कभी पीएम को ISI एजेंट बताने वाले कपिल मिश्रा हुए भाजपाई, विवादों से रहा है नाता
नई दिल्ली। 'आप' सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा शनिवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और भाजपा नेता विजय गोयल की उपस्थिति में सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा में शामिल होने से पहले कपिल मिश्रा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण ने उन्हें भाजपा में आने के लिए आकर्षित किया है।

क्या कहा था कपिल मिश्रा नें
कपिल मिश्रा ने कहा कि अब वह दिल्ली में 'नकारात्मकता की राजनीति' को समाप्त करने की दिशा में प्रयास करेंगे। हालांकि जब कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी में थे तब उन्हें भाजपा, मोदी और अमित शाह के सबसे मुखर आलोचकों में से एक माना जाता था। उनके बयान विवादस्पद रहे हैं, जिसपर काफी शोर-शराबा भी हुआ था। कपिल मिश्रा ने पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद पीएम मोदी को 'आईएसआई एजेंट' करार देने वाली टिप्पणी की थी जिससे काफी विवाद पैदा हुआ था।

भाजपा में शामिल होकर क्या होगी मिश्रा की प्रार्थमिकता
लेकिन अब जब उन्होंने भाजपा का दामन थम लिया है तो उन्होंने यह दोहराया है कि वह नरेंद्र मोदी और राष्ट्र के लिए उनके दृष्टिकोण से प्रभावित हैं। अब वह राष्ट्र के लिए काम करेंगें इसलिए उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। आगे उन्होंने यह भी कहा था कि उनका यह दृढ़ विश्वास है कि दिल्ली में नकारात्मकता खत्म होने का समय आ गया है, और दिल्ली को नरेंद्र मोदी के साथ चलना चाहिए। भाजपा में शामिल होने के बाद अब वह आम आदमी के उपेक्षित स्वयंसेवकों और अन्ना आंदोलन के कार्यकर्ताओं तक पहुंचेगें और आने वाले दिनों में उन सभी को भाजपा में शामिल करने का लक्ष्य रखेंगे।

विधायक के रूप में अयोग्य किये गए हैं मिश्रा
भाजपा में शामिल होने से पहले कपिल मिश्रा दलबदल विरोधी कानून के तहत एक विधायक के रूप में 'आम आदमी पार्टी' से अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं। 2 अगस्त को दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने आप पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई करने के बाद मिश्रा को सदन से अयोग्य घोषित करने का आदेश जारी किया था। भारद्वाज का तर्क था कि करावल नगर के पूर्व विधायक ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और पीएम मोदी के लिए प्रचार किया था। अध्यक्ष द्वारा की गई जांच में आरोपों को वैध पाया गया था। हालांकि, अयोग्यता के खिलाफ मिश्रा ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने कहा है कि वे अगले 10 दिनों में अदालत में एक जवाबी हलफनामा दायर करेंगे जिससे उनका रुख स्पष्ट हो जाएगा। आगे इस मामले में सुनवाई 4 सितंबर को होगी। वैसे एक समय में अरविन्द केजरीवाल के वफादार माने जाने वाले मिश्रा ने आम आदमी पार्टी में महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय विभागों को भी संभाला था।
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