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अपराध से नहीं बेटे तेज प्रताप से डर रहे हैं लालू यादव

बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हों....जी हां लिरिक्स तैयार हो गई, हिट भी हो गई। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री भी बन गए। पर, जनता का मानना है कि बिहार की सियासत में नीतीश गर चमचमा रहे हैं तो लालू की भूमिका बेहद अहम है। वहीं अपराध यदि बिहार पर हावी हो रहे हैं तो जनता का यह कहना है कि नीतीश कुमार की भूमिका महज फर्जदायगी है।

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Lalu Prasad, Tej Pratap

अब हो सकता है कि बिहार से लोगों के लगातार पलायन को राज्य सरकार किसी उपलब्धि का तमगा थमा दे। या लालू सुपर 30 का हवाला देकर बिहार के उर्फ में आईआईटियंस चिपका दें। कुल मिलाकर बोलबाला आरजेडी सुप्रीमों लालू यादव का है। लेकिन इस बीच एक चौंकाने वाली खबर भी है। दरअसल लालू अपने बेटे तेजप्रताप से ही डरे हुए हैं। क्या आपको पता है कैसे। आईये जानते हैं।

इशरत का समर्थन करते हैं तेज प्रताप

बीते दिनों 2008 में मुंबई बम धमाके की योजना बनाने और अंजाम देने वाले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने इशरत जहां को लश्कर का आतंकी बताया था। इसी मुद्दे पर जब तेज प्रताप से सवाल पूछा गया कि क्या आप जेडीयू सरीखे इशरत जहां को बिहार की बेटी मानते हैं। जवाब देते हुए बिहार के स्वास्थ मंत्री तेज प्रताप ने कह दिया कि हां हम उनका समर्थन करते हैं। जिस पर सियासी बवाल मच गया। हालांकि नीतीश कुमार खुद को इशरत जहां को बिहार की बेटी वाले बयान से अलग कर चुके हैं। पर, तेज प्रताप के इस बयान के साथ ही आरजेडी समेत जेडीयू पर तीखे हमले होने शुरू हो गए।

तेज प्रताप ने मीडिया का भी उड़ाया मजाक

मौका था मुख्यमंत्री के जनता दरबार का। जिसमें शिरकत करने तेज प्रताप भी पहुंचे। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल किया कि कीड़ा मारने की दवा से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, क्या वजह है इसकी। जिस पर तेज प्रताप ने जवाब देते हुए कहा कि मीडिया वालों के पेट में कीड़ा है। आप लोगों को भी एल्बेंडाजोल की दवा देना ही पड़ेगा। आप बताईयेगा तो हम व्यवस्था करा देंगे। मतलब ये कि खुलेआम धमका रहे हैं तेज प्रताप। आखिर सरकार में आरजेडी की महत्वपूर्ण भूमिका जो है।

अपेक्षित था मंत्री जी उपेक्षित नहीं

बहरहाल अब तो आप काफी हद तक समझ ही गए होंगे कि आखिर लालू यादव को अपने बेटे तेज प्रताप से किस तरह का डर है। दरअसल काफी समय से सवाल ये उठ रहा था कि आखिर तेज प्रताप कुछ बोलते क्यों नहीं। जिसके लिए वाजिब वजहें भी थीं। 20 नवंबर 2015 को जब तेज प्रताप मंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उनके चेहरे पर घबराहट की लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती थी। आपको अगर याद हो कि तेज प्रताप शपथ के दौरान अपेक्षित की जगह उपेक्षित बोल गए थे। जिस पर सोशल मीडिया में उनकी जमकर किरकिरी हुई थी।

कहा जा रहा है कि आरजेडी सुप्रीमों खुद तेज प्रताप को कैसा, क्या और कब बोलना है इस बात की ट्रेनिंग दे रहे हैं। दरअसल सरकार समेत आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव को इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं उनके बेटे तेज प्रताप की जुबान फिसली तो पार्टी के लिए मुश्किलें न खड़ी हो जाएं। इसलिए पूरी तरह से प्रिपरेशन जरूरी है भई। बस इसी की क्लासेस ले रहे हैं तेज प्रताप अपने पिता लालू यादव के साथ साथ आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं से। पर इन क्लासेस के अलावा अपराध पर नकेल कसने की कोशिश कब की जाएगी ये सवाल बिहार के साथ अभी भी अधूरा दिखाई दे रहा है।

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