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कौन हैं भारत प्रशासित कश्मीर में 'पाकिस्तान डे' मनाने वाली आसिया अंद्राबी?

By Bbc Hindi

भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथियों की हिमायती और दुख़्तरान-ए-मिल्लत की चेयरपर्सन आसिया अंद्राबी को उनकी दो साथियों के साथ नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 10 दिनों के लिए रिमांड पर लिया है.

इससे पहले उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों के आरोपों में गिरफ़्तार किया गया है. 58 साल की आसिया अंद्राबी बीते तीन दशकों से भारत से कश्मीर को अलग करने की समर्थक रही हैं. वह कश्मीर को पाकिस्तान से मिलाने की हमेशा वकालत करती रही हैं.

कश्मीर के अलगाववादियों ने शनिवार को आसिया को तिहाड़ जेल शिफ़्ट करने के ख़िलाफ़ कश्मीर बंद बुलाया था.

अलगाववादियों ने अपने बयान में बताया है कि आसिया को तिहाड़ जेल में शिफ़्ट करके भारत सरकार उनसे बदला ले रही है.

आसिया के करीबियों का कहना है कि अलगाववादी नेताओं में सैयद अली शाह गिलानी के बाद आसिया अंद्राबी कश्मीर को पाकिस्तान के साथ मिलाने की सबसे बड़ी समर्थक हैं.


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1990 में पहली बार हुईं गिरफ़्तार

श्रीनगर के नौपोरा, ख़ानयार में जन्मीं आसिया के पिता डॉक्टर शहाबुद्दीन एक डॉक्टर थे जिनकी अस्सी के दशक में मौत हो गई थी और वह पाकिस्तान में दफ़न हैं.

आसिया की माँ का निधन दो साल पहले हो चुका है. साल 1990 में आसिया को पहली बार गिरफ़्तार किया गया था. जेल में उनका पहला बेटा मोहम्मद बिन क़ासिम पैदा हुआ था.

इसके बाद आसिया को आज तक कई बार गिरफ़्तार किया जा चुका है. आसिया हर साल कश्मीर में पाकिस्तान डे मनाती हैं. इस दिन वह पाकिस्तान का राष्ट्रीय तराना भी अपने साथियों के साथ गाती हैं.

आसिया ने अरबी में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के अलावा एमएससी की पढ़ाई भी की है.

आसिया की शादी डॉक्टर क़ासिम फ़ाकतो से हुई है जो जेल में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं. फ़ाकतो पर कश्मीरी पंडित हृदयलाल वांचो की हत्या का आरोप है.

वह पहले चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन से जुड़े थे और बाद में वह जमीयत-उल-मुजाहिदीन में शामिल हो गए.

श्रीनगर जालडाग़र के रहने वाले फ़ाकतो एक सक्रिय चरमपंथी रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया में रहता है बेटा

आसिया के एक क़रीबी का कहना है कि फ़ाकतो के साथ आसिया की शादी 1990-1991 के बीच में हुई थी. उनका यह भी कहना था कि शादी के दिन घर पर छापा पड़ा और दूल्हा घर से भाग गया था.

आसिया अंद्राबी के दो बेटे हैं. एक बेटा ऑस्ट्रेलिया में है जबकि दूसरा कश्मीर में है.

आसिया के एक भाई इनायतउल्लाह अंद्राबी अभी लंदन में रह रहे हैं जबकि उनकी एक बहन की शादी पाकिस्तान में हुई है.

दुख़्तरान-ए-मिल्लत से पहले आसिया जमात-ए-इस्लामी से भी जुड़ी रही हैं.

पत्रकार ख़ुर्शीद वानी का कहना है कि उनके भाई इनायत अंद्राबी इस्लामी जमीयत तुलबा के नेता भी रहे हैं.

वह कहते हैं, "इस्लामी जमीयत तुलबा के बाद उन्होंने अपना एक ग्रुप बनाया था जिसका नाम था महाज़-ए-इस्लामी लेकिन बाद में महाज़-ए-इस्लामी ज़्यादा सक्रिय नहीं रहा और इनायत कश्मीर छोड़कर चले गए. अभी वह न जाने किस मुल्क में रह रहे हैं."

