कर्नाटक में जंगल में रहने वालों को मिलेगा PDP सर्टिफिकेट, इससे कैसे हजारों परिवारों को मिलेगी सरकारी नौकरी?
Karnataka News: कर्नाटक में मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए राज्य के वन विभाग ने एक निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया है। इससे संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को दूसरी जगहों पर स्थांतरित करना आसान हो जाएगा और उनका भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
कर्नाटक वन विभाग संरक्षित वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले निवासियों को प्रोजेक्ट डिस्प्लेस्ड पर्सन्स (PDP) सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाने जा रहा है। इससे ऐसे लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा, साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का भी उन्हें फायदा मिलेगा।

इंसान-पुश संघर्षों को कम करने की बड़ी पहल
दरअसल, वन विभाग कम से इन कोशिशों में लगा है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वहां से दूर हटाया जाए, ताकि बढ़ते इंसान-पुश संघर्षों का आसान समाधान मिल सके।
क्योंकि, यह समस्या राज्य सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है और आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं, जिसमें लोगों के साथ-साथ जंगली जानवरों के जीवन को भी खतरा बना रहता है।
कर्नाटक सरकार को भेजा गया प्रस्ताव
कर्नाटक के वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री ईश्वर खांड्रे ने स्वेच्छा से स्थांतरित होने वाले परिवारों को यह सर्टिफिकेट देने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर उसे अंतिम मुहर लगाने के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है।
दरअसल, ऐसे परिवार लंबे समय से वन क्षेत्र छोड़ने के बाद अपनी आजीविका को लेकर चिंतित रहे हैं। क्योंकि, वे खेती और पशु पालन पर ही निर्भर हैं और उचित रोजगार के लिए उनके पास पर्याप्त कौशल का अभाव है।
पीडीपी सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरियों में मिलेगा आरक्षण
माना जा रहा है कि वन विभाग का प्रस्ताव, जिसके तहत उन्हें पीडीपी सर्टिफिकेट दिया जाना, उनके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। क्योंकि, अब सरकारी नौकरियों में उन्हें आरक्षण में प्राथमिकता मिलेगी और अनेकों सरकारी योजनाओं का भी लाभ सुनिश्चित होगा।
किन लोगों को दिया जाएगा पीडीपी सर्टिफिकेट?
एक वरिष्ठ वन अधिकारी के मुताबिक, 'हम सिर्फ उन्हीं परिवारों को शामिल करेंगे जो स्वेच्छा से टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सैंचुरीज से स्थानांतरित होने की इच्छा जताएंगे......'
खांड्रे ने बताया है कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इस तरह के प्रस्ताव पर पहले से ही अमल हो रहा है और उसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'यह जंगलों से स्थानांतरित होने वाले परिवारों को सिर्फ सशक्त नहीं बनाएगा, क्योंकि उन्हें सरकारी नौकरियां मिलेंगी, बल्कि यह पूरे राज्य में इंसान-पशु संघर्ष को कम करने में भी मदद करेगा।'












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