Karnataka Politics: कर्नाटक में पावर-शेयरिंग पर सस्पेंस कायम, चर्चाओं के बीच डीके शिवकुमार ने तोड़ी चुप्पी
Karnataka Power Sharing: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रहे सियासी सस्पेंस के बीच बड़ा बयान सामने आया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हटाने या खुद को सीएम पद पर बैठाने को लेकर किसी भी वरिष्ठ नेता से कोई बात नहीं की है।
27 नवंबर को मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि वह "किसी भी चीज़ की जल्दबाज़ी में नहीं हैं" और मुंबई दौरे में उनकी किसी शीर्ष नेता से मुलाकात की खबरें पूरी तरह गलत हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कभी इस तरह की चर्चा होगी, तो वह बेंगलुरु या दिल्ली में ही होगी, मुंबई में नहीं। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस सरकार में पावर-ट्रांसफर की चर्चा ने फिर जोर पकड़ लिया है।
शिवकुमार बनाम सिद्धारमैया: सत्ता की शुरू हुई खींचतान?
कांग्रेस के भीतर यह चर्चा लंबे समय से है कि 2023 में सरकार बनने के दौरान सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित "पावर-शेयरिंग समझौता" हुआ था - जिसके तहत ढाई साल बाद सत्ता परिवर्तन होना था। हालांकि शिवकुमार कभी-कभार इस "सीक्रेट डील" का संकेत देते रहे हैं, लेकिन हाल में उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ 5-6 शीर्ष नेताओं तक सीमित है और इसे सार्वजनिक करना पार्टी को कमजोर कर सकता है।
'शब्दों की जंग' ने बढ़ाई सियासी गर्मी
बीते दिनों दोनों शीर्ष नेताओं के बीच टकराव का संकेत कई बयानों में दिखा। डीके शिवकुमार ने एक पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखा-Word power is world power.जिसे हाईकमान पर दबाव बनाने की राजनीतिक चाल माना गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी एक बयान दिया जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने शिवकुमार के प्रति एक "पलटवार" के रूप में देखा।
इसी बीच गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने संकेत दिया कि वह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं, खासतौर पर तब जब कई दलित संगठनों ने एक दलित मुख्यमंत्री की मांग उठाई है। इससे सत्ता समीकरण और पेचीदा हो गए हैं।
कांग्रेस हाईकमान करेगा फैसला
स्थानीय राजनीति में बढ़ते तनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व अब सीधे हस्तक्षेप की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सीएम सिद्धारमैया और शिवकुमार-को दिल्ली बुलाकर नेतृत्व विवाद पर अंतिम फैसला लेने की तैयारी कर रहे हैं।
फिलहाल कर्नाटक की सत्ता का समीकरण अभी भी स्पष्ट नहीं है। शिवकुमार कहते हैं कि वह "लॉन्ग गेम" खेल रहे हैं, सिद्धारमैया समर्थक दावा करते हैं कि सीएम पद में कोई बदलाव नहीं होगा। जबकि कांग्रेस हाईकमान आने वाले दिनों में निर्णायक कदम उठा सकता है।












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