गजवेल से KCR का गहरा नाता, क्या इस बार फिर से दोहराया जाएगा इतिहस?
तेलंगाना की 40 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 30 नवंबर को होने हैं। जिसको लेकर सभी राजनीतिक दल पूरा जोर लगाने में लगे हैं। इसी कड़ी में राज्य के मुख्यमंत्री और बीआरएस सुप्रीमो के.चंद्रशेखर राव भी कोई कसर नहीं छोडना चाहते हैं। यह वही राज्य है, जिसको दर्जा दिलाने में केसीआर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस बार केसीआर दो विधानसभा सीटों गजवेल और कामारेड्डी से किस्मत आजमा रहे हैं। गजवेल निर्वाचन क्षेत्र केसीआर के लिए बहुत भावनात्मक महत्व रखता है। खास बात यह है कि केसीआर, हर विधानसभा चुनाव के दौरान अपना प्रचार अभियान यहीं खत्म करते हैं। आइए जानते हैं केसीआर का गजवेल से नाता...

'गजवेल' के विकास का उदय
वर्तमान का 'गजवेल' विकसित नजर आता है। यहां आज एक रिंग रोड और सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें हैं, जो खंड के हर कोने को जोड़ती हैं। रेलवे लाइन, रास्ते और यहां तक कि हर घर नल-जल है। वहीं, 9 साल पहले यानी साल 2014 में यह सिर्फ एक कल्पना भर था।
केसीआर ने गोद लिए गए येरावल्ली और नरसन्नपेटा गांवों में गहरी दिलचस्पी ली। उन्होंने दो बीएचके घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा। फिर गांवों का पुनर्निर्माण किया।
पूरे हुए वादे, लेकिन टूटा लोगों का ख्वाब
2016 में, मल्लन्ना सागर लिफ्ट सिंचाई परियोजना और कोंडापोचम्मा जलाशय के निर्माण के लिए गजवेल के लगभग 20 गांवों में लगभग 4 हजार परिवारों को विस्थापित किया गया था। मल्लन्ना सागर लिफ्ट सिंचाई और कोंडापोचम्मा सागर जलाशय दोनों कालेश्वरम परियोजना से जुड़े हुए हैं। जबकि मल्लन्ना सागर लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से पानी संग्रहित करता है। कोंडापोचम्मा जलाशय, सिद्दीपेट, संगारेड्डी और भुवनागिरी जिलों को पीने का पानी उपलब्ध कराता है।
क्या फिर से इतिहास दोहराएगा?
केसीआर ने गजवेल निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दो बार जीत हासिल की। 2014 में, उन्होंने 19,391 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और 2018 में, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 58,000 से अधिक वोटों के आसान अंतर से हराया। आगामी चुनाव के लिए, निर्वाचन क्षेत्र में कुल 2,65,636 मतदाताओं के लिए 321 मतदान केंद्र हैं। इनमें 1,31,774 पुरुष हैं, जबकि 1,33,855 महिलाएं हैं। इस क्षेत्र में 7 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।












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