'जांच होने तक ज्यूडिशियल काम नहीं करेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा', कैश कांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिए ये 3 आदेश
Delhi High Court Justice Yashwant Varma: दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा घर से मिले अधजले कैश को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर मिले नकदी की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के साथ अधजले नोटों की तस्वीरें और वीडियो भी सार्वजनिक की गई है। ये बेहिसाब कैश यशवंत वर्मा के आवासीय परिसर में स्थित आउटहाउस में मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की जांच रिपोर्ट और जस्टिस यशवंत वर्मा का जवाब सार्वजनिक कर दिया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने इंटरनल इन्क्वायरी के बाद सुप्रीम कोर्ट को 21 मार्च को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा था कि इस मामले में आगे जांच कराना आवाश्यक है। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने कैश एट होम मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

जस्टिस यशवंत वर्मा को ज्यूडिशियल काम देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया मना
🔴 मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना तीन आदेश दिए हैं। सबसे पहला तो ये कि तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट आने तक जस्टिस यशवंत वर्मा को किसी तरह का अधिकारिक काम ना दिए जाए। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा को ज्यूडिशियल काम देने से मना कर दिया है।
🔴 इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के 6 महीने की कॉल डिटेल्स की जांच की जाएगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने यशवंत वर्मा से कहा है कि वो पिछले छह महीने के अपने मोबाइल से कोई भी डेटा यानी मैसेज और कॉल रिकॉर्ड डिलीट न करें।
🔴 सुप्रीम कोर्ट ने तीसरा आदेश जस्टिस यशवंत वर्मा के घर के सिक्योरिटी ऑफिसर्स और गार्ड की डिटेल्स निकालने की भी दी है। सीजेआई ने जस्टिस वर्मा से 15 मार्च की सुबह "जली हुई नकदी" को हटाने वाले व्यक्ति के बारे में भी जवाब मांगा है।
हालांकि जस्टिस यशवंत ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ये भी कहा है कि उन्हें जो वीडियो और तस्वीरें दिखाई गई थी... जारी की गई फूटेज से अलग थी।
जस्टिस यशवंत वर्मा 'कैश एट होम' क्या है पूरा मामला?
🔴 सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के घर में आग बुझाने के अभियान के बारे में दिल्ली पुलिस द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों को सार्वजनिक किया। इस घटना के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा अपने घर में मौजूद नहीं थे।
🔴 रिपोर्ट के साथ अटैच वीडियो में साफ तौर पर नकदी से भरे बोरे दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से कुछ जले हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटना 14 मार्च को एक स्टोर रूम में हुई, जहां जस्टिस वर्मा के आधिकारिक बंगले में रहने वालों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है।
🔴 15 मार्च को शाम करीब 4:50 बजे दिल्ली के पुलिस आयुक्त ने मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय को जस्टिस वर्मा के बंगले में 14 मार्च को रात 11.30 बजे लगी आग के बारे में सूचित किया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार-सह-सचिव को व्यक्तिगत रूप से घटना स्थल का दौरा करने और एक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। रजिस्ट्रार ने जस्टिस वर्मा के निजी सचिव को सूचित करने के बाद घटनास्थल का दौरा किया। जस्टिस वर्मा भी वहां मौजूद थे।
🔴 दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जस्टिस उपाध्याय को पता चला कि आग के बारे में जस्टिस वर्मा के निजी सचिव ने पीसीआर को कॉल किया था, जब जस्टिस वर्मा के नौकरों ने उन्हें आग के बारे में बताया था।
🔴 16 मार्च को सीजेआई को घटना के बारे में बताने के बाद जस्टिस उपाध्याय ने अगले दिन जस्टिस वर्मा से संपर्क किया। जस्टिस वर्मा ने जवाब में कहा कि कमरा नौकरों, माली और कभी-कभी सीपीडब्ल्यूडी कर्मियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। जब चीफ जस्टिस ने उन्हें पुलिस कमिश्नर द्वारा भेजी गई व्हाट्सएप तस्वीरें दिखाईं, तो जस्टिस वर्मा ने "अपने खिलाफ किसी साजिश की आशंका" जताई।
🔴 पुलिस आयुक्त ने 16.3.2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जज यशवंत वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड के अनुसार, 15.3.2025 की सुबह जिस कमरे में आग लगी थी, वहां से मलबा और अन्य आंशिक रूप से जले हुए सामान हटा दिए गए थे।
🔴 मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को अपनी रिपोर्ट में कहा कि मामले की गहन जांच की आवश्यकता है। मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा, "मेरे द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया यह पता नहीं चलता है कि बंगले में रहने वाले लोगों, नौकरों, माली और सीपीडब्ल्यूडी कर्मियों (यदि कोई हो) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने कमरे में प्रवेश किया था या उसमें प्रवेश किया था। मेरी प्रथम दृष्टया राय है कि पूरे मामले की गहन जांच की आवश्यकता है।"
जस्टिस यशवंत वर्मा ने पूरे मामले पर क्या कहा?
जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा,
"मैं साफ-साफ कहता हूं कि न तो मैंने और न ही मेरे परिवार के किसी सदस्य ने कभी भी उस स्टोररूम में कोई कैश जमा की थी। हमने समय-समय पर जो भी कैश इस्तेमाल किया है, वे सभी दस्तावेजित हैं और हमेशा नियमित बैंकिंग चैनलों, यूपीआई एप्लिकेशन और कार्ड के जरिए की जाती है। जहां तक कैश बरामद होने के आरोप का सवाल है, मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे घर के किसी भी व्यक्ति ने कमरे में जले हुए नोटों को देखने की कभी कोई सूचना नहीं दी। यह इस बात से और पुष्ट होता है कि जब अग्निशमन कर्मियों और पुलिस के घटनास्थल से चले जाने के बाद हमें वह स्थान वापस लौटाया गया तो वहां कोई नकदी नहीं थी, इसके अलावा हमें मौके पर की गई किसी भी बरामदगी या जब्ती के बारे में सूचित नहीं किया गया। इसे अग्निशमन सेवा के प्रमुख के बयान के प्रकाश में भी देखा जा सकता है, जिसे मैंने समाचार रिपोर्टों से प्राप्त किया है। मुझे लगता है कि मुझे इस मामले में फंसाया जा रहा है।"












Click it and Unblock the Notifications