Kerala Opinion Poll:LDF के लिए बहुत बड़ी भविष्यवाणी, 40 साल का ट्रेंड बदलने का अनुमान
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव को लेकर आया एक ओपिनियन पोल वहां 40 साल से कायम हो चुके चुनावी ट्रेंड के ठीक उलट है। चुनाव पूर्व एक सर्वे में अनुमान जताया गया है कि अभी चुनाव हुए तो सीपीएम की अगुवाई वाली सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) वहां फिर से सत्ता में वापस लौटेगी। 1980 से वहां यह ट्रेंड रहा है कि किसी भी दल या गठबंधन की सत्ता में वापसी नहीं हुई है और हर पांच साल में सरकारें बदलती रही हैं। हालांकि, यह सिर्फ अनुमान भर है, लेकिन इससे कांग्रेस की उम्मीदों को बहुत बड़ा झटका लग सकता है। खासकर यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से भी बहुत बड़ा सर्वे है, जो इस समय प्रदेश की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं।

केरल में दोबारा एलडीएफ की सरकार बनने का अनुमान
एशियानेट न्यूज-सीफोर सर्वे ने भविष्यवाणी की है कि सत्ताधारी एलडीएफ वहां मामूली बहुमत के साथ दोबारा सरकार बनाएगी। इस गठबंधन को 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में 72 से 78 सीटें मिलने की बात कही गई है। जबकि, सामान्य बहुमत के लिए 71 विधायक ही होने जरूरी हैं। यह अनुमान कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के मंसूबों पर पानी फेर सकता है, जिसने 2019 के लोकसभा चुनाव में अच्छी सफलता हासिल की थी। इस सर्वे में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को तीसरा स्थान मिलने की संभावना जताई गई है। जबकि,मेट्रो मैन ई श्रीधरन के पार्टी में शामिल करने की कवायद से इसके नेता और कार्यकर्ता बहुत ही ज्यादा उत्साहित हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस को बड़ा झटका
चुनाव से पहले किए गए इस सर्वेक्षण में मुख्य विपक्षी गठबंधन यूडीएफ को 59 से 65 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जो कि 2016 के चुनाव के मुकाबले ज्यादा है, तब इस गठबंधन को सिर्फ 47 सीटें मिली थीं। लेकिन, पिछले लोकसभा चुनावों के ट्रेंड के हिसाब से यह बहुत ही खराब है। 2019 में लोकसभा की 20 सीटों में यूडीएफ 19 सीटें जीता था और उसमें भी कांग्रेस 16 सीटों पर लड़कर 15 सीटें जीत गई थी। जबकि, सीपीएम को सिर्फ एक सीट मिल पाई थी। वहीं मौजूदा सर्वे में एनडीए को 3 से 7 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। इस सर्वे की मानें तो एलडीएफ को उत्तरी और दक्षिणी केरल में ज्यादा बढ़त मिलेगी, लेकिन मध्य केरल में यूडीएफ का दबदबा नजर आएगा।

पिनराई विजयन को 39 फीसदी लोग सीएम बनाना चाहते हैं
जहां तक मुख्यमंत्री का सवाल है तो सर्वे में शामिल 39 फीसदी लोग पिनराई विजयन को ही दोबारा से सीएम बनते देखना चाहते हैं। जबकि, 18 फीसदी पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओमान चांडी के पक्ष में और 9 फीसदी तिरुवनंतपुरम से पार्टी सांसद शशि थरूर के समर्थन में दिख रहे हैं। प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की भी लोकप्रियता 7 फीसदी आंकी गई है। इनके बाद कांग्रेस के नेता विपक्ष रमेश चेन्निथाला और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के सुंदरण को 6 फीसदी लोग सीएम बनाना चाहते हैं।

निकाय चुनावों में भी एलडीएफ ने मारी थी बाजी
सर्वे में शामिल 34 फीसदी लोगों का कहना है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान खाने का मुफ्त पैकेट बांटना एलडीएफ सरकार की सबसे बड़ी सफलता है। वहीं 27 फीसदी कल्याणकारी पेंशन और 18 फीसदी लोगों ने कोविड-19 मैनेजमेंट के लिए सरकार को सराहा है। जबकि, आलम ये है कि केरल अभी भी कोरोना के मामले में खराब परफॉर्मेंस वाले राज्य में शामिल है। वहीं 34 फीसदी लोग मानते हैं कि एलडीएफ सरकार की सबसे बड़ी नाकामी 2018 में सबरीमाला वाला प्रदर्शन था। जून में भी इस एजेंसी ने एक सर्वे किया था, तब भी एलडीएफ के लिए ऐसे ही अनुमान जताए गए थे। पिछले दिसंबर में हुए पंचायत, ब्लॉक पंचायत, जिला पंचायतों और निगमों के चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन ने जबर्दस्त जीत दर्ज करते हुए अधिकतर निकायों में कब्जा कर लिया था।












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