LAC पर तैनाती के लिए ITBP में 9,400 जवानों की भर्ती होगी, 7 नई बटालियनें बनेंगी

भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी के लिए आईटीबीपी में 9,400 नए जवानों की नियुक्ति के लिए दी गई मंजूरी। सात नई बटालियनें भी बनेंगी। एक सेक्टर हेडक्वार्टर भी बनेगा।

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चीन से रक्षा के लिए तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की ताकत और बढ़ाई जा रही है। इस फोर्स की अहमियत इसी बात से लगाई जा सकती है कि करीब तीन साल से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तकरार की वजह से सेना की तैनाती के बावजूद आईटीबीपी के जवान दिन-रात लगातार भारत माता की सीमा की रक्षा में डटे हुए हैं। लेकिन, अब इस फोर्स में सात और बटालियनें गठित होने जा रही हैं और एक नया सेक्टर हेडक्वार्टर का भी गठन होना है।

आईटीबीपी में 9,400 जवानों की भर्ती होगी

आईटीबीपी में 9,400 जवानों की भर्ती होगी

केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में 9,400 नए जवानों की भर्ती को मंजूरी दी है। भारत-चीन के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सुरक्षा में तैनात रहने वाले इन जवानों की नई भर्ती इस फोर्स के लिए 7 नई बटालियनें स्थापित करने के लिए की जा रही हैं। इसके अलावा इस अद्धसैनिक बल के लिए एक नया ऑपरेशनल बेस भी स्थापित किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एलएसी की प्रभावी निगरानी के लिए नए बेसों को मंजूरी दी गई थी और अब उसके के लिए सात नई बटालियनें गठित की जा रही हैं। इसके साथ ही एक नए सेक्टर हेडक्वार्टर को भी मंजूरी दी गई है।

47 नए बॉर्डर पोस्ट भी बनेंगे

47 नए बॉर्डर पोस्ट भी बनेंगे

आईटीबीपी के लिए सात बटालियनें गठित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की बैठक के दौरान ही पास किया गया था, जिसकी अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददताओं को सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी दी थी। सरकार के मुताबिक नए जवानों की तैनाती 47 नए बॉर्डर पोस्ट और एक दर्जन 'स्टेजिंग कैंप' या ट्रूप बेस में किया जाना है, जो कि इस सीमा के लिए खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश में बनाए जाने हैं। इन बेसों की मंजूरी 2020 में ही दी गई थी।

1962 में चीन के हमले के बाद गठित हुई थी आईटीबीपी

1962 में चीन के हमले के बाद गठित हुई थी आईटीबीपी

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) करीब 90,000 जवानों वाला शक्तिशाली अर्द्धसैनिक बल है, जिसका गठन 1962 में चीन के हमले के बाद किया गया था। आईटीबीपी पर लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की रक्षा करना है। 2020 के मई-जून में चीन की ओर से पूर्वी लद्दाख में तनाव की स्थिति पैदा किए जाने के बाद से दोनों ओर से सेनाओं की मौजूदगी के बावजूद आईटीबीपी भारतीय सेना के साथ मिलकर अपनी ड्यूटी में डटी हुई है।

2025-26 से दिखेगा ऐक्शन !

2025-26 से दिखेगा ऐक्शन !

अनुराग ठाकुर के मुताबिक नई बटालियनें और सेक्टर हेडक्वार्टर में 2025-26 तक काम शुरू हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा था कि जमीन अधिग्रहण, ऑफिस और रिहायशी इमारतों के निर्माण और हथियार और गोला बारूद पर 1,808.15 के अनावर्ती (एक बार) लागत आने का अनुमान है। जबकि, फ्रेश मैनपॉवर के वेतन और राशन के मद में सालाना 963.68 करोड़ रुपए खर्च होने का अंदाजा है।

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    नए जवानों से आईटीबीपी की ताकत 10% बढ़ेगी

    नए जवानों से आईटीबीपी की ताकत 10% बढ़ेगी

    अधिकारियों का कहना है कि 47 नए बॉर्डर पोस्ट के बनने से इन बेसों की ताकत में 26 फीसदी का इजाफा होगा, जबकि 9,400 नए जवानों की भर्ती से फोर्स की ताकत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। मौजूदा समय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के पास 176 सीमा चौकियां हैं, जहां वह मौसम की सभी विपरीत परिस्थितियों में 24X7 देश में सेवा में डटे हुए हैं। (इनपुट-पीटीआई)

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