झारखंड चुनाव : भीड़ कम देख डर गयी भाजपा, दोस्ती के पैगाम पर आजसू ने दिखाये शिवसेना जैसे तेवर
नई दिल्ली। दृश्य एक- तारीख 28 नवम्बर 2019
मुकाम-चतरा की चुनावी सभा। 15 हजार के आसपास भीड़।
गृह मंत्री और भाजपा के जिताऊ रणनीतिकार अमित शाह का भाषण
“ये दस पंद्रह से हम लोग जीत लेंगे क्या ? मुझे बेवकूफ मत बनाओ। मैं भी बनिया हूं, सारा गणित जानता हूं। मोबाइल उठाओ और अपने 25 -25 लोगों को भाजपा के लिए वोट करने को कहो।”
दृश्य दो – तारीख 28 नवम्बर 2019
मुकाम – रांची में एक टीवी चैनल का कार्यक्रम।
अमित शाह से सवाल- इस बार भाजपा का आजसू से नाता टूट गया है, क्या चुनाव में कोई झटका लगेगा ?
अमित शाह – “मुझे विश्वास है कि चुनाव के नतीजों के बाद आजसू और भारतीय जनता पार्टी फिर से एक बार साथ होंगे। भारतीय जनता पार्टी हर सीट पर चुनाव लड़ रही है। मुझे भरोसा है कि पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। कमल के निशान की सरकार झारखंड में होगा मगर आजसू भी हमारे साथ होगी।”
दृश्य तीन- तारीख 29 नवम्बर 2019
मुकाम - रांची
आजसू प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत का बयान
“आजसू का समर्थन करने से पहले भाजपा को झारखंड के सवालों का समर्थन करना चाहिए। जनभावना का ख्याल रखना चाहिए। आदिवासी-मूलवासी के सरोकार की बात होनी चाहिए। सीट शेयरिंग के समय भाजपा के ही कुछ नेता कह रहे थे कि आजसू की हैसियत क्या है ? औकात क्या है? अब भाजपा के सुर तो बदले हैं लेकिन चाल नहीं बदली है। भाजपा को हमारी भावनाओं की कद्र करनी चाहिए। अब हमारी पार्टी गंगा से लेकर सोन तक फैल रही है। सीएम मंच से नहीं पंच से तय होगा।”

क्या भाजपा को सताने लगा हार का डर ?
झारखंड चुनाव से जुड़े इन तीन दृश्य़ों की वजह से भाजपा की चुनावी पटकथा में ट्विस्ट आ गया है। 65 पार के नारे पर चुनाव लड़ रही भाजपा को अब हार का डर सताने लगा है। अमित शाह जैसे दिग्गज की सभा में अगर 10-15 हजार की भीड़ होगी तो चिंता का होना लाजिमी है। क्या विपक्ष की मिलीजुली ताकत भाजपा पर भारी पड़ रही है ? अमित शाह जैसे पारखी को यह अहसास होने लगा है कि वोटर अब भाजपा में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसलिए उन्होंने उम्मीदवारों को झाड़ लगायी कि फोन उठाओ और खुद भी वोट का इंतजाम करो। अमित शाह ने झारखंड के भाजपा उम्मीदवारों के संदेश दिया कि केवल प्रधानमंत्री मोदी के नाम के भरोसे मत रहो। अपनी तरफ से भी मेहनत करो और लोगों से जुड़ो। चतरा की चुनावी सभा में ही अमित शाह कम भीड़ देख कर नाराज हुए थे। चतरा में आज चुनाव सम्पन्न हो गया। इस सीट पर भाजपा ने अपने सीटिंग एमएलए जयप्रकाश भोक्ता का टिकट काट कर राजद के पूर्व नेता जनार्दन पासवान को टिकट दिया था। अमित शाह के गुस्से से लग रहा है कि जनार्दन पासवान की स्थिति ठीक नहीं है।

बैकफुट पर भाजपा, गलती सुधारने की कोशिश
चुनाव से पहले सीट शेयरिंग के समय भाजपा ने आजसू की 19 सीटों की मांग को खारिज कर दिया। उसने आजसू को कम हैसियत वाला दल बता कर केवल 10 सीटें ऑफर की। नाराज आजसू ने गठबंधन को दरकिनार कर दिया। उसने शुरू में 14 उन सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिये जहां भाजपा चुनाव लड़ रही थी। अब तो उसके 50 उम्मीदवार मैदान में हैं। शुरू में भाजपा के चुनाव प्रभारी ओम माथुर ने आजसू के अलगाव को कोई अहमियत ही नहीं दी। लेकिन जब चुनाव प्रचार में भाजपा को इसका असर दिखने लाग तो उसने यूटर्न ले लिया। गलती सुधारने की कोशिश शुरू हो गयी। भाजपा के नेता नम्बर दो अमित शाह को कहना पड़ा कि चुनाव बाद आजसू भाजपा के साथ होगा। जिस आजसू को उन्होंने पहले भाव नहीं दिया था अब उसकी चिरौरी करनी पड़ रही है। भाजपा ने सोची समझी नीति के तहत ही आजसू प्रमुख सुदेश महतो के खिलाफ प्रत्याशी नहीं दिया है। तकरार के बाद भी उसने दोस्ती की गुंजाइश बाकी रखी है।

शिवसेना के अंदाज में आजसू
अमित शाह ने भले दोस्ती का पैगाम भेजा है लेकिन आजसू ने बेरुखी ही दिखायी है। उसने भाजपा की मौकापरस्ती पर तंज कसा है। आजसू के प्रवक्ता ने कहा है कि भाजपा का सुर तो बदला है लेकिन चाल नहीं बदली है। आजसू ने शिवसेना के अंदाज में भाजपा को पहले ही अगाह कर दिया है कि मुख्यमंत्री मंच से नहीं पंच से तय होगा। यानी अगर भाजपा को बहुमत नहीं मिला और वह बड़ी पार्टी रही तो ये जरूरी नहीं कि मुख्यमंत्री उसी का होगा। झारखंड की जनता और चुने हुए विधायक सीएम तय करेंगे। आजसू ने भाजपा को पहले चेता दिया है कि वह रघुवर सरकार की स्थानीय नीति के खिलाफ है। यानी भविष्य में वह भाजपा के साथ अपनी शर्तों पर बात करेगी। तो क्या झारखंड में भी महाराष्ट्र जैसे महानाटक की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है ?












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