Karnataka Election: इस बार समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे डीके शिवकुमार, बढ़ा सकते हैं आला कमान की मुश्किल
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की जीत के अहम नायक रहे डीके शिवकुमार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं। ऐसे में देखने वाली बात है कि कांग्रेस का आला कमान किसी सीएम पद की कुर्सी सौंपता है।

Karnataka Election: कर्नाटक में प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती विधायक दल के नेता का ऐलान करना है। हालांकि नवनिर्वाचित विधायकों ने इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपी है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि सबकुछ खड़गे के हाथ में नहीं है।
पार्टी के भीतर डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच सीएम पद को लेकर रस्साकस्सी चल रही है। इस बीच डीके शिवकुमार ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि वह इस बार मुख्यमंत्री पद से समझौता नहीं करेंगे।
रविवार को टुमकूर स्थित लिंगायत अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्थल सिद्दागंगा मठ का दर्शन करने के बाद डीके ने कहा कि मैंने कई बार पार्टी के लिए बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि मेरे और सिद्धारमैया के बीच मतभेद है, लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि हमारे बीच कोई मनभेद नहीं है।
डीके ने कहा कि कई बार मैंने पार्टी के लिए बलिदान दिया है, सिद्धारमैया जी के साथ खड़ा रहा हूं। मैंने सिद्धारमैया का पूरा सहयोग किया है। कांग्रेस की कर्नाटक में जीत के बाद डीके ने संकेत दिए हैं कि वह सीएम की रेस में बने हैं, उन्होंने कहा कि मैं हमेशा सबको साथ लेकर चला और कभी कुछ खुद के लिए नहीं मांगा।
डीके शिवकुमार ने इस बात से भी इनकार किया है कि उनका सिद्धारमैया के साथ कोई टकराव है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विधायक कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री का फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने खुद के लिए कुछ भी गलत नहीं किया, जो भी किया पार्टी के लिए किया, मैंने जो कुछ कष्ट झेले, पार्टी के लिए झेले।
कर्नाटक में जीत के बाद डीके ने कहा कि मैंने दिन-रात मेहनत की, हर किसी को साथ लेकर चला। हर कोई कह रहा था कि मेरे और सिद्धारमैया के बीच तनाव है, लेकिन मैं बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि एक रत्ती भर भी मेरा उनसे विवाद नहीं है। मैंने किसी को कोई मौका नहीं दिया। मैंने खुद को जमीन पर रखा।
बता दें कि कांग्रेस ने कर्नाटक में विधानसभा की 224 में से 135 सीटों पर जीत दर्ज कीहै, जबकि भाजपा 66 सीटों पर सिमट गई। कर्नाटक में जीत के बाद कांग्रेस पार्टी के हौसले बुलंद हैं।












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