जानिए इस मामूली किसान ने कैसे पहाड़ी बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ, पद्मश्री से हुए हैं सम्मानित
बेंगलुरु, 4 फरवरी: कर्नाटक के अमई महालिंगा नाइक को इस साल के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें इस सम्मान से नवाजे जाने पर खुशी जताते हुए उन्हें वॉटर वॉरियर बताया है। दरअसल नाइक की उपलब्धि इतनी अनोखी है, जिसके बारे में सुनकर भी हैरानी होती है। उन्होंने अकेले अपने दोनों हाथों के दम पर ही एक पहाड़ी बंजर भूमि को न सिर्फ उपजाऊ बना दिया, बल्कि वहां पानी के स्थाई स्रोत का भी इंतजाम कर दिया। वर्षों के इस संघर्ष में लोग उन्हें पागल तक कहने लगे थे, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा और एक दिन उन्होंने सबका मुंह बंद कर दिया। अब उन्होंने देश के चौथे सबसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाकर पूरी मानवता के सामने एक उदाहरण पेश किया है।

बंजर पहाड़ी जमीन को अकेले बना दिया उपजाऊ
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के अमई महालिंगा नाइक को इस बार देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। दक्षिण कन्नड़ जिले के अद्यानादका गांव के रहने वाले नाइक ने इनोवेटिव जीरो-एनर्जी माइक्रो इरीगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करके पहाड़ी ढलान वाली बंजर जमीन को पूरी तरह से बदल डाला है और वह अब उपजाऊ हो चुकी है। अपने खेत तक पानी पहुंचाने के लिए उन्होंने अकेले 6 सुरेंगें खोद डालीं। पांच बार उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। लेकिन, उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। आज की तारीख में उन्होंने पानी के स्रोत वाली सुरंग के अलावा इसके आसपास की पहाड़ियों में खुद ही अकेले 300 रिसाव वाली खाईयां भी बना डाली हैं।

पानी की तलाश में अकेले चट्टान काटते रहे
नतीजा ये है कि जो पहाड़ी जमीन कभी बंजर थी, आज उस नखलिस्तान में सुपारी, ताड़, नारियल के पेड़े, काजू के पेड़, केले के पेड़ और कालीमिर्च की बेलें लगी हुई हैं। महालिंगा कहते हैं, '22 साल की उम्र में मैं जमीन के मालिकों के यहां काम करता था। उनमें से एक ने मुझे पहाड़ी की ढलान पर एक बंजर जमीन का टुकड़ा दिया। यहां पानी का कोई स्रोत नहीं था। सिंचाई पर खर्च करने या बोरबेल की खुदाई के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। इसलिए मैंने भू-जल निकालने के लिए कठोर चट्टानों में एक सुरंग खोदना शुरू कर दिया। '

चार साल तक सफलता नहीं मिली, छठे सुरंग में पानी मिला
नाइक ने बताया है कि 'पहले 5 प्रयासों में मैं असफल हो गया। लोग मुझे पागल कहते थे और ऐसा था कि 4 साल व्यर्थ हो जाने के बाद मेरे पास और कोई दूसरा काम नहीं था। लेकिन, इससे मैं निराश नहीं हुआ। आखिरकार छठे सुरंग की खुदाई के बाद मुझे पानी का स्रोत मिल गया, करीब 30 फीट की गहराई में। अब मैं इसे खेती के काम के लिए इस्तेमाल करता हूं। '
'जहां चाह, वहां राह'
नाइक की इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट करके उनकी काफी सराहना की है। 25 जनवरी को अपने ट्विट में शेखावत ने उन्हें 'वॉटर वॉरियर' बताया था और उनके जीवन का उदाहरण रखा था। उन्होंने लिखा था कि 'क्या जीवन है, क्या उपलब्धि है। कर्नाटक के सिंगल मैन आर्मी अमई महालिंगा नाइक जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।' उन्होंने लिखा, 'इन्होंने साबित कर दिया है कि जहां चाह, वहां राह। चाहे इसके लिए पत्थरों को ही क्यों न काटना हो और पानी के स्रोत तलाशने के लिए सुरेंगे ही क्यों ना खोदना हो।'












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