Kolkata Doctor News: क्या हैं सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट, प्रदर्शनकारी डॉक्टर क्यों कर रहे हैं इसकी मांग?

Kolkata Doctor News: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 31 साल की लेडी डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत का मामला इन दिनों गरमाया हुआ है। वहीं, इस पूरे केस की जांच कोलकाता हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी दी है। हालांकि, डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस नहीं ली है, उनका विरोध प्रदर्शन अभी जारी है।

विरोध-प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि जब तक मेडिकल स्टाफ पर हमलों को रोकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं हो जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। इस संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने स्वास्थ्य मंत्रालय को एक लिखा है।

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पत्र में कहा गया है कि सभी 25 राज्यों में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून तो हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन अप्रभावी है। बता दें कि इस कानून में बिना वारंट गिरफ्तारी, 5 लाख तक जुर्माना और 5 साल तक सजा का प्रावधान है। जानिए क्या हैं सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट...

डॉक्टरों के लिए क्या है सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट?
'हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा की रोकथाम विधेयक, 2022', जिसे "डॉक्टरों के लिए केंद्रीय संरक्षण अधिनियम" के रूप में भी जाना जाता है, दो साल पहले लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के कृत्यों को प्रतिबंधित और अपराधियों के लिए दंड निर्धारित किया गया है।

प्रमुख प्रावधान क्या हैं केंद्रीय संरक्षण अधिनियम के?
इस कानून का उद्देश्य डॉक्टरों, नर्सों, अन्य स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पतालों को हिंसा से सुरक्षा प्रदान करना है। विधेयक में हिंसा को शारीरिक हमले, मौखिक दुर्व्यवहार, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और चिकित्सा कर्मियों के कार्य में अवरोध के रूप में पारिभाषित किया गया है।

इस अधिनियम के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है और प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है। जो कोई भी धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए हिंसा का कोई कार्य करेगा या करने का प्रयास करेगा या उकसाएगा।

उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जो छह महीने से कम नहीं होगा, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। जुर्माना जो पांच हजार रुपये से कम नहीं होगा और पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। नजदीकी पुलिस स्टेशन के साथ इंटरलॉकिंग समेत अस्पताल की सुरक्षा मजबूत की जाए। परामर्श फीस, टेस्ट रेट और अस्पतालों के अन्य खर्चों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

क्या है कानून की वर्तमान स्थिति?
2022 में संसद में पेश किए जाने के बावजूद अभी तक सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। क्योंकि, अधिकांश उद्देश्य महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश 2020 के तहत कवर किए गए थे। हालाँकि, हाल की घटनाओं ने इसके कार्यान्वयन की मांग को फिर से सुलगा दिया है।

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