'टीपू वंश को भगाओ, वोट फॉर राम एंड हनुमान', कर्नाटक भाजपा अध्‍यक्ष ने फिर दिया ये विवादित बयान

कर्नाटक भाजपा प्रमुख नलिन कुमार कतील ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिससे विवाद हो सकता है। कतील ने अबकी बार कहा कि टीपू के वंशजों को भगाना होगा और भगवान राम और हनुमान के भक्‍तों को वोट दें।

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने जनता के बीच जाकर प्रचार करना शुरू कर दिया है। वहीं विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक भाजपा प्रमुख नलिन कुमार कतील ने मंगलवार को यह दावा कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। पहले कर्नाटक चुनाक को टीपू बनाम सावरकर बताने वाले भाजपा प्रमुख ने इस बार कहा से चुनावी मुकाबला टीपू सुल्तान के वंशजों और राम और हनुमान के भक्तों के बीच है।

हम टीपू वंशज नहीं हैं

कोप्पल जिले के येलाबुर्गा में राज्य भाजपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव का फैसला ऐसा होना चाहिए कि टीपू समर्थकों को घर वापस भेज दिया जाए। भाजपा नेता ने कहा हम राम और हनुमान के भक्त हैं। हम हनुमान की पूजा करते हैं, हम हनुमान का विकास करते हैं, हम टीपू वंशज नहीं हैं, हम टीपू वंशजों को घर वापस भेजते हैं ।

क्‍या आप टीपू का भजन करने वाले लोगों को फॉलो करेंगे?

कतील ने आगे कहा लोगों को तय करना चाहिए कि क्या कर्नाटक को टीपू समर्थकों या राम और हनुमान के भक्तों की आवश्यकता है। उन्‍होंने कहा तो मैं येलबुर्गा के लोगों से पूछता हूं, क्या आप हनुमान की पूजा करते हैं या टीपू भजन करते हैं? तो क्या आप टीपू भजन करने वाले लोगों को फॉलो करेंगे? इसलिए आज संकल्प लें कि क्या इस राज्य को टीपू वंश या राम भक्तों और हनुमान भक्तों की आवश्यकता है।

टीपू से प्यार करने वाले लोगों को यहां नहीं रहना चाहिए

कतील ने यह भी कहा कि जो लोग मैसूर के पूर्व शासक को मानते हैं उन्हें यहां नहीं रहना चाहिए। भूमि उन लोगों के लिए है जो इसके बजाय भगवान राम और हनुमान का अनुसरण करते हैं। उन्‍होंने कहा मैं हनुमान की भूमि पर चुनौती देता हूं, टीपू से प्यार करने वाले लोगों को यहां नहीं रहना चाहिए, जो लोग राम भजन करते हैं और हनुमान को मनाते हैं, उन्हें यहां रहना चाहिए।

ये चुनाव टीपू बनाम सावरकर की विचारधाराओं के बीच है

याद रहे अभी कुछ ही दिन पहले कतील ने शिवमोग्गा में कहा था कर्नाटक विधानसभा चुनाव को टीपू बनाम सावरकर के बीच होने की बात कही थी। इस बार राज्य विधानसभा चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं, बल्कि सावरकर और टीपू की विचारधाराओं के बीच लड़ा जाएगा।

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