Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध में कितने रुपये हुए थे खर्च? किस राज्य के सबसे अधिक जवान हुए थे शहीद
Kargil Vijay Diwas 2025: 26 जुलाई 2025 को कारगिल युद्ध को 26 साल पूरे हो गए हैं। ये ही वो दिन था जब भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान के झक्के झुड़ाए थे और कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। सर्दी के मौसम का फायदा उठाकर आतंकियों के साथ मिलकर पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ कर कारगिल की बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था।
जिसके कारण भारत को अपनी ही सीमा के भीतर युद्ध का सामना करना पड़ा। भारतीय सेना ने उन्हें खदेड़ने के लिए 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया और 26 जुलाई 1999 को भारत ने विजय प्राप्त कर कारगिल की हर चोटी पर तिरंगा फहराया था। इस युद्ध में भारतीय सेना ने ना केवल आतंकवादियों को खत्म किया, बल्कि पाकिस्तान को भी उसकी नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए बरबाद कर दिया था।

लगभग 84 दिन चले तनाव और युद्ध संघर्ष में भारत को जीत दिलाने में 527 जवानों में अपने प्राण न्यौछावर किए थे। इस युद्ध में भारतीय सेना के जवानों की ताकत पूरी दुनिया ने देखी थी। हालांकि इस युद्ध संघर्ष में भारत को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। जानते हैं भारत के किस राज्य के सबसे अधिक जवान शहीद हुए थे और कारगिल युद्ध में भारत और पाकिस्तान के कितने रुपये खर्च हुए थे?
कारगिल युद्ध में किस राज्य के सबसे अधिक जवान हुए थे शहीद?
कारगिल संघर्ष में भारत के 527 जवान शहीद हुए थे। इनमें सबसे अधिक उत्तराखंड के सैनिक थे। उत्तराखंड के हर जिले ने अपने वीर बेटों को खोया, जिनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस युद्ध में उत्तराखंड के 75 सैनिक शहीद हुए थे। गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट के जवान थे।अकेले गढ़वाल राइफल्स के 47 जवान और कुमाऊं रेजिमेंट के 16 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद, हिमाचल प्रदेश ने सबसे ज्यादा बलिदान दिया, जिसके 52 सैनिक युद्ध में शहीद हुए। कैप्टन विक्रम बत्रा (मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित) और राइफलमैन संजय कुमार (जीवित रहते हुए परमवीर चक्र से सम्मानित) जैसे वीर सैनिक हिमाचल प्रदेश से ही थे।
कारगिल युद्ध पर भारत के कितने रुपये खर्च हुए थे?
कारगिल संघर्ष में सैन्य संसाधनों का भारी उपयोग हुआ। कारगिल युद्ध भारत के लिए एक आर्थिक चुनौती भी था। अनुमान बताते हैं कि भारत ने इस युद्ध में लगभग 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए। इंडियन एयर फोर्स ने अकेले 300 से अधिक हवाई हमले किए, जिन पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च हुए। जमीनी अभियानों के हर दिन का खर्च लगभग 10 से 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान भारत को प्रतिदिन 1,460 करोड़ रुपये तक का खर्च उठाना पड़े थे।
पाकिस्तान के कितने रुपये खर्च हुए थे?
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान इस युद्ध को लंबी अवधि तक जारी रखने की स्थिति में नहीं था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान का प्रतिदिन का युद्ध खर्च लगभग 370 करोड़ रुपये था, जो भारत की तुलना में कम था, लेकिन इसका उसकी अर्थव्यवस्था पर अधिक गंभीर प्रभाव पड़ा। अंतरराष्ट्रीय दबाव, सैन्य कमजोरियों और आर्थिक संकट के कारण पाकिस्तान पीछे हटने को मजबूर हो गया था।
26 साल बाद पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किए ऑपरेशन सिंदूर में भारत का रोज़ाना खर्च कितना था
कारगिल युद्ध के 26 साल बादपाकिस्तान और भारतीय सेना के बीच युद्ध संषर्ष हुआ। 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश कोहिलाकर रख दिया था। इसके जवाब में, 6-7 मई, 2025 की रात को भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया, जिसमें भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने मिलकर पाक अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में स्थित कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया।
इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के कई शीर्ष कमांडर मारे गए। लगातारचार दिन भारत की जवाबी सैन्य कार्रवाई के सामने पाकिस्तान ने हथियार डाल दिए और पाकिस्तान ने 10 मई, 2025 की शाम 5 बजे युद्धविराम की घोषणा कर दी।
ऑपरेशन सिंदूर' एक सीमित कार्रवाई थी, इसलिए भारत पर कितना आर्थिक बोझ पड़ा, इसका कोई सटीक अनुमान नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के फॉरेन अफेयर्स फोरम के एक अध्ययन के अनुसार, यदि भारत किसी नियमित युद्ध में उलझता है, तो उस पर प्रतिदिन लगभग 1460 करोड़ रुपये से लेकर 5000 करोड़ रुपये तक का आर्थिक भार पड़ सकता है।












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