KY Venkatesh: जानिए कौन हैं पद्मश्री पाने वाले केवाई वेंकटेश, जिनके लिए खुद राष्ट्रपति भी मंच से उतरे, Video

नई दिल्ली, 09 नवंबर: केंद्र सरकार ने मंगलवार को 7 खिलाड़ियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। इन खिलाड़ियों में कर्नाटक के केवाई वेंकटेश (पैरा स्पोर्टसमैन) का नाम भी शामिल था। ऐसे में जानते हैं आखिर कौन हैं केवाई वेंकटेश, जिनको सम्मानित करने के लिए खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए उन्हें स्टेज से नीचे उतकर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

पैरा-एथलीट हैं केवाई वेंकटेश

पैरा-एथलीट हैं केवाई वेंकटेश

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मंगलवार को पैरा-एथलीट केवाई वेंकटेश को पद्मश्री सम्मान से नवाजा। वेंकटेश ने अपने करियर की शुरुआत साल 1994 में की थी, जब उन्होंने जर्मनी में आयोजित पहले पैरालिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसी के साथ 2009 में पांचवें पैरालंपिक खेलों में भारत का नेतृत्व किया था। उस साल देश ने 17 पदक जीते थे। खेल और इसके विकास में उनके अमूल्य योगदान के लिए उनको पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वेंकटेश (44) कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले हैं। उनकी लंबाई चार फीट दो इंच हैं।

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    स्टेज से नीचे उतरकर राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

    स्टेज से नीचे उतरकर राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

    इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सादगी ने भी लोगों का दिल जीत लिया। राष्ट्रपति ने स्टेज से नीचे उतरकर पैरा- एथलीट केवाई वेंकटेश को सम्मानित किया। जानकारी के मुताबिक 4 फीट 2 इंच पैरा-एथलीट और लिम्का रिकॉर्ड धारक केवाई वेंकटेश को पद्मश्री से सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सीढ़ियों नीचे उतरे। केवाई वेंकटेश चौथे वर्ल्ड ड्वॉर्फ गेम्स में छह पदक जीतकर 2005 में 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराया था।

    एकोंड्रोप्लासिया बीमारी के थे शिकार

    एकोंड्रोप्लासिया बीमारी के थे शिकार

    जानकारी के मुताबिक पद्मश्री पैरा एथलीट वेंकटेश एकोंड्रोप्लासिया (achondroplasia) नाम की शारीरिक विकास में बाधा लाने वाली एक बीमार है, जो एक हड्डी विकास विकार है, जो बौनापन लाता है। इसी बीमारी से ग्रसित होकर उनके शरीर की वृद्धि 4 फीट 2 इंच पर आकर रूक गई, लेकिन उन्होंने इस बीमारी के आगे घुटने नहीं टेके और जीवन को नया मोड़ देते हुए पैरा एथलीट खेलों में अपने योगदान का मन बनाया।

    अपने नाम किए कई रिकॉर्ड

    अपने नाम किए कई रिकॉर्ड

    वेंकटेश ने देश को तब गौरवान्वित किया, जब उनका नाम वर्ल्ड ड्वार्फ गेम्स, 2005 में सबसे अधिक पदक जीतने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था। वह खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले भारतीय एथलीट थे और एथलेटिक्स में पदक जीते थे। बता दें कि पैरालिंपिक की तरह ही, वर्ल्ड ड्वार्फ गेम्स हर चार साल में एक बार आयोजित किए जाते हैं। केवाई वेंकटेश ने अपना करियर 1994 में शुरू किया जब उन्होंने बर्लिन, जर्मनी में पहली अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आईपीसी) एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। अब सेवानिवृत्त हो गए, वह कर्नाटक पैरा-बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

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