कमलनाथ के लिए कोई भाजपा विधायक देगा इस्तीफा, एक तीर से दो निशाने साधने में लगी कांग्रेस
शॉर्ट हेडलाइन
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में बहुमत से इंच भर दूर रहने वाली कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद नए प्लान पर काम कर रही है। नई रणनीति की मदद से कांग्रेस अपने विधायकों की संख्या बहुमत के आंकड़े के पार ले जाना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी इस समय तीन ऐसे बीजेपी विधायकों के संपर्क में है। ये तीनों विधायक पहले कांग्रेस से जुड़े भी रहे हैं। इन विधायकों के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संपर्क साधे हुए हैं। इस कवायद के पीछे दो मुख्य वजह हैं। पहली- कमलनाथ को छह महीने के अंदर चुनाव लड़ना है और दूसरी यह कि कांग्रेस को अपनी सीटों का आंकड़ा बहुमत के पार लेकर जाना है।

पहले कमलनाथ को सौंसर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने पर हुई चर्चा
230 सीटों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। बसपा के 2, सपा का 1 और 4 निर्दलीय विधायकों का भी कांग्रेस को समर्थन है। कमलनाथ प्रदेश के सीएम बन चुके हैं। उन्हें छह महीने के भीतर विधायक बनने के लिए चुनाव लड़ना होगा। पार्टी के भीतर शुरुआत में कमलनाथ को छिंदवाड़ा जिले की सौंसर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने पर चर्चा हुई। सौंसर सीट से कांग्रेस विधायक जीते हैं और वह किसी भी वक्त अपने सीएम के लिए इस्तीफा देकर सीट खाली कर सकते हैं, लेकिन यह फॉर्मूला पार्टी के रणनीतिकारों को जरा खटक रहा है।
कारण यह है कि अपनी पार्टी के विधायक का इस्तीफा दिलवाकर कमलनाथ को चुनाव लड़वाने से कांग्रेस की सीटों की संख्या उतनी ही रहेगी।

अब कमलनाथ को लड़ाने के लिए नए फॉर्मूले पर काम कर रही
जब भी किसी बड़े नेता को चुनाव लड़ाना होता है तो ऐसी सेफ सीट देखी जाती है, जहां से जीतने में कोई कठिनाई न हो। इसके बाद अपनी पार्टी के नेता का इस्तीफा कराया जाता है और बड़े नेता को लड़ा दिया जाता है। कमलनाथ के लिए भी ऐसा ही फॉर्मूला बना, लेकिन पार्टी में अब एक नए फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी अपने किसी विधायक का इस्तीफा कराने की जगह बीजेपी के किसी विधायक का इस्तीफा कराना चाहती है। साथ बीजेपी के कुछ विधायकों को अपने पाले में करने की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

यह है कांग्रेस का एमपी में पूर्ण बहुमत पाने का पूरा प्लान
कांग्रेस पार्टी के पास इस समय कुल 114 विधायक हैं। एमपी में बहुमत का आंकड़ा 116 है। कमलनाथ की सरकार तो बन गई, लेकिन दो सीटों के लिए अब भी कांग्रेस दूसरों पर निर्भर है। ऐसे में मजबूती से सरकार चलाना थोड़ा मुश्किल होगा। अब अगर कांग्रेस अपने एक विधायक का इस्तीफा कराती है और उसी सीट से कमलनाथ को लड़ाती है तो उसकी संख्या पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर बीजेपी का विधायक इस्तीफा देता है और कमलनाथ वहां से जीत जाते हैं तो कांग्रेस का आंकड़ा बढ़कर 115 हो जाएगा। साथ ही अगर कांग्रेस जिन तीन भाजपा विधायकों के संपर्क में हैं, उनमें से एक भी अगर कांग्रेस में आ गया तो पार्टी अपने दम पर बहुमत में आ जाएगी। हालांकि, कांग्रेस पास चार निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते वे कांग्रेस की सीटों की संख्या नहीं बढ़ा सकते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि ये चारों कांग्रेस के ही बागी हैं।












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