Karnataka Chunav result: 2.60 लाख से ज्यादा वोटरों ने NOTA दबाया, कई राष्ट्रीय दलों से भी ज्यादा वोट मिले
Karnataka Chunav result 2023: कर्नाटक चुनाव में भी ढाई लाख से ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना है। यह इतने वोट हैं, जितना ला पाने में कई राष्ट्रीय पार्टियां भी तरस गईं।

Karnataka Chunav NOTA result 2023: कर्नाटक चुनाव में कुछ राष्ट्रीय दलों को जितने वोट मिले हैं, उससे ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। अंग्रेजी के NOTA विकल्प का मतलब है कि 'इनमें से कोई नहीं'। राज्य में दो लाख 60 हजार से भी ज्यादा वोट इस विकल्प के खाते में गया है।
कई राष्ट्रीय दलों से ज्यादा मिले नोटा को वोट
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ें देखें तो शाम सवा सात बजे तक नोटा को कर्नाटक में पड़े कुल मतों का 0.69% मत मिला। जबकि, कुछ राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां भी इतने वोट नहीं ला पाए। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर नोटा का विकल्प 2013 से शुरू किया गया था।
बसपा से भी नोटा को ज्यादा वोट
अगर चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन राष्ट्रीय दलों को नोटा को मिल वोट से कम मिले। जैसे सीपीएम सिर्फ 0.06% वोट ही जुटा सकी थी। वहीं यूपी जैसे सबसे बड़े राज्य में सत्ता में रह चुकी बीएसपी को नोटा से आधे से भी कम वोट मिले।
कर्नाटक में बसपा को मात्र 0.31% वोट से संतोष करना पड़ा। वहीं दिल्ली और पंजाब में बहुत भारी बहुमत से सत्ता में बैठी आम आदमी पार्टी को भी कर्नाटक में निराशा झेलनी पड़ी। पार्टी को राज्य में महज 0.58% वोट मिले हैं, जो कि नोटा से भी कम है।
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पहले वोटरों के पास नोटा का ऐसा विकल्प नहीं था
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदाताओं को नोटा विकल्प देने का आदेश दिया था। इससे पहले जो मतदाता किसी उम्मीदवार को वोट नहीं डालना चाहते थे, वह कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के रूल 49-O के तहत अपने इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकते थे।
नोटा से गोपनीयता रहती है सुरक्षित
लेकिन, इसमें दिक्कत यह थी कि मतदाताओं के मताधिकार की गोपनीयता का उल्लंघन हो सकता था। इस वजह से वे उस विकल्प को चुनने से कतराते थे। नोटा विकल्प चुनकर वोटर अपने मताधिकार की गोपनीयता का अधिकार सुरक्षित रख सकते हैं।
कांग्रेस और भाजपा के वोट शेयर में बड़ा फासला
हालांकि, यदि नोटा को मिले वोट ज्यादा हो जाएं तो चुनाव आयोग को नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश देने से सुप्रीम कोर्ट इनकार कर चुका है। इस बार के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करीब 43 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं बीजेपी लगभग 36 फीसदी वोट प्राप्त हुए हैं। जबकि, जेडीएस का वोट शेयर 13 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया है। बाकी दलों का प्रदर्शन काफी फीका रहा है।












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