1 अगस्त से वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने का काम हो रहा है शुरू, डिटेल देखिए
नई दिल्ली, 25 जुलाई: चुनाव आयोग अगले 1 अगस्त से मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड को लिंक करने की मुहिम शुरू करने जा रहा है। इसके खिलाफ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचे थे, लेकिन सोमवार को उन्हें देश की सबसे बड़ी अदालत से तत्काल कोई राहत नहीं मिली है। अलबत्ता सुप्रीम कोर्ट ने उनसे कहा है कि वे चाहें तो दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। केंद्र सरकार ने पिछले साल इस संबंध में संसोधित किए गए कानूनी प्रक्रियाओं को लागू करने की अधिसूचना पिछले महीने ही जारी कर दी थी। अब चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे उम्मीद है कि लाखों कथितफर्जी वोटरों का नाम मतदाता सूची से बाहर हो सकता है।

1 अगस्त से वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने का काम
चुनाव आयोग 1 अगस्त से वोटर आई कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने का अभियान शुरू करने जा रहा है। इसका मकसद मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है और यह देखना है कि कोई वोटर एक ही समय में एक निर्वाचन क्षेत्र से ज्यादा का मतादाता नहीं रहे या एक ही निर्वाचन क्षेत्र में कई मतदान केंद्रों का वोटर ना रहने पाए। इस बात की जानकारी सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत देशपांडे ने दी है। गौरतलब है कि इस प्रक्रिया के खिलाफ कांग्रेस के एक नेता पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन सर्वोच्च अदालत से उन्हें फौरी राहत नहीं मिली है।

फर्जी मतदाताओं का पता चल जाएगा
भारतीय चुनाव आयोग के फैसले की जानकारी देते हुए महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत देशपांडे ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है, 'भारतीय निर्वाचन आयोग 1 अगस्त से पूरे राज्य में मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से लिंक करने का अभियान शुरू करेगा।' उन्होंने कहा, 'वोटरों की पहचान सुनिश्चित करने और मतदाता सूची में दर्ज सूचनाओं के प्रमाणीकरण और एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में या एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार एक ही शख्स के नाम के पंजीकरण की पहचान करने के लिए अब वोटर आई कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा।'

सुप्रीम कोर्ट ने सुरजेवाला को हाई कोर्ट जाने को कहा
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस अभियान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने वोटर आई कार्ड को आधार इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए बने निर्वाचन कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 को चुनौती दी थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनसे कहा कि इस मामले में सक्षम हाई कोर्ट से संपर्क करें। सुरजेवाला ने निर्वाचन कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 की धारा 4 और 5 की संवैधानिकता को चुनौती दी है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की अदालत ने उनके वकील से कहा कि वह हाई कोर्ट से संपर्क कर सकते हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा, 'आप दिल्ली हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते? वहां भी आपको वही रिमेडी मिलेगी।........आप यहां क्यों आए हैं?'

आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट में हो सकती है सुनवाई
इससे पहले सुरजेवाला के वकील ने अदालत में दलील रखी थी कि अगले 6 महीनों में तीन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए उनकी याचिका पर सुनवाई महत्वपूर्ण है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है। आर्टिकल 226 हाई कोर्ट को सरकार समेत किसी भी व्यक्ति या प्राधिकार को विभिन्न मामलों में रिट जारी करने का अधिकार देता है।
पिछले महीने ही कानून मंत्रालय ने जारी की थी अधिसूचना
गौरतलब है कि कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग की सलाह से पिछले महीने ही रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 और कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 में बदलाव किया था, जिससे पिछले साल हुआ चुनाव सुधार प्रभावी हो गया था, जिसमें मतदाता पहचान पत्र को आधार से लिंक करना भी शामिल है। इसके अलावा हर साल नए वोटरों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए चार योग्य तारीखों की व्यवस्था भी शुरू की गई है। तभी यह व्यवस्था, 1 अगस्त, 2022 से लागू होने की बात कही गई थी। (तस्वीरें-फाइल)












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