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Karur Stampede: 41 मौतों पर सियासत का शर्मानक खेल, न्याय की उम्मीद अब भी जिंदा! आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?

Karur Stampede 2025: तमिलनाडु के करूर जिले में अभिनेता-से-नेता बने विजय की पार्टी तमिऴगा कड़कम (TVK) की रैली में मची भगदड़ ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हैं। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।

शनिवार देर शाम हुए हादसे के बाद रविवार को पोस्टमार्टम के बाद सभी शव परिजनों को सौंप दिए गए। घायलों का करूर सरकारी अस्पताल और अन्य नज़दीकी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

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28 सितंबर को तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उधयनिधि स्टालिन ने अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ आपात बैठक की। लेकिन इसे महज इत्तेफाक कहें या शर्मनाक देश में जब भी कोई ऐसी दुर्घटना होती है जान गंवाने वालों की संख्या के साथ राजनीति का सिलसिला शुरू हो गया। आइए जानते हैं कि करूर रैली में हुए हादसे

Karur Stampede हादसे का जिम्मेदार कौन?

पुलिस ने किसी खुफिया नाकामी से इनकार करते हुए कहा कि विजय तीन घंटे देर से पहुंचे थे। लोग सुबह से ही उनका इंतजार कर रहे थे। पुलिस ने दावा किया कि TVK ने 10,000 लोगों की अनुमति ली थी, लेकिन भीड़ बढ़कर लगभग 25,000 तक पहुंच गई।

इसके अलावा, पार्टी द्वारा पर्याप्त इंतज़ाम - जैसे कि पीने का पानी और भीड़ नियंत्रित करने के उपाय - नहीं किए गए थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने आयोजकों को विजय के विशेष डिज़ाइन वाले प्रचार बस को निर्धारित स्थल से 50 मीटर पहले रोकने की सलाह दी थी, लेकिन आयोजक अड़े रहे। इसके चलते लोग अधीर हो गए और भगदड़ की स्थिति बनी।

अब तक क्या कार्रवाई हुई?

करूर टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में TVK के करूर (नॉर्थ) जिला सचिव मधियाझगन, महासचिव बुसी आनंद, और संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (हत्या का प्रयास) और 125 (दूसरों की जान को खतरे में डालना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

TVK के वकील एस. अरिवाझगन ने आरोप लगाया कि यह घटना राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने न्यायालय से कोर्ट-निगरानी वाली जांच या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम जल्दबाजी में किए गए और कई शवों की सही पहचान तक नहीं की गई।

मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई

विजय और उनकी पार्टी ने इस घटना की जांच CBI या SIT से कराने की अपील मदुरै बेंच के मद्रास हाईकोर्ट में की है। साथ ही, एक अन्य याचिका में मांग की गई कि जांच पूरी होने तक TVK को किसी भी तरह की रैली या जनसभा करने से रोका जाए। वहीं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और घायलों को ₹1 लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की। वहीं विजय ने अपनी ओर से पीड़ित परिवारों को ₹20 लाख और घायलों को ₹2 लाख देने की बात कही।

Karur Stampede हादसे पर नेताओं की आरोपों की राजनीति शुरू

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने करूर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और कहा, "इतिहास में कभी भी किसी राजनीतिक कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में मौतें नहीं हुईं। ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं होनी चाहिए।"

भाजपा नेता चालावडी नारायणस्वामी ने कहा कि यह हादसा सरकार और विजय - दोनों की असफलता का नतीजा है। कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "स्टांपीड्स की जिम्मेदारी नेताओं पर होती है। आज सवाल-जवाब का दिन नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने का समय है।"

राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में आयोग गठित कर दिया है, जिसने सोमवार से अपनी जांच शुरू कर दी। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में -18 महिलाएँ, 13 पुरुष,5 बच्चियाँ,5 बच्चे शामिल हैं। इनमें से 34 लोग करूर जिले के रहने वाले थे, जबकि अन्य इरोड, तिरुप्पुर, डिंडीगुल और सलेम से थे।

हादसों से सबक लेने की सख्त जरूरत

साल 2025 में कुंभ मेला, दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ लेकर RCB वीनिंग परेड भगदड़ ने देश को झकझोर कर रख दिया। इसके बावजूद सरकार, पुलिस प्रशासन औऱ आयोजकों की लापरवाही के नतीजें ने 41 लोगों की जिंदगी छीन ली।

करूर की यह त्रासदी केवल एक प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की लापरवाही का नतीजा मानी जा रही है। अदालत से लेकर सियासी गलियारों तक जिम्मेदारी तय करने की बहस शुरू हो चुकी है। अब सबकी निगाहें न्यायिक आयोग और हाईकोर्ट की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि दोषियों पर कब और कैसी कार्रवाई होगी।

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