कोरोना के बढ़ते संक्रमण को केरल ने कैसे काबू किया, जहां ठीक हुए करीब आधे मरीज

नई दिल्ली। शुरुआती दो हफ्ते तक कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक केरल में इस खतरनाक वायरस के संक्रमण की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। रविवार को राज्य में केवल 2 नए मामले सामने आए जबकि इससे संक्रमित 36 अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए। केरल में कोरोना वायरस के 375 मामले सामने आए हैं और अभी तक इनमें 179 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। वहीं, राज्य में कोरोना वायरस के कारण दो मरीजों की मौत हुई है। पिछले दिनों केरल में कई हॉटस्पॉट की पहचान की गई थी। वहीं, अब राज्य में कोरोना वायरस के मामलों में काफी कमी आई है। केरल में अन्य राज्यों के मुकाबले संक्रमण से उबरने वालों की दर भी अधिक रही है।

रविवार को सबसे ज्यादा 36 लोग ठीक हुए

रविवार को सबसे ज्यादा 36 लोग ठीक हुए

रविवार को सबसे ज्यादा 36 लोग इस वायरस के संक्रमण से ठीक हुए, जो एक दिन में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या के लिहाज से सबसे अधिक है। केरल में कोरोना वायरस से ठीक होने वालों की संख्या अब 179 (लगभग 48 फीसदी) जा पहुंची है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में कोरोना वायरस के 8,447 मामले सामने आए हैं जिनमें 765 पूरी तरह ठीक/ डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में केरल की तुलना में सबसे अधिक लोग (142 के मुकाबले 208) ठीक हुए हैं लेकिन महाराष्ट्र में संक्रमित मरीजों की संख्या 1,761 है जो केरल में सामने आए मामलों का लगभग पांच गुना है। रविवार की शाम तक, केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में रिकवरी के मामलों में केरल का आंकड़ा 18 प्रतिशत था।

अभी तक 179 मरीज ठीक हुए

अभी तक 179 मरीज ठीक हुए

26 मार्च तक कोरोना वायरस के मामलों की संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र के बाद केरल में सबसे अधिक केस आए थे। इसके बाद कई राज्यों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी आई है और इन राज्यों में कई हॉटस्पॉट की पहचान की गई है लेकिन केरल में इसकी रफ्तार अन्य राज्यों की तुलना में कम रही है। एक अधिकारी के अनुसार, हॉटस्पॉट के रूप में पहचाने जाने वाले स्थानों पर इस बीमारी के फैलने का कोई संकेत नहीं है। केरल में संक्रमण अब तक ट्रेवल हिस्ट्री और उनके संपर्क वाले लोगों तक ही सीमित है, जिन्हें क्वारंटाइन किया गया है। राज्य के अधिकारी ने बताया कि अब उनका ध्यान प्राइमरी कॉन्टैक्ट्स पर है। हाई रिस्क कैटेगरी के सभी संपर्कों के नमूनों का परीक्षण एक सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि, हमने सतर्कता कम नहीं की है और सामुदायिक प्रसार की संभावना को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं।

कासरगोड और कन्नूर सबसे अधिक प्रभावित जिले

कासरगोड और कन्नूर सबसे अधिक प्रभावित जिले

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से दर्ज किए गए 375 मामलों में से 233 की ट्रेवल हिस्ट्री रही है। केरल में सात विदेशी पर्यटकों का टेस्ट पॉजिटिव रहा था और 19 मामले ऐसे लोगों के हैं, जो मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसके अलावा स्थानीय रूप से संक्रमित मामले या प्राइमरी कॉन्टैक्ट्स हैं। कासरगोड और कन्नूर में राज्य के 63 फीसदी मामले रहे हैं। कन्नूर में 71 संक्रमित मरीजों में से 36 डिस्चार्ज किए जा चुके हैं जबकि कासरगोड में 166 मरीजों में से 61 ठीक हो चुके हैं। इन दोनों जिलों में संक्रमित मामलों को कुछ इलाकों में क्लस्टर में बांटा गया था जिसके बाद इसके संक्रमण को फैलने से रोकने में कामयाबी मिली है। इन दोनों जिलों के करीब 90 फीसदी संक्रमित मरीज दुबई से लौटे थे।

संक्रमण को फैलने से रोकने को किए गए ये उपाय

संक्रमण को फैलने से रोकने को किए गए ये उपाय

इन जिलों के कई गांवों और शहरी इलाकों को लगभग सील कर दिया गया है और लॉकडाउन बढ़ा दिए गए हैं, जिसके बाद लोगों को उनके घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह से रोक लग गई है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में संक्रमित मरीजों की संख्या या तो जीरो रही है या दहाई के नीचे। कासरगोड में प्रभावी लॉकडाउन, कुशल स्वास्थ्य और चिकित्सा टीमों, क्लस्टर रोकथाम और स्मार्ट आइसोलेशन और क्वारंटाइन के कारण अच्छे नतीजे दिखाई दे रहे हैं। कोविड-19 स्पेशल ऑफिसर अल्केश कुमार शर्मा ने बताया कि इसके अलावा कोरोना को हराने में सक्रिय सार्वजनिक समर्थन भी अहम रहा है।

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