कर्नाटक में पहली बार मेट्रो से हुआ लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ऑर्गन ट्रांसपोर्ट, बेंगलुरु में कैसे हुआ मिशन पूरा
बेंगलुरु में इतिहास रचते हुए पहली बार कर्नाटक में किसी मानव अंग को मेट्रो रेल के जरिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाया गया। यह अनोखा और जिंदगी बचाने वाला मिशन वैदेही अस्पताल (Vydehi Hospital) से स्पर्श अस्पताल (SPARSH Hospital), आरआर नगर (RR Nagar) तक किया गया।
इस मिशन में एक लिवर (यकृत) को बेहद कम समय में ट्रांसपोर्ट किया गया, ताकि मरीज को समय पर ट्रांसप्लांट मिल सके। आमतौर पर बेंगलुरु शहर की ट्रैफिक समस्या ऑर्गन ट्रांसपोर्ट में बड़ी बाधा बनती है, लेकिन इस बार मेट्रो को चुना गया, जिससे न सिर्फ समय बचा बल्कि यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।

कैसे हुआ यह 'ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो मिशन'?
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन के लिए बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (BMRCL), स्वास्थ्य विभाग, और बेंगलुरु पुलिस ने मिलकर एक विशेष योजना बनाई। मेट्रो को बिना रुके (non-stop passage) चलने दिया गया - यानी मेट्रो के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि अंग (ऑर्गन) समय पर अस्पताल पहुंच सके। नम्मा मेट्रो के अधिकारियों ने पुष्टि की कि ट्रेन को बिना रुके यात्रा की अनुमति दी गई है।
स्पर्श अस्पताल, जो लिवर ट्रांसप्लांट के लिए जाना जाता है, ने इस अनोखे प्रयास को लेकर गर्व जताते हुए कहा- "कर्नाटक में पहली बार मानव ऑर्गन को मेट्रो के जरिए ट्रांसपोर्ट किया गया। वायदेही से स्पर्श तक इस जीवनरक्षक प्रयास में हम अपनी टीम की अद्भुत तालमेल पर गर्व महसूस करते हैं।"
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जब सिस्टम मिलकर काम करे, तो तकनीक और समर्पण के जरिए इंसानी जान बचाने के लिए समय और दूरी को मात दी जा सकती है।












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