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Kuno: नामीबिया में बनी थी जोड़ी, कूनो में भी पल रही चीता 'ओबान-आशा' की प्रेम कहानी

कूनो के जंगलों में चीतों की प्रेम कहानी पल रही है। दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया से आए चीतों की पहली जोड़ी 'ओबान और आशा' भारत आने से पहले से साथ रहे हैं। कूनो में इनको एक-दूसरे का बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड कहलाते हैं।

नामीबिया से अपनी गर्लफ्रेंड आशा संग ही आया था चीता ओवान


नामीबिया की धरती से करीब 7 महीने पहले चीतों के साथ एक प्रेम कहानी भी भारत की धरती पर आई है। पीएम मोदी ने 17 सितंबर को कूनो के बाडे़ में नर चीता 'ओबान' और मादा चीता 'आशा' को छोड़ा था। चीतों का यह जोड़ा नामीबिया में भी साथ ही रहता है। इनको कूनो में बाड़े से भी एक साथ ही फ्री रेंज में छोड़ा गया था। तब से चीतों का यह जोड़ा बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड कहलाता है और हमेशा साथ-साथ ही नजर आता है। ।

नामीबिया से अपनी गर्लफ्रेंड आशा संग ही आया था चीता ओवान

17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों को बाड़े में छोड़ा था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 72 वें जन्मदिन पर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बाड़े में छोड़ा था। भारत की धरती पर 70 साल बाद कदम रखने वाले चीतों में 'ओबान और आशा' ही शामिल थे। बता दें कि नामीबिया के पार्क प्रबंधन को इनकी जोड़ी की जानकारी थी, इसी कारण इन दोनों को प्लेन में भी साथ-साथ लाया गया था और चीतों के प्रेमी जोड़े को भारत में भी एक साथ बाड़े में तथा एक साथ ही फ्री रेंज में छोड़ा गया था। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि कूनो के जंगलों में 8 चीतों में से महज छह दिन पहले चीता ओबान और ठीक दो दिन बाद आशा जंगल का कोर जोन व बफर जोन छोड़कर बाहर निकल गए थे।

Kuno cheetah Asha

22 मार्च को जुड़वा एल्टन व फ्रेडी को फ्री रेंज में छोड़ा गया था
ओबेन और आशा चीता को बीते 11 मार्च को बड़े बाडे़ से खुले जंगल (फ्री रेंज) में आजाद कर दिया गया था। जबकि नर चीतों की जोड़ी जिन्हें जुड़वा भी बताया जाता है, उनको 22 मार्च को फ्री रेंज में छोड़ा गया था। जबकि अन्य चीतों को इसके बाद बड़े बाड़े में छोड़ा गया था। चीते एल्टन व फ्रेडी दोनों नेशनल पार्क के बाड़े और फिर जंगल में साथ-साथ ही धूमते और मस्ती करते नजर आते हैं।

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    आशा की एक साथी साशा की बीमारी से मौत हो चुकी
    कूनो नेशनल पार्क में पहले राउंड में लाए गए चीतों में आशा के साथ आई मादा चीता साशा की पिछले दिनों किडनी में इंफेक्शन के कारण मौत हो चुकी है। पूरा देश साशा की मौत से स्तब्ध नजर आया तो ठीक दूसरे दिन कूनो में सियाया चीता ने चार शावकों को जन्म दिया था। 70 साल बाद पहली दफा भारत की धरती पर इन चीतो ने जन्म लिया है।

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