कोलकाता कांड: क्या RG Kar मामले में TMC की ओर बढ़ रहा है CBI का शिकंजा?
Kolkata Case Update: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को लेकर सीबीआई की जांच का मोर्चा दूसरी तरफ भी खुल चुका है, जो कि पूरी तरह से भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है। इस मामले में अलीपुर की अदालत ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसपल संदीप घोष और तीन अन्य आरोपियों को 8 दिनों की सीबीआई रिमांड में भेजा है। अदालत से इनकी रिमांड मांगते वक्त सीबीआई ने जो कुछ कहा है, उससे आशंका है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हो सकते हैं।
सोमवार को सीबीआई ने डॉक्टर संदीप घोष के अलावा उनके सिक्योरिटी गार्ड और दो वेंडरों को धर-दबोचा था, जो अस्पताल को सामग्रियां सप्लाई कर थे। इसी आरजी कर अस्पताल में पिछले 9 अगस्त को 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस वारदात की भी जांच सीबीआई ही कर रही है।

डॉ संदीप घोष के काले कारनामे के पीछे कौन?
मंगलवार को सीबीआई ने अलीपुर कोर्ट से कहा, 'हमने सिर्फ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बहुत बड़ा गठजोड़ है, जिसे उजागर करना है और इसलिए हम इनसे पूछताछ की मांग कर रहे हैं। हमें इनके पूरे गठजोड़ का खुलासा करने के लिए इनकी हिरासत की जरूरत है।'
सीबीआई की एफआईआर में डॉ संदीप घोष के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के साथ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम,1988 लगाई गई है। घोष पर उनके एक पूर्व सहयोगी और स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ही भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं।
सीबीआई इससे पहले ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या समेत आरजी कर से जुड़े सारे घटनाक्रम पर उनसे 17 दिनों तक पूछताछ कर चुकी है और दो-दो बार उनका पॉलीग्राफ टेस्ट भी हो चुका है।
संदीप घोष को लेकर टीएमसी सरकार का रवैया शुरू से ही संदिग्ध
संदीप घोष को लेकर टीएमसी सरकार शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। खासकर जिस तरह से ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या को लेकर मचे बवाल के बीच ही उन्हें आनन-फानन में इस्तीफे के चार घंटे के भीतर कोलकाता के ही नेशनल मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया था।
स्वास्थ्य भवन पर अपने ही सवालों में घिरती दिख रही है तृणमूल
संदीप घोष को लेकर अबतक तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी और सरकार को जो भी स्टैंड रहा है, उससे बार-बार सवाल खड़े होते रहे हैं। पहले सीएम के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया था कि सीबीआई ने घोष को अबतक गिरफ्तार क्यों नहीं किया। लेकिन, जब उनकी गिरफ्तारी हो गई तो तृणमूल के पूर्व सांसद कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी को इसपर 'कुछ नहीं कहना है।'
उन्होंने कहा, 'ये आरोप (उनके खिलाफ) बहुत पहले सुने गए थे। अगर स्वास्थ्य भवन ने उन पर कार्रवाई की होती तो इस शर्मिंदगी से बचा जा सकता था।' सवाल उठ रहा है कि जब स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग का जिम्मा भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास ही है तो संदीप घोष के खिलाफ पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बीजेपी ने की ममता बनर्जी के पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग
सोमवार को इन गिरफ्तारियों के फौरन बाद ही बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक के पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की थी। उन्होंने एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'इस तस्वीर में बिप्लव सिंघ और सुमन हाजरा है, जिसे सीबीआई ने गिरफ्तार है, जिसे टीएमसी एमएलए और हावड़ा के जिलाध्यक्ष कल्याण घोष के साथ देखा जा सकता है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'अफसर अली वही आदमी है, जिसने एक वायरल वीडियो में दावा किया कि उसे सीएम दीदी ममता बनर्जी ने भेजा था, जब कैंपस में उसकी मौजूदगी को लेकर तत्कालीन आरजी कर एमसीएच प्रिंसिपल ने पूछा था। डॉ. संदीप घोष समेत गिरफ्तार किए गए सभी लोगों की टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व से निकटता महज संयोग नहीं है।'
उन्होंने यहां तक लिखा कि 'यह जांच तब तक किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंचेगी, जब तक ममता बनर्जी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल पद से हट नहीं जाते और उनका पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं हो जाता।'












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