समझिए पूरा माजरा, 13 महीने चुपचाप बैठी रही AAP और अचानक कन्हैया कुमार देशद्रोही बन गए?
बेंगलुरू। 9, नवमबर, वर्ष 2016 में जेएनयू कैंपस में देश विरोधी नारे लगाने के आरोपी तत्कालीन जेएनयूएसयू अध्यक्ष और मौजूदा सीपीएम नेता कन्हैया कुमार के खिलाफ देशद्रोह की चार्जशीट को करीब साढ़े 13 महीने के अंतराल के बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मंजूरी दे दी है।

दरअसल, जेएनयू कैंपस में देशविरोधी नारे लगाने के करीब तीन वर्ष जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी , 2019 को करीब 1200 पन्नों में चार्जशीट में कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था। इनमें उमर खालिद और अनिर्बान समेत 7 कश्मीरी छात्र शामिल थे, जिसे तब दिल्ली सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, लेकिन अचानक देशद्रोह के मुकदमे को मंजूरी देकर केजरीवाल ने सभी को हैरत में डाल दिया।

गौरतलब है दिल्ली पुलिस को कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली सरकार की मंजूरी लेनी जरूरी है और दिल्ली सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के चलते पिछले करीब साढ़े 13 माह से कन्हैया कुमार खुला घूम रहा है। इस बीच कन्हैया कुमार ने बिहार के बेगूसराय लोकसभा सीट से किस्मत भी आजमा लिया और अभी बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत पूरे बिहार में जन-गण-मन यात्रा भी निकाल कर रहा है।

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दिल्ली सरकार के अचानक लिए फैसले से कन्हैया कुमार भी हतप्रभ है और आरोप लगाया है कि उक्त कार्रवाई उसके चुनाव तैयारियों को बाधा पहुंचाने के लिए की गई है। हालांकि कहा जा रहा है कि अचानक दी गई कन्हैया कुमार के फाइल को मंजूरी केजरीवाल सरकार की एक फेस सेविंग टैक्टिस है ताकि लोगों का ध्यान दिल्ली दंगों से बांटा जा सके।

हालांकि कन्हैया कुमार के देशद्रोह केस की फाइल को मंजूरी देने के साथ ही केजरीवाल सरकार के चहेतों और प्रशंसकों की ओर से दिल्ली सरकार के फैसले की लानत-मलानत भी शुरू हो गई है। वयोवृद्ध फिल्म एक्ट्रेस शिमी ग्रेवाल ने केजरीवाल के फैसले पर अफसोस जताया है।

नाराज शिमी ग्रेवाल ने ट्वीट करते हुए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा, 'मेरे दिल में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए जो भी सम्मान था वो खत्म हो गया है, मुझे अफसोस है कि मैंने कभी इनका बचाव किया था और इन्हें समर्थन दिया था।
वहीं, फैसले से नाराज फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महाशय अरविंद केजरीवाल जी, आपको क्या कहें, 'स्पाइनलेस तो प्रशंसा है, आप तो हैं ही नहीं, कितने में बिके?' अनुराग कश्यप ने यह प्रतिक्रिया कन्हैया कुमार के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए दी।

वहीं, केजरीवाल के फैसले से खार खाए खुद कन्हैया कुमार ने देशद्रोह के मुदकमे को मंजूरी मिलने की खबर मिलते ही ट्वीट में लिखा था, 'दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद। दिल्ली पुलिस और सरकारी वकीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली 'आपकी अदालत' की जगह कानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सत्यमेव जयते।'

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे कन्हैया कुमार द्वारा किया गया उक्त ट्वीट दिल्ली की केजरीवाल सरकार के फैसले से आहत कन्हैया कुमार की हालत को बताने के लिए काफी है, जो यह संकेत देता है कि उन्होंने कभी भी केजरीवाल सरकार की ओर ऐसे किसी फैसले की उम्मीद नहीं की रही होगी।

उल्लेखनीय है पिछले 13 महीने 14 दिन पहले दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार समेत कुल 10 लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली सरकार को फाइल भेजी थी, लेकिन शुक्रवार, 28 फरवरी तक केजरीवाल सरकार सोयी रही थी और उसकी नींद तब टूटी जब दिल्ली दंगे में AAP पार्षद ताहिर हुसैन बुरी तरह फंस गया है।

क्योंकि पार्षद ताहिर हुसैन के मकान की छत पर दंगों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री और दंगों के दौरान सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो क्लिपिंग में उसके घर की छत से फेंके जा रहे पत्थर, पेट्रोल बम और तेजाब की पॉलीथिन चीख-चीखकर दंगे में उसकी संलिप्तता की गवाही दे रहे हैं।

यही कारण है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पा्र्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दंगे और हत्या के आरोप में बुक किए गए ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित करने में देर नहीं की और अब ताहिर हुसैन के चलते पार्टी की मलिन हुई छवि से ध्यान हटाने के लिए बिना देर किए उन्होंने कन्हैया कुमार की फाइल को आनन-फानन में मंजूरी दे दी ताकि मीडिया में बहस के केंद्र ताहिर हुसैन के बजाय कन्हैया कुमार किया जा सके।

