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Kozhikode:पायलट ने आखिरी वक्त में लिया था ये फैसला! इसलिए बची ज्यादातर मुसाफिरों की जान

नई दिल्ली- शुक्रवार रात केरल के कोझीकोड में दुबई से आ रहे एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान के हादसे की असल वजह क्या थी, इसकी पड़ताल शुरू हो चुकी है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो को ब्लैक बॉक्स या डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्ड और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्ड से हादसे की तह तक जाने में मदद मिलेगी। लेकिन, घटनास्थल की स्थिति और विमान के मलबे को देखने के बाद सबसे बड़ी हैरानी की बात ये लग रही है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद विमान में आग क्यों नहीं लगी? क्योंकि, विमान हादसे में अक्सर आग लगने की घटनाए होती हैं, इसलिए इसमें हताहतों की संख्या बहुत ही ज्यादा होती है। कोझीकोड में जिस तरह की दुर्घटना हुई है, वह बहुत ही बड़ी है। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट संभावना जता रहे हैं कि अगर पायलटों ने आखिरी वक्त में सूझ-बूझ नहीं दिखाई होती तो इस विमान में भी आग लग सकती थी और हादसा और भी भयावह हो सकता था।

विमान की लैंडिंग में आई दिक्कत

विमान की लैंडिंग में आई दिक्कत

दुबई से 191 पैसेंजरो और क्रूब मेंबर को लेकर कोझीकोड आ रहे बोइंग 737 के जिस विमान एयर इंडिया एक्सप्रेसवे की फ्लाइट संख्या IX 1344 को फ्लाइट कमांडर कैप्‍टन दीपक वसंत साठे और को-पायलट अखिलेश कुमार उड़ा रहे थे, वह लैंडिंग के बाद रनवे से निकलकर 35 फीट नीचे जा गिरा और तीन टुकड़ों में बंट गया था। बाउंडरी वॉल से टकराने की वजह से कॉकपिट वाला हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हुआ और इसलिए दोनों पायलटों की जान चली गई। दोनों पायलटों समेत जिन 18 लोगों की मौत हुई हैं, उनमें से ज्यादातर विमान के अगले हिस्से में ही सवार थे। अभी तक यही माना जा रहा है कि बारिश की वजह से विमान में ब्रेक के पूरी तरह इस्तेमाल में दिक्कत हुई। ऐसे में सिर्फ 8,859 फीट के रनवे पर 3,000 फीट आगे टचडाउन करना बहुत ही खतरनाक साबित हुआ।

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    हवा की दिशा में हुई लैंडिंग!

    हवा की दिशा में हुई लैंडिंग!

    टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक रात और बारिश की वजह से हो सकता है पायलटों ने ब्लैकहोल इलुजन महससू किया होगा, जिसमें अक्सर पायलट को जितनी ऊंचाई पर होता है, उससे ज्यादा पर होने का एहसास होता है और इसके चलते गलतियां होने की आशंका रहती है। ऊपर से यह एक टेबल-टॉप एयरपोर्ट था। यही नहीं जिस कोशिश में लैंडिंग हुई, वह पायलट की तीसरी कोशिश थी, जिसके चलते लैंडिंग की दिशा बदलनी पड़ी होगी। वह विमान पूरब से पश्चिम दिशा में रनवे 28 पर न उतरकर पश्चिम से पूरब की दिशा में रनवे 10 पर उतरा। यह लैंडिंग उसी दिशा में थी, जिस ओर हवा का का बहाव था और संभवत: इस वजह से भी नियंत्रण रखने में मुश्किल आई।

    ब्रेक लगाने में क्यों हुई होगी मुश्किल?

    ब्रेक लगाने में क्यों हुई होगी मुश्किल?

    कोझीकोड विमान हादसे की असल वजह क्या हो सकती है, इसके बारे में कुछ पायलटों ने जो बता बताई है, उससे जाहिर होता है कि एयर इंडिया एक्सप्रेसवे की फ्लाइट संख्या IX 1344 बोइंग 737 के कमांडर और को-पायलट ज्यादातर मुसाफिरों को सुरक्षित बचा लेने के लिए अपनी जान पर खेल गए। यह तो जाहिर है कि हादसा लैंडिंग की तीसरी कोशिश में हुआ। बारिश के बीच टेबल-टॉप रनवे पर विमान लैंड कराना वैसे ही जोखिफ भरा होता है। उसपर से रनवे पर रबर डिपॉजिट की भी बात आ रही है। जब पायलट को टच डाउन के बाद एहसास हुआ होगा कि रनवे का करीब 1 किलोमीटर हिस्सा तो पीछे ही छूट चुका है, तभी वो समझ गए होंगे कि बोइंग 737 को बाकी के 2.7 किलोमीटर के रनवे पर बारिश के बीच रोक पाना लगभग असंभव है। क्योंकि, विमान के मलबे की तस्वीरों से जाहिर होता है कि उसकी पंखों पर लगे स्पीड ब्रेक ज्यों के त्यों हैं, यानि यह साफ नहीं है कि उसका इस्तेमाल हुआ भी या नहीं। पायलटों ने विमान में सवार मुसाफिरों की जान बचाने को पहली प्राथमिकता दी और संभवत: इसलिए विमान रोकने के लिए दूसरा कदम उठाने का फैसला किया। क्योंकि, ज्यादातर पायलटों का कहना है कि गीले रनवे पर ब्रेक लगाने में मुश्किल हुई होगी।

    इंजन बंद करके बचा ली ज्यादातर मुसाफिरों की जान!

    इंजन बंद करके बचा ली ज्यादातर मुसाफिरों की जान!

    हादसाग्रस्त विमान ने तीसरी कोशिश में रनवे पर तब टचडाउन किया, जब वह उसके 40 फीसदी हिस्से से आगे निकल चुका था। यानि इसके बाद रनवे का जितना हिस्सा बचा था, वह विमान को रोकने के लिए नाकाफी था। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि जब पायलट को इसका एहसास हो गया कि अब विमान को रनवे पर रोक पाना नामुमकिन हो चुका है, तब उन्होंने इंजन को बंद कर दिया होगा ताकि उसकी रफ्तार धीमी हो जाए और वह किसी तरह रुक जाए। ऐसे में इंजन में इंधन की सप्लाई बंद हो गई होगी, जिसके चलने विमान में आग नहीं लगी और ज्यादातर मुसाफिर सिर्फ चोट खाकर ही जिंदा बच गए। क्योंकि, विमान हादसे की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि हादसे के साथ ही उसमें आग भी लग जाती है और उसके बाद किसी का भी बचना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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