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Ladakh Lok Sabha Chunav: लद्दाख में इंडिया ब्लॉक में दो फाड़! किसे मिलेगा फायदा?

Ladakh Lok Sabha Election: लद्दाख में पिछले दो चुनावों से लगातार बीजेपी जीत रही है। इस बार लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग की वजह से भाजपा की राह आसान नहीं दिख रही है। लेकिन, उसे चुनावों में टक्कर देने से पहले इंडिया ब्लॉक में खुद ही दो फाड़ की नौबत आ गई है।

लद्दाख में इंडिया ब्लॉक की ओर से कांग्रेस, बीजेपी के खिलाफ मैदान में है और उसे नेशनल कांफ्रेंस का समर्थन है। लेकिन, इसकी पूरी कारगिल यूनिट ने ही अपनी पार्टी और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ बगावत कर दिया है।

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लद्दाख में इंडिया ब्लॉक में दो फाड़!
कमर अली अखून की अगुवाई में फारूक अब्दुल्ला की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यही नहीं नेशनल कांफ्रेंस की कारगिल यूनिट ने इस चुनाव में अपने सहयोगी हाजी हनीफा को समर्थन देने का ऐलान किया है, जो अब इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

लद्दाख में बने त्रिकोणीय मुकाबले के हालात
मतलब यह तय हो गया है कि लद्दाख में इस बार हाजी हनीफा और कांग्रेस के त्सेरिंग नामग्याल और भाजपा के ताशी ग्यालसन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। कारगिल के नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने यह भी दावा किया है कि वहां की कांग्रेस इकाई ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के विरोध का फैसला किया है।

कांग्रेस उम्मीदवार की बढ़ाई मुश्किल
नेशनल कांफ्रेंस के बागियों का पार्टी के नेतृत्व पर आरोप है कि वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ-साथ लेह में कांग्रेस के लोगों पर भी इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार को समर्थन देने का दबाव डाल रहा है, जो कि 'उन्हें नामंजूर' है।

नेशनल कांग्रेस के बड़े नेता ही ने दिया पार्टी को झटका
कमर अली अखून कारगिल में नेशनल कांफ्रेंस के अतिरिक्त सचिव और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के को-चेयरमैन हैं। यह कारगिल के धार्मिक, राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक संगठनों का एक समूह है। इन्होंने एनसी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को खत लिखकर पार्टी के खिलाफ नाराजगी जताई है और कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे की जानकारी दी।

अखून लद्दाख के एक दिग्गज नेता माने जाते हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी पर यहां के लोगों को अपने ही हितों के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया है। इंडिया ब्लॉक में पीडीपी गठबंधन से बाहर हो चुकी है। जबकि सीट बंटवारे के फॉर्मूले के तहत नेशनल कांफ्रेंस कांग्रेस को जम्मू, उधमपुर और लद्दाख में समर्थन दे रहा है। इसके बदले में कांग्रेस उसके साथ कश्मीर घाटी की तीनों सीटों पर सहयोग कर रही है।

2014 और 2019 में लद्दाख में जीती बीजेपी
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में लद्दाख सीट से बीजेपी जीत रही है। इस बार इस केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की मांग को इतना उठाया गया है कि चुनाव के समय भाजपा मुश्किलों में घिरती नजर आ रही थी। पार्टी ने इस संकट को कम करने के लिए अपने चर्चित मौजूदा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल का टिकट भी काट लिया है।

इंडिया ब्लॉक में बगावत से भाजपा को मिल सकता है फायदा
कारगिल और लेह में इस मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ जिस तरह से एक माहौल बना है, उससे पार्टी की राह तीसरी बार आसान तो कतई नहीं लग रही थी। लेकिन, जिस तरह से कारगिल में नेशनल कांफ्रेंस और कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने ही आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ बगावत कर दी है, उसका फायदा निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है।

लद्दाख में 5वें चरण में 20 मई को वोटिंग है। इस केंद्र शासित प्रदेश में इस बार 1,82,570 वोटर हैं। चुनाव परिणाम 4 जून को आएंगे।

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