झारखंड चुनाव परिणाम: क्या राहुल गांधी की कम सक्रियता, कांग्रेस की जीत की गारंटी है?
नई दिल्ली। साल 2019 जाते-जाते एक और राज्य के विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए हैं। ये नतीजे केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए बुरी खबरों की तरह हैं। महाराष्ट्र के बाद एक और राज्य बीजेपी के हाथ से निकल गया है। झारखंड में अब कांग्रेस के गठबंधन में सरकार बनेगी और निश्चित तौर पर बीजेपी को मनमसोस करना पड़ेगा। जो बात इन नतीजों के बाद सबसे दिलचस्प है वह है कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का इन चुनावों में पिछले चुनावों की तुलना में कम सक्रिय नजर आना। इन चुनावों में राहुल की रैलियों की संख्या कुछ कम रही। कहीं न कहीं विशेषज्ञ इस बात को दबी जुबां से कहने लगे हैं कि इन नतीजों के बाद यह मान लिया जाना चाहिए कि कहीं न कहीं राहुल की कम रैलियां कांग्रेस के लिए विनिंग कार्ड में तब्दील हो सकती हैं।

लोकसभा चुनावों के बाद मजबूत कांग्रेस
इस साल का आगाज लोकसभा चुनावों के साथ हुआ। इन चुनावों में कांग्रेस ने राहुल के नेतृत्व में जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। लेकिन नतीजे पार्टी के लिए एक बार फिर बुरा सपना बनकर रह गए। इन चुनावों के बाद राहुल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। लोकसभा चुनाव के बाद जहां-जहां विधानसभा चुनाव हुए, वहां पर कांग्रेस पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन में सरकार है तो अब झारखंड में भी पार्टी सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई है।

राहुल से ज्यादा सोनिया पर भरोसा
वर्तमान समय में कांग्रेस की कमान अस्थायी तौर पर सोनिया गांधी के हाथों में हैं। चुनावों से साफ है कि सोनिया के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी पहले से ज्यादा एकजुट नजर आ रही है। सोनिया कहीं न कहीं सारे गुटों को एक साथ लाने और उन्हें काम करने की दिशा में प्रेरित करने में बहुत तक कामयाब भी साबित हुई हैं। इन चुनावों के नतीजों से यह बात तो कम से कम साबित हो गई है। झारखंड चुनावों से पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव हुए थे और दोनों ही जगहों पर पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में काफी बेहतर रहा। हरियाणा में जरूर पार्टी सरकार बनाने से रह गई, मगर महाराष्ट्र में गठबंधन में सरकार चला रही है।

दो दिसंबर को राहुल ने की थी शुरुआत
अब कांग्रेस पार्टी को झारखंड के चुनावों में भी बड़ी सफलता मिली है। यह चुनावी नतीजे पार्टी के लिए संजीवनी बूटी की तरह हैं। झारखंड में राहुल गांधी की रैलियों की अगर बात करें तो उन्होंने चार रैलियां कीं। इन सभी राज्यों में राहुल गांधी की बहुत कम सक्रियता रही और गिनी चुनी रैलियां कीं। राहुल ने पहली रैली दो दिसंबर को सिमदेगा में की थी। एक रैली बारकागांव, एक बोकारो और एक रैली रांची में की थी। वहीं झारखंड में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ चुनावी रैलियां कीं थीं। एक रैली राहुल की बहन प्रियंका ने भी की थीं और उस रैली में प्रियंका भारी भीड़ जुटाने में कामयाब रही थीं।












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