भारत-चीन में फिर बातचीत पर बनी सहमति, 12 जनवरी को होगी कोर कमांडर लेवल की 14वीं बैठक

नई दिल्ली, 11 जनवरी: भारत और चीन के बीच पूर्व लद्दाख पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव जारी है। पिछले 20 महीने के ज्यादा के वक्त से दोनों देशों के बीच तनातनी का माहौल है। ऐसे में हाल ही में दावा किया जा रहा था कि चीन ने 60 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती एलएसी पर की है, जिसके बाद भारत ने अपनी हाई लेवल की तैयारियां शुरू कर दी है। ऐसे में अब एलएसी पर जारी गतिरोध का हल करने के लिए भारत-चीन के बीच 14वें दौर की कमांडर स्तर की वार्ता 12 जनवरी को हो सकती है।

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हॉट स्प्रिंग्स एरिया के मुद्दे पर होगी वार्ता

ऐसा पहली बार होगा जब भारतीय सेना के नए 14 'फायर एंड फ्यूरी' कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता चीनी पक्ष के साथ बातचीत में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने मंगलवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया है। सरकारी सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि है कि मुख्य रूप से लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हॉट स्प्रिंग्स एरिया को हल करने के लिए भारत-चीन वार्ता का 14वां दौर 12 जनवरी को होने की संभावना है।

अब तक हो चुकी 13 राउंड की बातचीत

भारत और चीन गतिरोध को हल करने के लिए पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बातचीत जारी है और अब तक 13 राउंड हो चुके हैं। दोनों पक्ष पिछले साल चीनी आक्रमण के बाद उभरे हॉट स्प्रिंग्स तनाव प्वाइंट के समाधान पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पैंगोंग झील और गोगरा की ऊंचाई पर स्थित तनाव बिंदुओं को सुलझा लिया गया है, लेकिन हॉट स्प्रिंग्स का हल किया जाना अभी बाकी है।

चीन के खिलाफ भारत भी आक्रामक

भारत डीबीओ क्षेत्र और सीएनएन जंक्शन क्षेत्र के समाधान की भी मांग कर रहा है, जो पिछले साल अप्रैल-मई की समय सीमा से पहले रहे हैं और विरासत के मुद्दे माने जाते हैं। भारत ने चीनी आक्रमण का बहुत आक्रामक तरीके से जवाब दिया और कई स्थानों पर उनके कार्यों की जांच की। बता दें कि साल 2020 में गलवान में जून में खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान झेलना पड़ा था।

हर मोर्च पर तैयार भारतीय सेना

भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में हर कदम उठा रहा है। इसी के साथ दुश्मन सैनिकों की तरफ से किसी भी तरह से दुस्साहस को विफल करने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है। बता दें कि भारत ने अपने सैनिकों के लिए सड़कों और आवासों के मामले में भी तेजी से विकास किया है और सूत्रों का अनुमान है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की आवश्यकता होती है तो भारत अत्यधिक ठंड में क्षेत्र में 2 लाख से अधिक सैनिकों को आसानी से प्रबंधित कर सकता है।

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