Kathua Terror Attack: कठुआ आतंकी हमले की इनसाइड स्टोरी, लोकल गाइड कैसे बने आतंकियों के मददगार?
Kathua Terror Attack Inside Story: जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के बदनोटा में 8 जुलाई 2024 को हुए आतंकी हमले के बाद सवाल उठ खड़े हो रहे हैं कि क्या जम्मू में आतंकियों के ऐसे नए मददगार तैयार हो गए, जो देश से गद्दारी कर रहे हैं?
कठुआ आतंकी हमले में भारतीय सेना के पांच जवान शहीद हुए हैं। गढ़वाल राइफल्स के ये पांचों जवान उत्तराखंड के रहने वाले थे। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि आतंकियों ने पहले इलाके की रेकी की। फिर स्थानीय गाइड की मदद ली और उसके बाद US मेड M-4 कार्बाइन से भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया।

दैनिक भास्कर में छपी खबर में जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य कहते हैं कि कठुआ आतंकी हमला 2024 से दो बातें साफ हो रही हैं। एक यह कि जम्मू संभाग में आतंकियों के नए मददगार तैयार हो गए हैं। दूसरी यह कि यहां बड़े सैन्य ऑपरेशन की जरूरत है।
एसपी वैद्य के अनुसार जून 2024 में भारतीय सुरक्षा बलों को कठुआ के बानी, डग्गर, किंडली के ऊपरी इलाकों में आतंकी समूह की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पता चला। सभी आतंकी विदेशाों से ऑपरेट हो रहे हैं। इन्हें स्थानीय लोगों का सपोर्ट भी मिल रहा है।

कठुआ में भारतीय सुरक्षा बलों के सर्च ऑपरेशन में पता चला कि छह पाकिस्तानी आतंकी थे। बाद में ये तीन-तीन के समूह में बंट गए थे। इनमें से तीन आतंकी बीते दिनों डोडा में मारे गए। 8 जुलाई को कठुआ में हमला करने वाला दूसरा दल हो सकता है।
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खबर यह भी है कि पाक कश्मीर टाइगर्स नामक आतंकी संगठन की मदद ली गई है। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े इसी संगठन ने कठुआ आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है। ऐसे हमले रोकने के लिए सबसे जरूर लोकल सपोर्ट तोड़ना है।
कठुआ में घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला उस वक्त किया जब भारतीय सेना के जवान तलाशी अभियान चला रहे थे। सूत्रों की मानें तो इलाके में रेकी के आतंकियों ने स्थानीय गाइड की मदद ली। गाइडों ने आतंकियों को न केवल भोजन मुहैया करवाया बल्कि पनाह भी दी।

कठुआ में आतंकियों ने कहां-कैसे किया हमला?
बता दें कि भारतीय सेना के जवान 8 जुलाई को अपराह्न साढ़े तीन बजे दो ट्रकों में सवार होकर कठुआ से करीब 123 किलोमीटर दूर लोहाई मल्हार ब्लॉक के माछेड़ी इलाके के बडनोटा में पेट्रोलिंग पर निकले थे।
यहां पहाड़ों पर कच्चा रास्ता था। एक तरफ गहरी खाई थी। ऐसे में भारतीय सुरक्षा बलों के ट्रकों की गति 15-20 किलोमीटर प्रतिघंटा थी।
ऊपर घात लगाकर बैठे आतंकियों ने पहले ग्रेनाइड फेंककर ट्रक के चालक को निशाना बनाया और फिर स्नाइपर गन से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग शुरू हुई तो वह जंगल की ओर भाग गए।
कठुआ हमले में ये जवान हुए शहीद
1. हवलदार कमल सिंह रावत: शहीद कमल सिंह रावत उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लैंसडाउन के गांव पापरी नोदानु के रहने वाले थे। इनके दो बच्चे हैं।
2. एनके विनोद सिंह: शहीद विनोद सिंह उखराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले के जाखणीधार के गांव चौंद जसपुर के रहने वाले थे। 33 वर्षीय विनोद के वीरसिंह भंडारी व शशि देवी के इकलौटे बेटे थे। इनका परिवार भानियावाल देहरादूर में रहता है। विनोद के चार साल का बेटा व चार माह की बेटी है।
3. आरएफएन अनुज नेगी: शहीद राइफलमैन अनुज नेगी उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले के रिखणीखाल के गांव डोबरिया के रहने वाले थे। अनुज नेगी की नवंबर 2023 को शादी हुई थी।
4. नायब सूबेदार आनंद सिंह: शहीद आनंद सिंह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के गांव कंडाखाल के रहने वाले थे।
5. आरएफएन आदर्श नेगी: शहीद आदर्श नेगी उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग के गांव थाटी डागर के रहने वाले थे। इनके पिता दलबीर सिंह नेगी खेती करते हैं। 26 वर्षीय आदर्श नेगी साल 2019 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। तीन भाई बहनों में सबसे छोटे थे।












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