कोरोना से ठीक होकर एक शख्स ने बनाया 85 बेड वाला कोविड अस्पताल, वजह खास है

नई दिल्ली- गुजरात के सूरत में एक शख्स लंबे वक्त तक अस्पताल में कोरोना से जंग लड़ता रहा। आखिरकार वह कोरोना से युद्ध जीतकर घर लौट आया। लेकिन, अस्पताल में रहने के दौरान ही उसने तय कर लिया था कि कोरोना मरीजों के लिए उसे अपने दम पर एक अस्पताल बनाना है, जहां कोई भी अपना इलाज करा सके। डिस्चार्ज होने के बाद उसने ऐसा ही किया और अपने दफ्तर को ही अस्पताल में बदल दिया है। अब स्थानीय प्रशासन से भी उसके अस्पताल को मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें 85 बिस्तरों के साथ-साथ 15 आईसीयू बेड की भी व्यवस्था की जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों और डॉक्टरों ने भी अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को देखकर उसे कोविड फैसिलिटी के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। (पहली तस्वीर सौजन्य-इंडियन एक्सप्रेस)

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    कोरोना से ठीक होकर बनाया 85 बेड का कोविड अस्पताल

    कोरोना से ठीक होकर बनाया 85 बेड का कोविड अस्पताल

    सूरत में 85 बेड वाला ये कोविड अस्पताल कादर शेख नाम के कारोबारी ने बनाया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 63 वर्षीय कादर एक महीने पहले कोविड-19 पॉजिटिव हो गए थे। जैसे ही वो इलाज कराकर प्राइवेट अस्पताल से डिस्चार्ज हुए उन्होंने इस अस्पताल के निर्माण पर काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल में ही तय कर लिया था कि वहां से निकलकर वो अपने 30,000 वर्ग फीट के दफ्तर को कोरोना अस्पताल में बदल देंगे। जब अस्पताल बनकर तैयार हो गया तो उन्होंने सूरत नगर निगम के साथ मेडिकल स्टाफ और 15 बेड वाली आईसीयू की सुविधा वाले उपकरणों की सप्लाई के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। उनका यह अस्पताल सूरत के अदाजान इलाके में बना है। उनके नए कोविड अस्पताल के निरीक्षण के लिए सूरत के निगम आयुक्त बीएम पानी और निगम के उप स्वास्थ्य आयुक्त डॉक्टर आशीष नाइक पहुंचे थे और उन्होंने सबकुछ देखने-सुनने के बाद उनके प्रस्ताव को मंजूर कर लिया।

    अस्पताल में डॉक्टरों-नर्सों के लिए अलग से इंतजाम

    अस्पताल में डॉक्टरों-नर्सों के लिए अलग से इंतजाम

    कादर शेख ने अपने अस्पताल का नाम अपनी पोती के नाम पर हिबा अस्पताल रखा है। मंगलवार को अस्पताल के मुआयने के बाद डॉक्टर आशीष नाइक ने कहा, 'हमने परिसर देखा और इसे माकूल पाया। अगले कुछ दिनों में अस्पताल काम करने लगेगा, यहां न्यू सिविल हॉस्पिटल और एसएमआईएमईआर अस्पताल से मरीजों को रेफर किया जाएगा।' खुद शेख ने हिबा अस्पताल के बारे में बताया है कि उन्होंने डॉक्टरों और नर्सों के लिए भी अलग से स्पेस तैयार किया है। उन्होंने कहा, 'एक किचन और डायनिंग एरिया भी तैयार किया गया है....हम रसोइये उपलब्ध कराने की भी सोच रहे हैं और मरीजों के खाने का भी प्रबंध कर रहे हैं।'

    गरीब मरीजों के लिए अस्पताल बनाया

    गरीब मरीजों के लिए अस्पताल बनाया

    दरअसल, रीयल एस्टेट कारोबारी कादर शेख को अपने इलाज के दौरान लंबे वक्त तक प्राइवेट अस्पताल में रहना पड़ा। इसलिए उनके इलाज का बिल भी लाखों में आया। इसी चलते उन्होंने सोचा कि जो मरीज इतना पैसा खर्च नहीं कर सकते, उनका इलाज कैसे होगा। बस वो अस्पताल से ही गरीबों के लिए अस्पताल बनाने का फैसला करके निकले। उन्होंने सूरत के श्रेयम कॉम्पलेक्स स्थित अपने दफ्तर की 30,000 वर्ग फीट के दफ्तर को 85 बिस्तरों वाली कोविड फैसिलिटी में बदलना शुरू कर दिया। इसमें ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई और उन्होंने तय किया है कि यहां गरीबों को इलाज मुफ्त में किया जाएगा।

    सभी लोगों का होगा इलाज

    सभी लोगों का होगा इलाज

    शेख ने अपने अस्पताल के बार में विस्तार से कुछ इस तरह से बताया, 'यह अस्पताल सभी के लिए है, जाति, पंथ और धर्म से अलग। मैं अपने मुंह में चादी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ था.....शुरुआती दिनों में मुझे भी पैसों की समस्याओं का सामना करना पड़ा और मैंने कड़ी मेहनत की.....अब में आर्थिक तौर पर ठीक हूं। इसलिए मैंने सोचा कि इस वैश्विक महामारी में मदद के लिए तैयार होना चाहिए....मेरे तीन बेटे और मैंने हमेशा गरीब लोगों की सहायता की है....अब मैंने सोचा कि मुझे कुछ और करना चाहिए.....इसलिए यह अस्पताल बनाया है।'(पहली तस्वीर के अलावा बाकी तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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