हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट में तुर्की और दक्षिण अफ्रीका की अदालतों के फैसलों का हुआ जिक्र, आज फिर सुनवाई

बेंगलुरु, फरवरी 16। कर्नाटक से उपजे हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में आज भी सुनवाई जारी रहने वाली है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट कोई फैसला नहीं कर पाया, इसलिए बुधवार को भी ये सुनवाई जारी रहेगी। आपको बता दें कि मंगलवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील की ओर से कोर्ट में धार्मिक प्रतीकों के मामले में कई विदेशी अदालतों के फैसलों का जिक्र किया गया। इसमें दक्षिण अफ्रीका और तुर्की का जिक्र प्रमुख है। कुंडापुरा कॉलेज के मुस्लिम छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता देवदत्त कामत ने तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों का जिक्र कोर्ट में किया।

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    Karnataka high court Hijab row

    वकील ने दक्षिण अफ्रीका की अदालत के फैसले का दिया हवाला

    हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने दक्षिण अफ्रीका की अदालत के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि 2004 में डरबन की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई यूनिफॉर्म से संबंधित छूट मांग रहा है तो राज्य और स्कूल का ये कर्तव्य बनता है कि उस अनुरोध को लागू करे ना कि दंडित करे। देवदत्त कामत ने 2004 के सुनाली पिल्ले और डरबन गर्ल्स हाई स्कूल मामले का हवाला दिया। कामत ने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि धर्म और संस्कृति का सार्वजनिक प्रदर्शन विविधता का एक उत्सव है जो हमारे स्कूलों को समृद्ध करता है।

    मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ

    वकील ने दक्षिण अफ्रीका की अदालत के फैसले का दिया हवाला

    हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने दक्षिण अफ्रीका की अदालत के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि 2004 में डरबन की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई यूनिफॉर्म से संबंधित छूट मांग रहा है तो राज्य और स्कूल का ये कर्तव्य बनता है कि उस अनुरोध को लागू करे ना कि दंडित करे। देवदत्त कामत ने 2004 के सुनाली पिल्ले और डरबन गर्ल्स हाई स्कूल मामले का हवाला दिया। कामत ने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि धर्म और संस्कृति का सार्वजनिक प्रदर्शन विविधता का एक उत्सव है जो हमारे स्कूलों को समृद्ध करता है।

    क्या मामला है दक्षिण अफ्रीका का?

    आपको बता दें कि 2004 में एक भारतीय हिंदू लड़की को एक स्कूल में नोज रिंग पहनने से रोका गया था। स्कूल का कहना था कि लड़कियों को नाक में ज्वैलरी पहनने की परमिशन नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह स्कूल में कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करती है। आचार संहिता में हस्तक्षेप करेगा। हालांकि, उसने दावा किया कि वह इसे दो साल से अधिक समय से पहन रही थी और यह उसका संवैधानिक अधिकार था। ये मामला जब कोर्ट में गया तो कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नोज रिंग सुनाली के धर्मी या संस्कृति का अनिवार्य कॉन्सेप्ट नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि नोज रिंग भारतीय तमिल संस्कृति की एक पहचान है और छात्रा को अपनी संस्कृति को अपनाना एक स्वैच्छिक अभिव्यक्ति है।

    याचिकाकर्ता ने 'हेकलर वीटो' सिद्धांत का किया जिक्र

    इसके अलावा याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हमारा संविधान सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता का पालन करता है न कि तुर्की की तरह जो कि नकारात्मक धर्मनिरपेक्षता का पालन करता है। उन्होंने कहा कि हमारी धर्मनिरपेक्षता सभी लोगों के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। अधिवक्ता कामत ने सुनवाई के दौरान हेकलर वीटो सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुनाया गया सरकारी आदेश 'हेकलर वीटो' के समान है और इस मामले में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। कामत ने अपनी दलील जारी रखते हुए कहा कि कोई राज्य मुझे सड़क पर बाहर जाने से सिर्फ इसलिए नहीं रोक सकता क्योंकि कोई उन्हें पसंद नहीं करता है। कामत ने कहा कि हेकलर वीटो के जरिए मौलिक अधिकारों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है।

    याचिकाकर्ता की इन तमाम दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाज़ी की तीन सदस्यों की बेंच ने तय किया कि आगे की सुनवाई बुधवार को होगी। ऐसे में आज दोपहर बाद ये सुनवाई शुरू होने की संभावना है। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने तब तक कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगा दी है, जब तक कि ये मामला कोर्ट में है।

    आपको बता दें कि हिजाब विवाद के एक और घटनाक्रम में कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को बेंगलुरु और तुमकुर समेत 9 जिलों के स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद ये विवाद और गहरा गया है।

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