मालूम हो, पिछले 12-13 महीने से विपक्ष कांग्रेस पर कन्हैया कुमार को बचाने का आरोप लगा रही थी, लेकिन केजरीवाल टस से मस नहीं हुए थे। उल्टा उनका गृह विभाग कन्हैया कुमार के ऊपर लगाए देशद्रोह के मुकदमे को सबूतों के अभावों में गलत ठहरा रही थी, लेकिन एक दिन में ही केजरीवाल सरकार को न केवल सारे सबूत भी मिल गए और 13 महीने से लटके देशद्रोह के मुकदमे को मंजूरी की फाइल भी आगे बढ़ा दी गई।

हालांकि पिछले कुछ दिनों विपक्ष निर्भया गैंगरेप और मर्डर के चारों दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए भी दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। आरोप था कि दिल्ली सरकार के अधीन जेल विभाग के जेल मैनुअल में संशोधन किए जाने से दोषियों को फांसी टालने में मदद कर रही है, जिसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट भी दिल्ली सरकार को फटकार चुकी है।
यह भी पढ़ें-कन्हैया कुमार की चार्जशीट में देरी, अब निर्भया दोषियों की फांसी में देरी, उठे केजरीवाल की मंशा पर सवाल?

13 माह 14 दिन बाद कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट को मिली मंजूरी
जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट को फिलहाल दिल्ली सरकार ने मंजूरी दे दे ही। दिल्ली पुलिस द्वारा कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों पर देशद्रोह का चार्जशीट दाखिल की मंजूरी के लिए 13 महीने से अधिक हो चुका था, लेकिन केजरीवाल ने तब तक फाइल दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय में धूल खा रही है।

तीन साल मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने तैयार की थी चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने गत 14 जनवरी , 2019 को करीब तीन साल बाद मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने 1200 पन्नों में दाखिल अपनी चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान के साथ ही सात कश्मीरी छात्रों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दायर किया था। माना जा रहा है कि केजरीवाल अभियोजन को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं है।

अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू में लगे थे राष्ट्रविरोधी नारे
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9 फरवरी, वर्ष 2016 को संसद भवन पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने की बरसी पर राजधानी दिल्ली में स्थित जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी लगाने के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया था और काफी हो-हल्ले के बाद दिल्ली पुलिस को उसे छोड़ना पड़ा था।

कोर्ट से फटकार के बाद भी AAP सरकार ने 13 माह तक केस को मंजूरी नहीं दी
कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ देशद्रोही की चार्जशीट फाइल को आगे बढ़ाने से तब केजरीवाल सरकार द्वारा यह आरोप लगाकर मना कर दिया गया कि उसने मुकदमा दायर करने से पूर्व दिल्ली सरकार की अनुमति नहीं ली गई, लेकिन कोर्ट के फटकार के बाद भी दिल्ली पुलिस द्वारा भेजी गई फाइल को करीब 13 माह तक केजरीवाल सरकार की मंजूरी के लिए इंतजार करना पड़ा।

सितंबर 2019 को अभियोजन के लिए मंजूरी नहीं देने का फैसला सुनाया
दिल्ली पुलिस अभियोग की मंजूरी के लिए तब से केजरीवाल सरकार के चक्कर काट रही थी और अचानक सितंबर 2019 को ऐनवक्त जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के वक्त केजरीवाल सरकार ने कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ अभियोजन के लिए मंजूरी नहीं देने का फैसला कर लिया।

दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने कहा था कि देशद्रोह का केस नहीं बनता
केजरीवाल सरकार द्वारा कहा गया दिल्ली पुलिस ने जो सबूत पेश किए हैं उनके आधार पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता कि दिल्ली सरकार का गृह विभाग सभी तथ्यों पर विचार-विमर्श के बाद उचित निर्णय लेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री केजरीवाल यह कहने से चूके कि मामले में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। मामले पर दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने कहना था कि मामले में है। कारण स्पष्ट था कि केजरीवाल सरकार कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के अभियोजन के लिए मंजूरी के पक्ष में नहीं है।

निर्भया के दोषियों की फांसी देरी के लिए दिल्ली सरकार पर लगे आरोप
वर्ष 2017 में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल सरकार ने निर्भया के चारो दोषियों की फांसी की प्रक्रिया में तत्परता नहीं दिखाई और वर्ष 2018 में दिल्ली सरकार के अधीन जेल के मैन्युअल में संशोधन कर दिया गया। नए जेल मैनुअल चलते ही निर्भया के चारों दोषी संशोधित नियम की आड़ में लगातार फांसी की तारीख टालने में सफल हो रहे हैं, जिससे निर्भया को इंसाफ मिलने में देरी हो रही है।
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