सुप्रीम कोर्ट में दो नए जजों की नियुक्ति, केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी
सुप्रीम कोर्ट में दो नए जजों की नियुक्ति को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस पार्डीवाला को जल्द ही सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ दिलाई जाएगी।
नई दिल्ली, 7 मई : केंद्र सरकार ने गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया (Justice Sudhanshu Dhulia) और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जमशेद बुर्जोर पार्डीवाला (Justice Jamshed Burjor Pardiwala) की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। दोनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगले सप्ताह दोनों के शपथ लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 34 हो जाएगी। कुल बता दें कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट जजों के कुल स्वीकृत पद 34 हैं।

शनिवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक केंद्र सरकार ने कहा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति ने गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। नोटिफिकेशन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस धूलिया की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। जस्टिस पार्डीवाला की नियुक्ति के लिए भी ऐसा ही नोटिफिकेशन जारी किया गया।
गौरतलब है कि चीफ जस्टिस एनवी रमना के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गत 4 मई को न्यायमूर्ति धूलिया और पार्डीवाला को पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम ने केंद्र सरकार से कहा था कि गुजरात और गौहाटी हाईकोर्ट में पदस्थापित दोनों न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में नियुक्ति की मंजूरी दी जाए।
दादा स्वतंत्रता सेनानी, उत्तराखंड से दूसरे SC जज
पदोन्नति के बाद न्यायमूर्ति धूलिया उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट जज बनने वाले दूसरे न्यायाधीश होंगे। जस्टिस धूलिया उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के सुदूरवर्ती गांव मदनपुर के रहने वाले हैं। उनके दादा भैरव दत्त धूलिया एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्हें 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग लेने के लिए सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी। जस्टिस धूलिया के दादा संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेदाचार्य भी थे। उन्होंने अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ रिहा होने से पहले लगभग तीन साल जेल की सजा काटी थी।
- साल 2004 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित।
- नवंबर 2008 में उत्तराखंड के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति।
- गौहाटी उच्च न्यायालय (असम, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश हाईकोर्ट) के मुख्य न्यायाधीश 10 जनवरी, 2021 को बने।
फिल्म डायरेक्टर हैं छोटे भाई तिग्मांशू धूलिया
जस्टिस धूलिया के पिता न्यायमूर्ति केशव चंद्र धूलिया इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे। जस्टिस धूलिया के दो भाई हैं। जस्टिस धूलिया के छोटे भाई तिग्मांशु धूलिया राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक हैं। उनके बड़े भाई हिमांशु धूलिया एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी हैं। जस्टिस धूलिया का जन्म 10 अगस्त, 1960 को लैंसडाउन, पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून और इलाहाबाद में हुई, जिसके बाद वे सैनिक स्कूल, लखनऊ गए। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन और कानून की डिग्री हासिल की। स्कूल और कॉलेज के दिनों में धूलिया बहस में बढ़-चढ़ कर भाग लेते थे। कानून की डिग्री लेने के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय में उन्होंने पहले मुख्य स्थायी वकील और बाद में उत्तराखंड राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Solicitor General) के रूप में सेवाएं दीं।
सुप्रीम कोर्ट जजों की नियुक्ति से जुड़े कुछ तथ्य
- प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली पांच जजों की कॉलेजियम अगस्त, 2021 से अब तक 11 जजों की नियुक्ति की सिफारिश कर चुकी है।
- कॉलेजियम की ओर से गत 9 महीनों के भीतर 11 जजों की नियुक्ति की सिफारिश की गई है। यह रिकॉर्ड संख्या है।
- रिकॉर्ड जजों की नियुक्ति में 3 महिलाओं का सुप्रीम कोर्ट जज बनना भी शामिल है।
- सीजेआई रमना ने विगत 31 अगस्त, 2021 को एक साथ 9 जजों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई थी। इसमें तीन महिलाएं- जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस इंदिरा बनर्जी शामिल थीं।

- सीजेआई रमना के अलावा कॉलेजियम में जस्टिस यूयू ललित, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और एल नागेश्वर राव भी शामिल हैं।
- एनवी रमना की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने अलग-अलग उच्च न्यायालयों में 10 नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश भी की है।
- जस्टिस रमना के चीफ जस्टिस बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अब तक उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए 180 नामों की सिफारिश कर चुकी है।
पांच साल बाद अल्पसंख्यक समुदाय के जज का प्रमोशन
सुप्रीम कोर्ट जज बनने जा रहे गुजरात हाईकोर्ट में पदस्थापित जस्टिस पार्डीवाला पारसी समुदाय से आते हैं। जस्टिस पार्डीवाला सुप्रीम कोर्ट जज बनने चौथे पारसी होंगे। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक संभावना है कि जस्टिस पार्डीवाला भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में लगभग दो साल और तीन महीने का कार्यकाल संभालेंगे। यह भी दिलचस्प है कि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले किसी जज का सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन पांच साल के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है। इससे पहले न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर फरवरी, 2017 में सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किए गए थे।
परिवार में न्यायविदों की भरमार
न्यायमूर्ति पार्डीवाला का जन्म 12 अगस्त, 1965 को मुंबई में हुआ था और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने गृह नगर वलसाड (दक्षिण गुजरात) के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की। उन्होंने जेपी आर्ट्स कॉलेज, वलसाड से स्नातक किया। उन्होंने 1988 में केएम मुलजी लॉ कॉलेज, वलसाड से कानून की डिग्री प्राप्त की। न्यायमूर्ति पार्डीवाला वकीलों के परिवार में चौथी पीढ़ी के लीगस प्रोफेशनल हैं। उनके पिता बुर्जोर कावासजी पार्डीवाला ने वलसाड और नवसारी जिलों में 52 वर्षों तक वकालत की थी। जस्टिस जेबी पार्डीवाला के दादा और परदादा भी वकील थे। दोनों वलसाड और नवसारी जिलों में वकालत करते थे।
गुजरात हाईकोर्ट में जज 11 साल से अधिक समय तक
कानून की डिग्री लेने के बाद न्यायमूर्ति पार्डीवाला ने वर्ष 1990 में गुजरात के उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की। वर्ष 1994 में पार्डीवाला बार काउंसिल ऑफ गुजरात के सदस्य के रूप में चुने गए। उन्हें वर्ष 2002 में गुजरात उच्च न्यायालय के लिए स्थायी वकील के रूप में नियुक्त किया गया और 17 फरवरी, 2011 को वे गुजरात हाईकोर्ट में जज बने। सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति तक (11 वर्ष से अधिक) जस्टिस पार्डीवाला गुजरात हाईकोर्ट में सेवारत रहे।












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