़ रुपए ऋण के रूप में आवंटित किए गए।
सरकारी ऋण के अल्पसंख्यक लाभार्थियों की संख्या 2013-14 में 75,966 थी, जबकि 2022-23 में 2,05,777 हो गई।












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