नागरिकता संशोधन बिल पर आक्रमक हुए कन्हैया कुमार, बिल को बताया मोदी सरकार का जाल
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने नागरिकता संशोधन बिल पर नाराजगी जताई है। कन्हैया कुमार ने एक बार फिर से केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अक्सर मोदी सरकार के खिलाफ हमवावर रूख रखने वाले कन्हैया कुमार इस बिल को लेकर लगातार ट्वीट कर रहे हैं। कन्हैया ने बुधवार इस बिल को लेकर कई ट्वीट किए।

अपने ट्वीट के जरिए उन्होंने नागरिकता संशोधन बिल को मोदी सरकार का जाल बताया और कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा, बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नागरिकता संशोधन बिल ला रही है, ताकि लोग अपनी नागरिकता को साबित करने में उलझे रहे।
कन्हैया कुमार ने ट्वीट कर लिखा-"एक बच्चा भूख के मारे रो रहा था और अपने पापा से खाना माँग रहा था।पापा ने उसे अल्मारी के ऊपर बिठा दिया।अब बच्चा भूख भूलकर अल्मारी से नीचे उतरने के लिए रोने लगा।
खेल को समझिए।आपके बच्चों को शिक्षा-रोजगार चाहिए।ये लोग आप सबको अपनी नागरिकता सिद्ध करने के जाल में उलझा देना चाहते है।"
इससे पहले उन्होंने बुधवार सुबह भी दो ट्वीट किए थे। कन्हैया ने देश के भविष्य की चिंता जताते हुए लिखा कि यह 'राष्ट्रवादी' सरकार पब्लिक सेक्टर को चवन्नी-अठन्नी में बेच देगी। कन्हैया कुमार ने पहले ट्वीट में लिखा कि-"पिछले 5 साल आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक करवाने में निकाल दिए। ये 5 साल 'दादाजी के दादाजी का बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने में निकाल देंगे। इस बीच 'राष्ट्रवादी' सरकार पब्लिक सेक्टर को चवन्नी-अठन्नी में बेचकर ट्रेन टिकट से लेकर कॉलेज की डिग्री तक सब कुछ गरीबों की पहुंच से बाहर कर देगी।"
वहीं उन्होंने एक और ट्वीट किया और लिखा-"देश के सभी लोगों को डॉक्यूमेंट्स के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे। इस तमाशे के दौरान ONGC, BSNL, Air India, Railways सब बिक जाएगा। फिर प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस में 400 रुपए की जगह 4000 रुपए का टिकट खरीदा जाएगा और 10 लाख में डिग्री लेकर 10 हजार महीने में नौकरी करिएगा।"
वहीं नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करते हुए राजद नेता तेज प्रताप यादव ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला है। तेज प्रताप ने ट्वीट कर लिखा-हजार चुनाव जीतने से अच्छा है कि हम संविधान को हारने से बचा लें। संवैधानिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करना है, मेरे पिताजी के राजनैतिक पाठशाला में मुझे यही पढ़ाया गया है।"












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