Kolkata Case: ममता बनर्जी का सबसे मजबूत किला ध्वस्त! कैसे TMC के हाथ से निकल रहीं महिला वोटर?

Kolkata Doctor Case Latest Update: पहले कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और फिर उसके बाद कथित रूप से जिस तरीके से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, उसने टीएमसी सरकार और खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को अबतक का सबसे बड़ा राजनीतिक चूना लगाया है। इस घटना से पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी की कोर महिला वोटरों को बहुत गहरा धक्का लगा है।

2019 के लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी ने बहुत ही कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन, उसके बाद 2021 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने बीजेपी को बुरी तरह से पछाड़ दिया। ममता की अगुवाई वाली तृणमूल की दोनों सफलताओं के पीछे इसका सॉलिड महिला वोट बैंक रहा है, लेकिन सरकारी अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ बर्बर बलात्कार और उसकी बेरहमी से हुई हत्या ने इसी वोट बैंक का मोह भंग कर दिया है।

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बंगाल में बड़ी तादाद में महिलाएं कर रही हैं प्रदर्शन
आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई जघन्य वारदात के करीब तीन हफ्ते हो चुके हैं। लेकिन, इसको लेकर देश भर में प्रदर्शन थमा नहीं है। बंगाल में रोजाना लोग सड़कों पर उतर रहे हैं, जिसमें महिलाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की 32 वर्षीय पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर छात्र, डॉक्टर, राजनीतिक दल, आम जनता से लेकर, खिलाड़ियों और कलाकार तक सड़कों पर उतर रहे हैं।

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ममता बनर्जी के माथे पर लकीर पड़ने की बात ये है कि इस वारदात के खिलाफ वो महिलाएं मुखर हैं, जो किसी भी संगठन से नहीं जुड़ी हैं और सिर्फ पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय दिलाना चाहती हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक राज्य सरकार के रवैए पर हैरान
9 अगस्त को पीजी ट्रेनी के शव मिलने के बाद से जिस तरह से राज्य सरकार पर पूरी वारदात पर लीपापोती के आरोप लगे हैं, उससे कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सन्न है। हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई न सिर्फ घटना की जांच कर रही है, बल्कि 14-15 अगस्त की रात आरजी कर अस्पताल पर हुए हमले (कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए) से लेकर उससे जुड़े भ्रष्टाचार तक की तहकीकात कर रही है।

घटना को कथित रूप से दबाने की कोशिशों का आलम ये है कि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पारदीवाला तक ने कहा है कि उन्होंने अपने करियर में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही नहीं देखी है।

कोलकाता कांड की वजह से बैकफुट पर हैं ममता
इतना सब होते हुए भी ममता बनर्जी ने कभी बीजेपी पर दोषारोपण की कोशिश की है, तो कभी उनपर प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों को धमकाने के आरोप लगे हैं। लेकिन, जिस तरह से डॉक्टरों को धमकाने के मामले में उन्होंने जल्दबाजी में स्पष्टीकरण देने की कोशिश की है, यह उनकी राजनीति से मेल नहीं खाती और इसलिए राजनीति के जानकारों को लग रहा है कि इस घटना ने अंदर ही अंदर तृणमूल को हिलाकर रख दिया है।

ममता और टीएमसी महिलाओं का होने लगा मोह भंग!
लोकसभा चुनावों में टीएमसी को 42 में से जिस तरह से सभी अनुमानों के विपरीत 29 सीटें मिली हैं, उसके पीछे महिलाओं के लिए उसकी लोकप्रिय योजना 'लक्ष्मीर भंडार' को बहुत बड़ी वजह बताया जा रहा है। लेकिन, आरजी कर वारदात के बाद जिस तरह से बंगाल में आम महिलाएं भी सड़कों पर उतर आई हैं, वह ममता की परेशानी का सबब बनता जा रहा है।

एक राजनीतिक विश्लेषक के हवाले से ईटी ने बताया है कि '2.18 करोड़ महिलाओं को सिर्फ लक्ष्मीर भंडार का लाभ मिला है। तृणमूल की जीत के पीछे लक्ष्मीर भंडार सबसे बड़ी वजहों में से एक है।'

टीएमसी सरकार के खिलाफ बंगाल में बढ़ती नाराजगी का आलम ये है कि कई दुर्गा पूजा समितियों ने ममता सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया है। इनमें टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका ये है कि ऐसी समितियों में बहुत सारी ऐसी हैं, जिन्हें सिर्फ महिलाएं ही संचालित करती हैं।

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