झारखंड तक पहुंचा बांग्लादेशी आतंकवादियों का नेटवर्क!
रांची। आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) ने पश्चिम बंगाल में तो पहले से ही जड़ें मजबूत कर ली हैं, लेकिन अब इस संगठन का नेटवर्क झारखंड में फैलने लगा है। इस काम में उसका सहयोग कर रहा है स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) के कार्यकर्ता कर रहे हैं। यह आंकलन हमारा नहीं बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का है, इसीलिये एनआईए की टीम का अगला ठौर झारखंड है।

हुआ यूं कि बर्धमान धमाके के तार खोजते-खोजते एनआईए की टीम ने एसटीएफ के साथ मिलकर सलाउद्दीन शेख और जहांगीर खान नाम के दो आतंकियों को झारखंड के संग्रामपुर से गिरफ्तार किया। यह वो जगह है, जहां पर सिमी जेएमबी के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रचने की तैयारी में था। इन दो गिरफ्तारियों के बाद एनआईए को शक ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास हो गया है कि इन संगठनों के तार झारखंड तक बिछ चुके हैं और ये कभी भी भारत के किसी भी इलाके को अपना निशाना बना सकते हैं।
डॉक्टर और धर्मगुरु बने आतंकवादी
एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि बंगालादेश बॉर्डर पार कर आतंकियों के लिये झारखंड तक पहुंचना इसलिये भी आसान था, कयोंकि यह राज्य बंगाल से सटा हुआ है। सिमी जो कि जेएमबी के पार्टनर के रूप में काम कर रहा है, उसने संग्रामपुर में ट्रेनिंग कैम्प भी चला रखा था। पूछताछ में पता चला है कि शेख जोकि पेशे से डॉक्टर है और जहांगीर खान जो धर्मगुरु है, दोनों ने यहीं पर ट्रेनिंग ली थी।
एनआईए के सूत्रों के अनुसार इन आतंकियों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग कभी यहीं पर दी गई। जेएमबी और सिमी दोनों ने छोटे-छोटे घरों के अंदर अपना बसेरा बना रखा है। आईबी के अधिकारी ने बताया कि जेएमबी और सिमी दोनों की एक ही विचारधारा है और दोनों के मॉड्यूल भी एक जैसे। बताया जाता है कि आतंकवादी रफीक इस्लाम और अली खान को भी यहीं पर ट्रेनिंग देने के बाद असम भेजा गया था।
कैसी होती है ट्रेनिंग
इस ट्रेनिंग में आतंकियों को सिखाया जाता है कि कैसे भीड़ को निशाना बनाया जाये, कैसे बंदूक चलायी जाये, कैसे भीड़ पर ग्रेनेड फेंका जाये, कैसे पुलिस से बच कर महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंचा जाये। जेएमबी के आतंकियों ने पूछताछ में बातया कि वो ग्रेनेड हमलों में मास्टर हैं, लिहाजा उसी की ट्रेनिंग दे रहे हैं।












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