Jharkhand Politics: क्यों गई चंपई सोरेन की कुर्सी, स्वाभाविक परिवर्तन या कुछ और! आगे हो सकता है कोई खेल?

Jharkhand Political News: झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को मात्र 152 दिनों के अंदर ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के लिए कुर्सी खाली करनी पड़ी है।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत पर जेल से बाहर निकलने के कुछ दिन बाद ही झारखंड में सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन, विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हुए यह सत्ता परिवर्तन कितना स्वाभाविक है, यह बड़ा सवाल बन गया है।

champai soren hemant soren

झारखंड में एक हाथ इस्तीफा, दूसरे हाथ सरकार बनाने का दावा
इससे पहले बुधवार को पहले हेमंत सोरेन को पार्टी ने विधायक दल का नया नेता चुना और फिर वे गठबंधन के भी नेता चुन लिए गए और राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन के सामने चंपई के इस्तीफे के साथ ही नई सरकार बनाने के लिए 44 एमएलए के समर्थन का दावा पेश कर दिया।

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क्या चंपई हेमंत सोरेन खुद इस्तीफे के लिए तैयार हो गए?
सत्ता परिवर्तन के लिए बुलाई गई विधायक दल की बैठक में शामिल जेएमएम के एक एमएलए के मुताबिक चंपई 'भावुक' थे, लेकिन कहा कि 'पार्टी पहले है।' उनके 'भावुक' होने की वजह ये हो सकती है पार्टी के कुछ सूत्रों के मुताबिक वे पहले इस्तीफे से आनाकानी कर रहे थे। लेकिन, जब कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बहुत समझाया तो वह इसके लिए राजी हुए।

खुद पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे चंपई!
सूत्रों के अनुसार चंपई अभी पद नहीं छोड़ने के लिए यह तर्क दे रहे थे कि कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं और उनका हटना 'अच्छा नहीं लगेगा।' उनकी यह भी दलील थी कि वे भी अपने क्षेत्र में 'जनाधार वाले नेता' हैं और हेमंत तो सिर्फ जमानत पर छूटे हैं। उनकी सरकार को फिर अस्थिर करने की कोशिश हो सकती है।

उस बैठक में शामिल एक सूत्र के अनुसार, 'चंपई जी ने कहा कि चुनाव से पहले सिर्फ दो महीने की तो बात है और इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत है। उनका कहना था कि हेमंत और कल्पना (जेएमएम विधायक और हेमंत सोरेन की पत्नी) को तो वह बेटा और बेटी समझते हैं।'

सहयोगी दलों ने भी बनाया हेमंत के लिए दबाव!
लेकिन, बैठक में शामिल कांग्रेस और आरजेडी के लोगों ने भी हेमंत के पक्ष में दबाव बनाया और कहा कि 2019 के विधानसभा चुनावों में वे उन्हीं के चेहरे पर जीत कर आए थे, इसलिए उनका नेतृत्व रहना ही सही होगा। जानकारी के मुताबिक सहयोगी दलों के कुछ नेताओं ने इस दौरान चंपई से अकेले में भी लंबी बातचीत की, जिसके बाद जाकर वह किसी तरह से इस्तीफे के लिए तैयार हुए।

चंपई हो गए निराश!
हेमंत की गैर-मौजूदगी में चंपई सोरेन ने राज्य प्रशासन को सामान्य तरीके से चलाने की कोशिश की है। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने कल्पना सोरेन को मुख्य चेहरा बनाया था, लेकिन फिर भी उन्होंने हर संभव उनका साथ दिया। कभी भी ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने दी, जिससे किसी तरह का तनाव पैदा हो। जानकारी के मुताबिक निराशा के बीच उन्होंने करीबियों से यह भी बताया है कि उन्होंने कल्पना को भी सीएम हाउस छोड़ने के लिए नहीं कहा।

क्या हेमंत के लिए मांझी बनेंगे चंपई?
कुल मिलाकर जो दावा किया जा रहा है कि झारखंड में सत्ता परिवर्तन बहुत ही सहज भाव से हुआ है तो इसकी संभावनाएं नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में अगली सरकार में उनका रोल क्या होने वाला है और वह किस पद के लिए तैयार होंगे, यह भी अभी साफ नहीं है।

जेएमएम के शीर्ष नेतृत्व की यह चिंता हो सकती है कि कहीं आगे चलकर वे जीतन राम मांझी तो नहीं बन जाएंगे? क्योंकि, प्रदेश के कोल्हान क्षेत्र में उनका बड़ा जनाधार माना जाता है और इस क्षेत्र में विधानसभा की 14 सीटें हैं।

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बीजेपी को भी चंपई की भावुकता में उम्मीदें नजर आने लगी हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का कहना है कि शिबू सोरेन के परिवार से बाहर के नेता जेएमएम के लिए 'काम चलाऊ' होते हैं। सोरेन का परिवार उन्हें 'इस्तेमाल' करता है और फिर 'दूध की मक्खी की तरह' फेंक देता है।

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