दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे जेएनयू के तीन प्रोफेसर, हिंसा के सबूतों को बचाएं
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के तीन प्रोफेसर कैंपस में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे हैं। इन तीन प्रोफेसर की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया है कि 5 जनवरी को हुए हिंसा मामले में अदालत सीसीटीवी फुटेज और सबूतों को संरक्षित किए जाने को लेकर आदेश दे। याचिका में ये डर जाहिर किया गया है कि जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डाटा और साक्ष्य नष्ट किए जा सकते हैं, इन्हें सुरक्षित किया जाए।

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार शाम नकाबपोश बदमाशों ने हमला कर दिया था। इसमें करीब 40 छात्र और शिक्षक घायल हुए थे। इस हमले के दौरान दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर छात्रसंघ ने सवाल उठाए हैं। कई प्रोफेसर और छात्र ये कह चुके हैं कि हिंसा के दौरान के सबूत खत्म किए जा सकते हैं।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और कई प्रोफेसर कुलपति जगदीश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कहा है कि जब तक जेएनयू के कुलपति का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक विश्वविद्यालय में किसी भी तरह की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। जेएनयू टीचर्स के मुताबिक, उन्होंने मानव संसाधन विकास सचिव के समक्ष स्पष्ट तौर पर जेएनयू कुलपति को तुरंत हटाए जाने की मांग रखी।
जेएनयू अध्यापकों का यह कहना है कि 5 जनवरी की शाम जेएनयू में हुई हिंसा में कुलपति की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने गुरुवार को मंत्रालय के बाहर आयोजित छात्र के प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। अध्यापकों का कहना है कि कुलपति ने समय रहते ना तो पुलिस को हिंसा की सूचना दी और ना ही पुलिस ने सूचना मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई की।












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