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क्या केदार घाटी में हुआ था चमत्कार, जो तबाही के बीच भी बचा रहा केदारनाथ मंदिर

प्रलय के उस भयावह वेग में सबकुछ तहस-नहस हो रहा था, लेकिन लाखों लागों की आस्था का केंद्र केदारनाथ मंदिर अपनी जगह से नहीं हिला।

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    Uttarakhand Disaster : भयानक प्रलय के बीच ऐसे बचा Kedarnath Temple | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में 16 जून 2013 को तबाही का वो खौफनाक मंजर जिन आंखों ने देखा होगा, उन आंखों से तबाही के 5 साल बाद भी शायद वो खौफ ना हटा हो। केदार घाटी में तबाही का आलम ऐसा था कि हर तरफ केवल और केवल चीख-पुकार थी। लोग अपनों को अपनी आंखों के सामने मौत के मुंह में समाते हुए देख रहे थे। कुछ समय पहले तक श्रद्धालुओं से गुलजार रहे होटल और गेस्ट हाउस देखते ही देखते प्रलय के महासागर में समा गए। तबाही के उस जलजले में भगवान शिव के धाम केदारनाथ मंदिर का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

    अपनी जगह से नहीं हिला केदार धाम

    अपनी जगह से नहीं हिला केदार धाम

    16 जून को गांधी सरोवर के टूटने से आई जल प्रलय का वेग इतना प्रचंड था कि केदार घाटी और इसके आस-पास मौजूद कई मंजिला होटल और गेस्ट हाउस ताश के पत्तों की तरह बिखरकर बह गए। पानी में बहकर आए पत्थरों की चोट से केदारनाथ मंदिर के बाहर लगा लोहे का बैरिकेटर टेढ़ा हो गया और मंदिर का चबूतरा पूरी तरह धवस्त हो गया। प्रलय के उस भयावह वेग में सबकुछ तहस-नहस हो रहा था, लेकिन लाखों लागों की आस्था का केंद्र केदारनाथ मंदिर अपनी जगह से नहीं हिला। इसकी वजह थी वो शिला, जो प्रलय के साथ बहकर आई और आकर मंदिर के रक्षक के रूप में खड़ी हो गई।

    मंदिर की रक्षक बनी 'दिव्य शिला'

    मंदिर की रक्षक बनी 'दिव्य शिला'

    भगवान शिव में आस्था रखने वालों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि तबाही के सैलाब में करीब 40 फुट का एक पत्थर बहकर आया और मंदिर के पीछे की दीवार के पास आकर टिक गया। हजारों लोगों की जान लेने वाली उस जल प्रलय का वेग इस शिला से टकराकर दो हिस्सों में टूट गया, जिससे जल सैलाब मंदिर तक तो पहुंचा, लेकिन मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाया।

    लहरा रही है आस्था की पताका

    लहरा रही है आस्था की पताका

    तबाही के उस मंजर के बीच मंदिर के अंदर भी जल प्रलय ने जमकर कोहराम मचाया। मंदिर के अंदर कई लाशें तैरती हुईं नजर आईं लेकिन अंदर मौजूद नंदी की प्रतिमा को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा। यहां तक कि मंदिर के बाहर मौजूद नंदी की प्रतिमा भी पूरी तरह सुरक्षित रही। प्रलय के दौरान भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का आधा हिस्सा मलबे में दब गया, लेकिन उसे किसी तरह की क्षति नहीं पहुंची। आज उस तबाही के पांच साल बाद केदार घाटी फिर से भक्तों के जयघोष गूंज रही है और केदारनाथ धाम की चोटी पर लगी आस्था की पताका लहरा रही है।

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