कर्नाटक में लोकल रिजर्वेशन से कैसे बर्बाद हो जाएगा रियल एस्टेट सेक्टर? एक्सपर्ट ने दिखाई भयावह तस्वीर
Karnataka Job Quota Bill: कर्नाटक में अगर प्राइवेट कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में आरक्षण देने वाला विधेयक लागू हुआ तो सिर्फ आईटी और टेक सेक्टर ही तबाह नहीं होंगे, एक्सपर्ट बता रहे हैं कि रियल एस्टेट भी तबाह हो जाएगा।
एचटी डॉट कॉम ने रियल एस्टेट सेक्टर के कई एक्सपर्ट से बात के बाद जो रिपोर्ट दी है, वह चौंकाने वाला और पूरे इकोसिस्टम के कान खड़े कर देने वाला है।

रियल एस्टेट पर कहर बरपा सकता है कर्नाटक सरकार का विवादित कानून
रियल एस्टेट सेक्टर के जानकार बताते हैं कि बेंगलुरु आज इस क्षेत्र में देश के टॉप तीन बाजारों में से है। लेकिन,कांग्रेस सरकार के विवादास्पद कर्नाटक स्टेट एम्पलॉयमेंट ऑफ लोकल इंडस्ट्रीज फैक्ट्रीज एस्टैबलिश्मेंट बिल, 2024 कहर ढा सकता है।
इसमें मैनेजमेंट स्तर की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 50% और नॉन-मैनेजमेंट स्तर की नौकरियों में 75% जॉब स्थानीयों लोगों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।
प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले 50% से ज्यादा दूसरे राज्यों के- एक्सपर्ट
इंडस्ट्री के एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे शुरुआती स्तर पर राज्य में नौकरियों की संख्या में भारी गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर रियल एस्टेट मार्केट पर पड़ेगा। नेशनल रियल एक्सेट डेवलपमेंट काउंसिल के कर्नाटक चैप्टर के चेयरमैन सतीश कुमार कहते हैं, 'मौजूदा कंपनियां निकल जाएंगी और कई दूसरे राज्यों में उद्यम लगाने की सोचेंगी।'
'ऑफिस स्पेस की डिमांड करने वालों में करीब 80% विदेशी मूल की कंपनी'
वे कहते हैं कि दूसरे राज्यों से जो मध्य और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारी कर्नाटक आते हैं, उनमें से 50% से ज्यादा यहां प्रॉपर्टी मार्केट में निवेश करते हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी कोलियर्स के मुताबिक इस साल (2024 में) जनवरी से जून की अवधि में बेंगलुरु में ए ग्रेड के ऑफिस स्पेस की डिमांड करने वालों में करीब 80% विदेशी मूल की कंपनी रही हैं।
आधे से घर तो कर्नाटक के बाहर के लोग खरीदते हैं- एक्सपर्ट
इसी तरह टीजी डेवलपर्स में सेल्स मैनेजर शिवम पाठक कहते हैं, 'इस समय हम जो घर बेचते हैं, उनमें से 10 में से 5 दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी लेते हैं।' उनका कहना है कि इनमें से अधिकतर खरीदार आईटी सेक्टर में कर्मचारी हैं।
बेंगलुरु की बढ़ती रफ्तार को थामने वाला है कानून!
देश में अभी कॉमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में बेंगलुरु का बोलबाला है। यहां 223 मिलियन वर्ग फीट ऑफिस स्पेस है। सीआईआई और सीबीआरई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस रफ्तार से यह सेक्टर देश के सिलिकॉन वैली में बढ़ रहा है, 2030 तक इसके 330 से 340 वर्ग फीट तक पहुंच जाने की संभावना है।
बेंगलुरु में ठप पड़ सकता है कंस्ट्रक्शन का काम!
एक्सपर्ट यह भी आशंका जता रहे हैं कि इस बिल के कानून बनने के बाद यहां मजदूरों की भी भारी किल्लत हो सकती है, जो समय-समय पर नजर आता रहा है। यह रियल एस्टेट के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकती है।
सतीश कुमार के अनुसार, 'करीब 80% कंस्ट्रक्शन वर्कर राज्य से बाहर से आते हैं, मुख्य रूप से बिहार, ओडिशा और झारखंड जैसे क्षेत्रों से।' इन मजदूरों पर राज्य कितना निर्भर है, यह दशहरा और छठ पूजा के दौरान इनकी किल्लतों को देखकर महसूस किया जा सकता है।
रेंट बिजनेस भी हो जाएगा चौपट- एक्सपर्ट
पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु रेंटल मार्केट में भी एक तरह से लीडर बनकर उभरने लगा गया है। इस कानून की वजह से इसको भी बड़ा धक्का लग सकता है। अग्रवाल एस्टेट्स में ब्रांड पार्टनर पूजा अग्रवाल कहती हैं, 'ईस्ट बेंगलुरु में करीब 30-40% किराएदार वे हैं, जो दूसरे राज्यों से आते हैं और कर्नाटक में 15 साल से कम समय से रह रहे हैं।'












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