कर्नाटक चुनाव: सिद्धारमैया ने जीत के लिए चले ये 5 बड़े दांव, क्या अमित शाह निकाल पाएंगे तोड़?
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने आज कर्नाटक में विधानसभा चुनावों की तारीखों को ऐलान कर दिया। कर्नाटक में 12 मई को मतदान होगा जबकि 15 मई को वोटों की गिनती होगी। कर्नाटक में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है और इस सरकार की अगुआई सिद्धारमैया कर रहे हैं। दक्षिण भारत के चारों राज्यों से गायब हो चुकी भाजपा ने कर्नाटक को जीतने के लिए अभी से पूरी तरह ताकत झोंकनी शुरू कर दी है लेकिन भाजपा के लिए इस बार जीत चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। इसके पीछे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा चले गए ये 5 बड़े दांव है।

1. लिंगायत कार्ड
कर्नाटक में लिंगायत समुदाय सबसे राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली माना जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की करीबन 17 फीसदी है। अभी तक इस समुदाया का झुकाव भाजपा की तरह माना जाता है क्योंकि भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के चेहरे के रुप में पेश किए यदुरप्पा इसी सुमदाय से आते है। लेकिन इस बार चुनाव से ठीक पहले सिद्धारमैया ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का ऐलान कर दिया है। दरअसल, लिंगायत सुमदाय का एक धड़ा लंबे समय से इसे समुदाय को हिंदू धर्म से अलग धर्म घोषित करने की मांग करता आ रहा है। ऐसे में सिद्धारमैया ने इस मांग को पूरी कर लिंगायत समुदाय के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर दी है जिसका भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

2. हिंदी भाषा के ऊपर कन्नड़ को प्राथमिकता
दक्षिण भारत राज्यों को हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावे को अक्सर भाषीय अस्मिता के खतरे के रूप में देखा जाता है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जब हिंदी भाषा को बढ़ावा देने की घोषणा की उसके बाद कर्नाटक के कई रेलवे स्टेशनों पर हिंदी भाषा में नाम लिखे गए। कई जगह ये नाम कन्नड़ में लिखे नाम को मिटाकर लिखे गए जिसके पूरे राज्य में काफी विरोध हुआ। सिद्धारमैया ने भी इसे कन्नड़ भाषा पर हमला बता कर बेंगलूरू मेट्रो में हिंदी भाषा में लगे सभी साइनबोर्ड को हटाने का ऐलान किया। साथ ही कन्नड़ भाषा को राज्य की प्रथम भाषा बनाए रखने के लिए भी सिद्धारमैया ने काफी प्रयास किए हैं।

3. कर्नाटक के लिए अलग झंडा
क्षेत्रियता के ही मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए सिद्धारमैया ने कर्नाटक राज्य के लिए एक अलग झंडे के प्रस्ताव को पास किया। अब इसे केंद्र सरकार की अनुमति देती है जिसपर अभी तक केंद्र ने कोई फैसला नहीं लिया है। सिद्धारमैया झंडे के प्रस्ताव को अनुमति नहीं देने के लिए भाजपा को दोषी ठहरा रहे हैं। साफ है कि जिस तरह भाजपा ने गुजरात चुनाव गुजराती अस्मिता को मुद्दा बनाया था उसी तरह अब सिद्धारमैया कन्नड़ अस्मिता को मुद्दा बना रहे हैं और अभी तक इन सभी मुद्दो पर भाजपा बैकफुट पर है।

4. छात्रों को मुफ्त लैपटॉप
साल 2012 में यूपी ने सपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इस जीत के पीछे सपा के उस चुनावी वादे को वजह बताया गया था जिसमें उसने सत्ता में आने पर सभी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने का ऐलान किया था। अब यही वादा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया है। चुनाव से ठीक पहले अपने आखिरी बजट को पेश करते हुए सिद्धारमैया ने ऐलान किया कि वे इंजिनियरिंग, मेडिकल, पॉलिटेक्निक और फर्स्ट ग्रेड कॉलेजों में प्रथम वर्ष छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देंगे।

किसानों की कर्जमाफी
5. किसानों की कर्जमाफी हमेशा से अहम मुद्दा रही है। यूपी में भाजपा ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। सिद्धारमैया ने इस नब्ज को समझते हुए चुनाव से पहले ही किसानों की मर्जमाफी का ऐलान कर दिया है। सिद्धारमैया ने राज्य के सभी किसानों के 50 हजार रुपये तक के कर्ज को माफ करने का ऐलान किया है। सिद्धारमैया के इन दांवो के देखता हुए ये कहा जा सकता है कि भाजपा के लिए कांग्रस के कर्नाटक किला को फतह करना इतना आसान नहीं होगा।
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