• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

कुमारस्वामी : भाजपा के दोस्त से कांग्रेस की दोस्ती तक

By Bbc Hindi
कर्नाटक विधानसभा चुनाव
Reuters
कर्नाटक विधानसभा चुनाव

कर्नाटक की राजनीति अब तक के सबसे दिलचस्प दौर में है.

कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने के बाद तीन दिन का वक़्त गुज़र चुका है, बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले चुके हैं, लेकिन सवाल फंसा है कि वो बहुमत का आंकड़ा कैसे जुटा पाएंगे?

कांग्रेस का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीएस येदियुरप्पा एक दिन के मुख्यमंत्री बन कर रह जाएंगे. जेडीएस के साथ उनके गठबंधन की अगली सरकार बननी तय है.

वहीं येदियुरप्पा का भी दावा है कि वो विश्वास मत जोश के साथ जीतेंगे.

दोनों पार्टियों के दावे अपनी-अपनी जगह हैं, लेकिन इन सबके बीच एक नाम जो कोर्ट के इस फैसले के बाद राहत में भी है और सबसे ज्यादा तनाव में, वो हैं, जनता दल सेक्युलर के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव
Getty Images
कर्नाटक विधानसभा चुनाव

राहत में इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिन में बहुमत साबित करने की मियाद कम कर दी और तनाव में इसलिए क्योंकि अब वो सोच में हैं कि शनिवार को क्या होगा?

मुख्यमंत्री पद और कुमारस्वामी के बीच एक 'अगर' का फासला है. 'अगर' येदियुरप्पा सरकार विश्वासमत हासिल नहीं कर पाई तो शनिवार का दिन कुमारस्वामी की किस्मत में मुख्यमंत्री बनने की नई आस लेकर भी आ सकता है.

और अगर ऐसा होगा तो कांग्रेस की भूमिका सबसे अहम होगी.

उससे पहले ये समझना भी जरूरी है कि कैसे हुआ जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन का फैसला.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव
Getty Images
कर्नाटक विधानसभा चुनाव

2018 में विधानसभा चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद, कुमारस्वामी ने कहा, "साल 2006 में बीजेपी के साथ जाने के मेरे के फैसले के बाद में मेरे पिता के करियर में एक काला धब्बा लगा था. भगवान ने मुझे इस ग़लती को सुधारने का मौक़ा दिया है और मैं कांग्रेस के साथ रहूंगा."

लेकिन क्या कुमारस्वामी और कांग्रेस के रिश्ते हमेशा से इतने ही अच्छे रहे हैं और बीजेपी के साथ हमेशा से खराब?

इस सवाल के लिए इतिहास में जाने की जरूरत पड़ेगी.

बीजेपी से दोस्ती

2004 के विधानसभा चुनाव के बाद जेडीएस और कांग्रेस ने मिल कर कर्नाटक में सरकार बनाई. लेकिन 2006 आते आते कुमारस्वामी ने खेल कर दिया.

साल 2006 में पिता एचडी देवेगौड़ा की बात न मानते हुए कुमारस्वामी ने पार्टी तोड़ कर मुख्यमंत्री बनने के लिए बीजेपी का हाथ थाम लिया था.

बीजेपी और जेडीएस में डील हुई कि आधे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद कुमारस्वामी के पास रहेगा और बाद में आधे कार्यकाल के लिए बीजेपी के पास. लेकिन 2007 के अक्टूबर में कुमारस्वामी अपने वादे से मुकर गए और बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने नहीं दिया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

इसके बाद के विधानसभा चुनाव के बीजेपी अपने दम पर सत्ता में आई और सरकार बनाया.

कांग्रेस से बैर

लेकिन अगर एचडी देवेगौड़ा की बात करें तो 1999 में जनता पार्टी से अलग हो कर ही जनता दल सेक्युलर की नींव रखी थी. 1977 में जनता पार्टी का गठन ही कांग्रेस के खिलाफ हुआ था. लेकिन बाद में दुश्मनी दोस्ती में बदल गई और 1996 में 10 महीने के लिए जब देवेगौड़ा भारत के प्रधानमंत्री बने तो उस सरकार को कांग्रेस का समर्थन भी प्राप्त था.

सिद्धारमैया का दर्द

दूसरी तरफ सिद्धारमैया का दर्द अलग है. उन्होंने कई सालों तक देवगौड़ा के साथ निष्ठापूर्ण तरीके से काम किया लेकिन जब पार्टी की कमान सौंपने की बात आई तो देवेगौड़ा ने पार्टी के पुराने वफादार सिद्धारमैया की जगह अपने बेटे कुमारस्वामी को चुना.

पार्टी के भीतर खुद के अस्वीकृत होने के बाद सिद्धारमैया ने अहिंदा (अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलित) बनाया और कांग्रेस की मदद से राज्य के मुख्यमंत्री भी बने.

लेकिन देवगौड़ा के साथ उनकी दुश्मनी कुछ इसी तरह शुरू हुई थी. इस दुश्मनी की वजह से सिद्धारमैया ने वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले अधिकारियों के साथ भी भेदभाव किया.

दरअसल देवगौड़ा वोक्कालिगा समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं और कर्नाटक की राजनीति में इस समुदाय के लोग काफी अहमियत रखते हैं.

लेकिन कुमारस्वामी को राजनीति पिता से विरासत में मिली थी. उन्होंने भी चतुराई दिखाते हुए सिद्धारमैया द्वारा देवगौड़ा पर किए जा रहे राजनीतिक हमले को पूरे वोक्कालिगा समुदाय पर हो रहे हमले के रूप में दिखाना शुरू कर दिया.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव
BBC
कर्नाटक विधानसभा चुनाव

कुमारस्वामी का राजनीतिक सफर

कुमारस्वामी ने 1996 में राजनीति में कदम रखा. सबसे पहली बार 11वीं लोकसभा में कनकपुरा से चुन कर लोकसभा में आए थे.

अब तक वो नौ बार चुनाव लड़ चुके है जिसमें से छह बार जीत हासिल की है. इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रमनगरम विधानसभा सीट से जीत हासिल की है.

राजनीति में आने से पहले कुमारस्वामी का फिल्म निर्माता और फिल्म ड्रिस्ट्रिब्यूटर थे.

किस करवट बैठेगा सऊदी और इसराइल का रोमांस?

कर्नाटक: येदियुरप्पा को कल चार बजे बहुमत साबित करना होगा

lok-sabha-home
BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Kumaraswamy: BJP's friend to friend's friendship

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X