आसिया के अंदर 80 के दशक में धार्मिक रुझान पैदा हुआ था. ख़ुर्शीद कहते हैं कि धार्मिक रुझान से पहले वह एक आम क़िस्म की शहरी लड़की थीं.

कॉलेज के ज़माने में ही उनके अंदर धार्मिक भावनाएं उभरने लगी थीं.

सैयद अली शाह गिलानी
Getty Images
सैयद अली शाह गिलानी

हथियार बंद आंदोलन की समर्थक

खुर्शीद वानी कहते हैं, "80 के दशक में वह जब कॉलेज में पढ़ती थीं तो उसी ज़माने में उनके अंदर धार्मिक भावनाएं उभरने लगी थीं. वह छात्र राजनीति में सक्रिय होने लगी थीं. वो उस ज़माने में गवर्मेंट वीमेन कॉलेज में बीएससी की छात्र थीं. उनका कहना है कि उसी दोरान उन्होंने कुछ धार्मिक किताबें पढ़नी शुरू कीं. उन्होंने ये भी कहा था कि वह पहले एक मॉडर्न क़िस्म की लड़की थीं."

हालांकि एक दूसरे लेखक हारून रेशी का कहना है कि आसिया ने उन्हें एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि उर्दू के मशहूर लेखक और शायर मायल ख़ैराबादी की किताब 'ख़वातीन की दिलों की बातें' यानि (महिलाओं की दिलों की बातें) पढ़कर उनकी विचारधारा का रुख़ बदल गया.

आसिया ने 1990 में दुख़्तरान-ए-मिल्लत संगठन कि बुनियाद डाली और पूरे श्रीनगर में धार्मिक मदरसों का जाल बिछाया. साल 1990 में ही उन्होंने कश्मीर में जारी हथियार बंद आंदोलन का समर्थन करना शुरू किया.

हारुन रेशी कहते हैं, "कश्मीर पर आसिया का रुख़ काफ़ी सख़्त रहा है. वह कश्मीर समस्या को एक धार्मिक मसला मानती हैं. वह कश्मीर में जारी भारत विरोधी आंदोलन को जिहाद क़रार देती हैं. उन्होंने हमेशा चरमपंथ का खुलकर समर्थन किया है. वह चाहती हैं कि कश्मीर को धर्म की बुनियाद पर पाकिस्तान साथ मिलाया जाए. ये सब बातें उन्होंने आज तक खुलकर कही हैं."


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महिला और बच्चे
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पर्दे को लेकर मुहिम हुई फ़ेल

आसिया ने कश्मीर में महिलाओं को पर्दे में रहने को लेकर के एक मुहिम भी छेड़ी थी लेकिन वह उसमें कामयाब नहीं हो पाईं.

इसके अलावा आसिया ने कश्मीर में कैफ़े कल्चर के ख़िलाफ़ भी ज़ोरदार मुहिम छेड़ी लेकिन उसमें भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

पर्दे की उस मुहिम की जनता में काफ़ी आलोचना हुई. जनता ने ये आरोप लगाया कि आसिया जबरन इस मुहिम को लागू करना चाहती हैं. कुछ महिलाओं ने तो उनके कहने पर पर्दा तो किया लेकिन वह मामला अधिक देर तक नहीं चला."

कैफ़े कल्चर को ख़त्म करने लिए आसिया ने अपनी मुहिम के दौरान कई जोड़ों पर काला रंग भी फेंका.

खुर्शीद कहते हैं, "कैफ़े कल्चर और पर्दे की मुहिम तो आसिया ने बड़े ज़ोर से कश्मीर में चलाई थी लेकिन उसमें उन्हें सफलता नहीं मिली."

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English summary
Kashmiri separatist Asiya Andrabi who celebrate Pakistan day in Jammu and Kashmir

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