जेएनयू छात्र संघ चुनाव का LGBTQI चेहरा

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पढ़ाई के आलावा छात्र राजनीति के लिए भी चर्चा में रहता है.

यहां हर तबके, देश के ज्वलंत मुद्दे और राजनीति में चल रहे बयानबाजियों पर खूब वाद-विवाद होते हैं. हर विचारधारा की बात होती है पर विश्वविद्यालय को वाम विचारधारा से जोड़ कर देखा जाता है.

इन दिनों जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव हो रहे हैं और शुक्रवार को इसके लिए छात्रों ने वोट डाले.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और लेफ्ट जैसे संगठनों की छात्र इकाई चुनावी मैदान में हैं. सबसे अपने वादे और दावे हैं., बेहतरी की योजनाएं हैं

हर बार ऐसा होता है पर इस बार छात्र संघ चुनावों में कुछ ख़ास है और वो है LGBTQI समुदाय का उम्मीदवार.

स्नेहाशीष दास उड़ीसा के पुरी से हैं. वो बापसा यानि बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ़ से एसएसएस (स्कूल फ़ॉर सोशल साइंस) में काउंसलर के उम्मीदवार हैं.

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

जेएनयू में बापसा 2014 में अपने अस्तित्व में आई और 2015 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरा.

पिछड़ा समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले स्नेहाशीष खुद को क्वीर (Queer) कहलाना पसंद करते हैं. सभी LGBTQI समुदाय को एक साथ क्वीर समुदाय भी कहा जाता है. इस समुदाय के लोगों को विपरीत या सामान या दोनों तरह के सेक्स में रूचि होती है.

स्नेहाशीष जेएनयू से समाजशास्त्र में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं. वो बचपन से ही खुद को दूसरों से अलग महसूस करते थे.

वो बताते हैं, "मुझे नहीं पता था क्वीर क्या होता है. इसका शाब्दिक अर्थ मुझे ग्रेजुएशन के समय आया. लेकिन बचपन से ही यह महसूस होता था कि मुझे मेक-अप करना पसंद है, साड़ी पहनना पसंद है. मैं इसी बात को खुलकर नहीं कह पाता था तो अपनी पंसद-नापसंद बताना तो मेरे लिए और भी मुश्किल था."

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

उधेड़बुन में बीता बचपन

फिलहाल स्नेहाशीष जेएनयू आकर खुश हैं. यहां सबसे पहले उन्होंने खुद के अस्तित्व और अपने पसंद को स्वीकारा और वो अब इस बात से खुश हैं कि लोग उन्हें स्वीकार रहे हैं.

06 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा-377 की क़ानूनी वैधता पर फ़ैसला सुनाया था. अब आपसी सहमति से दो समलैंगिकों के बीच बनाए गए संबंध को आपराध नहीं माना जाता है.

स्नेहाशीष सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले से काफी खुश हैं लेकिन उनका बचपन उधेड़बुन में बीता था.

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

मां को समझाना मुश्किल

बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "मैं गांव से आता हूं. ऐसी जगह पर क्वीर क्या होता है ये ही समझाना मुश्किल है, तो स्वीकारने की तो बात ही नहीं उठती. मेरे माता-पिता पढ़ लिखे हैं. लेकिन उनके लिए भी मेरी पहचान स्वीकार करना मुश्किल था. पापा को तो कुछ-कुछ समझ आता है पर मां को समझाना मुश्किल हैं."

"मैं घर में सबसे बड़ा हूं इसलिए अपने छोटे भाई-बहन को इसके बारे में समझाता हूं. जब भी घर जाता हूं तो समझाता हूं कि मुझे साड़ी पहनना पसंद हैं और मुझे ट्रांस सेक्सुअलटी पसंद हैं."

लेकिन स्नेहाशीष दो बात से आज भी डरते हैं. पहला डर है- टॉयलेट जाने से. उनके मुताबिक, "टॉयलेट एक ऐसी जगह है, जहां सबसे ज्यादा शर्मिंदगी होती है. डर लगता है कि मेरे साथ वहां कुछ गलत न हो जाए."

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

जातीय भेदभाव का डर

"ये बात मैं विश्वविद्यालय के लिए कह रहा हूं. जब यहां इस तरह का महसूस होता है तो बाहर तो इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है."

स्नेहाशीष का दूसरा डर है- जाति का डर.

वो कहते हैं, "जाति के आधार पर भेदभाव का डर हमेशा से रहा है मैं सबको इस बारे में बताता ही नहीं था. और ऐसे में यदि ये पता चले कि मुझे क्या पंसद है और मैं क्या हूं तो लगता था कि कोई स्वीकारेगा ही नहीं."

"दोस्तों को बताने के लिए पहले मुझे पहले अपनी जाति स्वीकारनी पड़ी और फिर क्वीर कहलाना स्वीकार किया."

आज स्नेहाशीष को खुशी है कि उनके दोस्तों ने उन्हें हमेशा समझा. जाति का बंधन टूटा और क्वीर कहलाना अब बुरा नहीं लगता.

जेएनयू, छात्र संघ चुनाव, JNUSU, QWEER, LGBTQI

चुनाव में कैंपेनिंग के दौरान सभी पार्टी के उम्मीदवारों ने अलग-अलग वादे किए हैं, लेकिन स्नेहाशीष दूसरों से अलग काम करना चाहते हैं.

वो कहते हैं कि अगर वो जीतते हैं तो वो उस रूढ़िवादी प्रथा को तोड़ेंगे जो केवल महिला-पुरुषों के लिए बात करते हैं. जो थर्ड जेंडर है उनके लिए बाथरूम-हॉस्टल की सुविधा शुरू करेंगे, जिसमें किसी भी व्यक्ति की मूलभूत जरूरतें पूरी हो सके.

इसके साथ ही स्नेहाशीष जेएनयू में साफ़-सफ़ाई, हॉस्टल, साफ़ पानी, आरक्षण और क्लास में उपस्थिति की अनिवार्यता को ख़त्म करना चाहते हैं.


bbchindi.com

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+