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Kerala Name Change: 'केरल' का नाम बदलकर हुआ 'केरलम', चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मोदी कैबिनेट की मंजूरी

Kerala Name Change: केरल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया जा सकता है। केंद्रीय कैबिनेट की आज होने वाली बैठक में केरल का नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने वाले विधेयक को मंजूरी दी गई है। यह निर्णय राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को आधिकारिक दर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा पहले ही आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है। आज कैबिनेट इस पर मुहर लगा दी है, अब केंद्र सरकार इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में संशोधन के लिए अंतिम सिफारिश भेजी जाएगी। चुनाव से ऐन पहले इस फैसले को क्षेत्रीय अस्मिता और चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

Kerala Name Change

सेवातीर्थ की पहली मीटिंग और फाइनल मुहर

यह फैसला इतना अहम था कि नए पीएमओ की पहली ही मीटिंग में इसे हरी झंडी दे दी गई। केरल विधानसभा ने तो 2024 में ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर दिया था, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक सुर में थे। जब पूरा राज्य एक स्वर में कुछ मांगता है, तो लोकतंत्र में उसे टालना नामुमकिन हो जाता है। अब संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव के साथ, हर सरकारी रिकॉर्ड में केरल अब गर्व से 'केरलम' कहलाएगा।

चुनाव का तड़का और मास्टरस्ट्रोक

अप्रैल-मई में चुनाव हैं, तो ज़ाहिर है कि हर फैसले में राजनीति का 'मसाला' तो होगा ही! बीजेपी दक्षिण में अपनी पैठ जमाने की कोशिश में है, और ऐसे में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी देना एक बड़ा दांव माना जा रहा है। अगर केंद्र इसे ठुकरा देता, तो विपक्ष इसे 'मलयाली अस्मिता का अपमान' बताकर बड़ा चुनावी मुद्दा बना लेता। मोदी सरकार ने तुरंत हामी भरकर विपक्ष के हाथ से यह जलता हुआ मुद्दा ही छीन लिया और जनता का दिल जीत लिया।

नारियल की ज़मीन का असली नाम

क्या आपको पता है कि 'केरलम' कोई नया शब्द नहीं, बल्कि इस मिट्टी की असली पहचान है? मलयालम में 'केरा' का मतलब होता है नारियल का पेड़ और 'अलम' का मतलब है उसकी ज़मीन। यानी, वो जगह जहां नारियल के पेड़ों की बहार हो। इतिहास के पन्ने पलटें तो अशोक के शिलालेखों में भी इसे 'चेर' राजवंश से जोड़ा गया है। सालों से स्थानीय लोग इसे केरलम ही कहते आ रहे थे, बस सरकारी कागज़ों में यह 'केरल' बनकर रह गया था।

अंग्रेज़ीदां अफसरों की वो पुरानी गलती

अब आप सोच रहे होंगे कि नाम बदला ही क्यों गया? दरअसल, 1956 में जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तो मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर को मिलाकर राज्य बना। लेकिन तब के अंग्रेज़ीदां नौकरशाहों ने अपनी सुविधा के लिए इसका नाम 'Kerala' (केरल) कर दिया। सालों से मलयाली लोगों के मन में यह कसक थी कि उनकी पहचान को अंग्रेज़ी चश्मे से क्यों देखा जाता है? अब जाकर उस पुरानी ऐतिहासिक भूल को सुधारने का काम पूरा हुआ है।

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