जनता कॉलेजियम सिस्टम से खुश नहीं, भारत में ही जज अपने भाई को जज नियुक्त करते हैं: कानून मंत्री किरेन रिजिजू
जनता कॉलेजियम सिस्टम से खुश नहीं, भारत में ही जज अपने भाई को जज नियुक्त करते हैं: कानून मंत्री किरेन रिजिजू
Kiren Rijiju On collegium system: केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि देश के लोग कॉलेजियम सिस्टम से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने महसूस किया है कि देश में जजों को नियुक्त करने के लिए बने कॉलेजियम सिस्टम से जनता खुश नहीं है क्योंकि इससे न्याय मिलने में देरी होती है। मंत्री किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि देश की संविधान के मुताबिक जजों की नियुक्ति करना सरकार का काम है। आरएसएस द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका 'पांचजन्य' द्वारा सोमवार को अहमदाबाद में आयोजित 'साबरमती संवाद' में बोलते हुए ,किरेन रिजिजू ने कहा, मैंने देखा है कि जज आधे से ज्यादा वक्त जजों की नियुक्ती में लगा देते हैं, जिससे जनता को इंसाफ देने का, उनका प्राथमिक काम पर असर पड़ रहा है।

भारत छोड़, दुनिया में ये कहीं भी प्रथा नहीं है कि जज अपने भाई को जज बनाए...'
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "मैं जानता हूं कि देश के लोग जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम सिस्टम से बिल्कुल खुश नहीं हैं। अगर हम संविधान की से चलते हैं तो जजों की नियुक्ति सरकार का काम है।" किरेन रिजिजू ने कहा, ''दूसरी बात, भारत को छोड़कर दुनिया में कहीं भी यह प्रथा नहीं है कि जज अपने भाइयों को जज नियुक्त करते हैं। तीसरी बात, कानून मंत्री के रूप में, मैंने देखा है कि जजों का आधा समय और दिमाग यह तय करने में व्यस्त है कि अगला जज कौन होगा। उनका प्राथमिक काम न्याय देना है, इस कॉलेजियम सिस्टम की वजह से उसपर असर पड़ रहा है।''

'1993 से पहले हमारे पास बहुत प्रतिष्ठित जज थे...'
जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर एक सवाल के जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा, "1993 तक, भारत में हर न्यायाधीश को भारत के चीफ जस्टिस के परामर्श से कानून मंत्रालय द्वारा नियुक्त किया जाता था। उस समय हमारे पास बहुत प्रतिष्ठित जज थे। देश के संविधान इसके बारे में स्पष्ट है। जो ये कहता है कि भारत के राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति करेंगे, इसका मतलब है कि कानून मंत्रालय भारत के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के परामर्श से जजों की नियुक्ति करेगा।"

'ग्रुपिज्म और राजनीति होती है, जजों की नियुक्ति में...'
कॉलेजियम सिस्टम पर तीखा वार करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, ''जजों के चुनाव में सलाह लेने की प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि, मुझे ऐसा कहते हुए खेद है कि इसमें ग्रुपिज्म बढ़ता है। आप नेताओं के बीच की राजनीति देख सकते हैं लेकिन वे नहीं जानते कि न्यायपालिका के अंदर क्या राजनीति चल रही है।''
उन्होंने आगे कहा, ''एक जज आलोचना से ऊपर तभी उठ सकता है, जब वह दूसरे जजों की नियुक्ति में शामिल नहीं हो। लेकिन किसी भी तरह से अगर न्यायाधीश प्रशासनिक कार्य में शामिल है, तो वह आलोचना से ऊपर नहीं है।"

क्या है कॉलेजियम सिस्टम
कॉलेजियम सिस्टम से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की जाती है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के चीफ जस्टिस करते हैं। इसके अलावा इसमें अदालत के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश भी शामिल होते हैं। हालांकि सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों के संबंध में आपत्तियां उठा सकती है या स्पष्टीकरण मांग सकती है, लेकिन अगर पांच सदस्यीय जजों के पैनल द्वारा नामों को फिर से दोहराया जाता है तो नामों को मंजूरी देना प्रक्रिया से बाध्य है।

ज्यूडिशियल एक्टिविज़्म पर क्या बोले किरेन रिजिजू
ज्यूडिशियल एक्टिविज़्म पर किरेन रिजिजू ने कहा, ''कई जज अपनी टिप्पणियां देते हैं, लेकिन कोई भी ऑब्जर्वेशन, कभी भी किसी जजमेंट का हिस्सा नहीं बन सकते हैं। मैंने हमेशा जजों को इस बचने का अनुरोध किया है, वो भी खासकर जब अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग हो रही हो। एक जज के तौर पर आपको हमेशा न्यूट्रल होना होता है। हमारे पास तीन स्तंभ हैं - कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। कार्यपालिका और विधायिका न्यायपालिका द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं। लेकिन अगर न्यायपालिका भटक जाती है, तो इसे नियंत्रित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है।''












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