अब अम्मा आएंगी मोदी के साथ
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) तो अब तमिलनाडू के रूक गए विकास के लिए जे.जयललिता केन्द्र की मोदी सरकार से हाथ मिलाएंगी। माना जा रहा है कि अम्मा जल्दी ही राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी से भेंट करेंगी।
वह एक बार फिर से तमिलनाडू की मुख्यमंत्री बन गई हैं। उनका फिर से राज्य का मुख्यमंत्री बनना बताता है कि गिरकर उठना कोई अम्मा से सीखे। जब उनके करीबियों ने भी उनकी राजनीति में वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी, तब कनार्टक हाई कोर्ट ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी करके उनके फिर से राजनीति में एक्टिव होने का रास्ता साफ कर दिया।
थम गया था विकास
उनके मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद तमिलनाडू में विकास की रफ्तार ठप हो गई थी। कोई काम नहीं हो रहा था। नए हालातों में माना जा सकता है कि वे फिर से राज्य को विकास के रास्ते पर लेकर जाएंगी। पर ये तब ही मुमकिन होगा जब वे केन्द्र की मोदी सरकार से संबंध मधुर रखेंगी।
साथ देगी सरकार का
माना जा रहा रहा है कि जयललिता अब मोदी सरकार का साथ देगी। वह भूमि अधिग्रहण बिल पर भी सरकार के साथ आ सकती हैं। उन्हें केन्द्र से वित्तीय मदद चाहिए। जाहिर है कि अगर वह मोदी से संबंध बिगाड़ेंगी तो उन्हें लाभ नहीं होगा।
जेटली से दोस्ती
बता दें कि जयललिता के वित्त मंत्री अरुण जेटली से बेहतर संबंध हैं। पिछले साल मोदी सरकार के गठन के बाद जेटली जे.जयललिता से मिले थे चेन्नई में। तब जानकारों ने दावा किया था कि जेटली ने जयललिता सेबात की थी ताकि उनकी पार्टी राज्यसभा में सरकार की तरफ से रखे जाने वाले बिलों को पारित करवाने में मदद करे।
37 सांसद लोकसभा में
लोकसभा में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के 37 सांसद हैं। उसके राज्य सभा में 11 सांसद हैं। जानकारों का कहना है कि जयललिता के खिलाफ आए फैसले के बाद तमिलनाडू में सरकार लगभग पंगु हो गई थी। वहां पर विदेशी निवेश नहीं आ रहा था। विदेशी निवेशकों के सम्मेलन नहीं हो रहे थे। बस, सारा काम चालू तरीके से हो रहा था। अब फिर से हालात सुधरेंगे।













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